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बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के 5 नए चुनावी मंत्र

बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की हालिया रैलियों में कुछ नए फैक्टर नजर आए. फिर चाहे वह रविवार की लखनऊ रैली हो या सोमवार की मुजफ्फरपुर रैली.

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नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी

बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की हालिया रैलियों में कुछ नए फैक्टर नजर आए. फिर चाहे वह रविवार की लखनऊ रैली हो या सोमवार की मुजफ्फरपुर रैली . पढ़ें, क्या है बीजेपी के पीएम कैंडिडेट की नई रणनीतिः

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1. पूरा फोकस सीएम की धज्जियां उड़ाने पर

रैलियों के दूसरे चरण में नरेंद्र मोदी की रणनीति में एक बदलाव साफ नजर आ रहा है. अब वह राज्यों में सत्तारूढ़ विरोधियों को सीधे चुनौती दे रहे हैं. कल यूपी के लखनऊ और आज बिहार के मुजफ्फरपुर की रैली में यही नजर आया. लखनऊ में मोदी ने कांग्रेस, बसपा का रस्मी जिक्र किया और पूरा ध्यान राज्य की अखिलेश सरकार की धज्जियां उड़ाने में लगाया. मुजफ्फरपुर में भी मोदी के निशाने पर आरजेडी, कांग्रेस न के बराबर रहे. उन्होंने चुन-चुनकर नीतीश को निशाने पर लिया.

2. स्थानीय भावनाओं पर जमकर जोर

नरेंद्र मोदी ने बिहार में अपने धुर विरोधी नीतीश कुमार का नाम फिर नहीं लिया. मगर भाषण की शुरुआत पिछली रैली के दौरान हुए हादसे से की. रैली में मारे लोगों के नाम पर भावनाएं उबारते हुए मोदी बोले कि ठीक है, बीजेपी के नेताओं को सुरक्षा मत दो. मगर राजनीतिक द्वेष के लिए गरीब लोगों को तो मर मारो.

स्थानीय भावनाओं का ये ज्वार लखनऊ रैली में दिखा था. वहां मोदी ने मंच से ओला वृष्टि से प्रभावित किसानों की तकलीफ पर बात की. फिर कानपुर की उस घटना का जिक्र किया. जहां सपा के विधायक की डॉक्टरों से भिड़ंत के चलते स्ट्राइक की नौबत आ रखी है.

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3. सेकुलरिज्म बनाम विकास की बहस

मोदी जानते हैं कि उनके विरोधी चाहे वह नीतीश हों या लालू. सेकुलरिज्म की दुहाई देकर उनका चुनावी रथ रोकना चाह रहे हैं. मगर मोदी इस बहस को सेकुलरिज्म बनाम विकास की बहस में तब्दील कर रहे हैं. उन्होंने इसे पेश भी ऐसे ही किया कि देश की हर समस्या के मुकाबले वह तो समाधान पेश कर रहे हैं और विपक्षी सेकुलरिज्म की फरेबी माला जप रहे हैं.

4. अटल के उत्तराधिकारी की बात

नरेंद्र मोदी जानते हैं कि जनता पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के शासन को याद करती है. इसलिए अब वह बार बार लगातार अटल बिहारी वाजपेयी की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं का जिक्र करते हैं. खुद को उनके सपनों का वारिस बताते हैं. लखनऊ तो खैर अटल का संसदीय क्षेत्र था. मगर मुजफ्फरपुर में भी उन्होंने वाजपेयी सरकार की स्वर्ण चतुर्भुज सड़क परियोजना का जिक्र किया. उसके स्थानीय लाभ बताए. नदियों को जोड़ने की योजना का जिक्र किया और फिर कहा, मैं अटल जी के सपनों को पूरा करूंगा.

5. चाय बेचने वाले OBC की इमेज पर काम

मोदी ऑडियंस के मुताबिक स्पीच बदल रहे हैं. मगर हिंदी पट्टी के उनके भाषणों में दो बातें बार बार आती हैं. एक तो अपने शुरुआती संघर्ष का जिक्र करते हुए बताना कि जब चायवाला पीएम बनने को है तो एलीट पार्टियों को दिक्कत हो रही है. दूसरा ओबीसी होने की बात दोहराना. आज भी मोदी ने कहा कि विरोधी बीजेपी को बनिया, ब्राह्मणों की पार्टी कह खारिज करते थे. उस पार्टी ने एक ओबीसी के बेटे को पीएम के लिए खड़ा कर दिया, ये बात विरोधियों को हजम नहीं हो रही.

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