आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी पर केस करना पटना एसएसपी विकास वैभव को भारी पड़ा और महज 2 महीने 4 दिन में ही उन्हें पटना से हटा दिया गया.
सिर्फ एसएसपी ही नहीं बल्कि 10 दिन पहले ही पटना की डीएम बनीं प्रतिमा एस कुमार को भी हटा दिया गया. सरकार के सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को मदरसा शिक्षकों पर हुए लाठीचार्ज ने आग में घी का काम किया. वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे मदरसा शिक्षकों का जुलूस जब प्रतिबंधित इलाके में घुसने की कोशिश कर रहा था तब उनपर लाठी चार्ज हुआ. सरकारी सूत्र फिलहाल तबादले की यही वजह बता रहे हैं लेकिन असली वजह रैली में बैनर होर्डिंग पर प्रशासन के कड़े तेवर ही उसकी असली वजह है.
फेसबुक पर लिखा अपना दर्द
एसएसपी ने अपने तबादले के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए अपना दर्द शेयर किया है. विकास वैभव ने लिखा है- 'कानून का राज स्थापित करने की अपनी कीमत होती है जिसे चुका रहा हूं.'
एनआईए से हाल ही में बिहार लौटे विकास वैभव को जब पटना एसएसपी का जिम्मा मिला तो लोगों को एहसास हुआ कि शायद सरकार कानून का राज के अपने प्रतिबद्धता पर अडिग है लेकिन जैसे-जैसे एसएसपी अपनी कानूनी पकड़ दिखाते गए सरकार असहज होती चली गयी और आखिरकार एक झटके में उन्हें पटना से हटा दिया गया.
बाहुबली विधायक को पहुंचाया था जेल
पटना आते ही पहले ही दिन विकास वैभव ने बाहुबली सत्ताधारी विधायक अनंत सिंह के घर छापेमारी कर उन्हें जेल भेज दिया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जब एक आरोपी कार्यकर्ता का केस कमजोर करने की पैरवी की तो कांग्रेस अध्यक्ष पर ही केस दर्ज कर डाला. बिहार बंद के दिन जब लालू के सामने उनके समर्थकों ने सड़कों पर उत्पात किया तो एसएसपी ने न सिर्फ लालू पर केस दर्ज किया बल्कि चार्जशीट भी दायर कर दी.
रैली के पोस्टर लगाने से रोका
नीतीश कुमार चुपचाप ये सहते रहे लेकिन विकास वैभव ने जब 30 अगस्त के स्वाभिमान रैली की तैयारियों में जब झुकने से मना किया तो नीतीश कुमार ने उन्हें हटाने का फैसला कर लिया. दरअसल पिछले एक हफ्ते में रैली के लिए लग रहे अवैध पोस्टर बैनर पर एसएसपी ने न सिर्फ रोक लगा दी बल्कि कई नेताओं पर केस भी दर्ज कर डाला.
आलम ये है कि लालू और नीतीश की रैली में अब सिर्फ एक दिन बचा है और पटना शहर में रैली के नामोनिशान नहीं दिख रहे, बताया जा रहा है कि लालू इससे खासे खफा थे और रैली के फ्लॉप होने तक की चेतावनी दे डाली थी. नीतीश कुमार जो अब तक अधिकारियों के तबादले में किसी की नहीं सुनते थे अब उन पर भी गठबंधन का दबाव दिखने लगा है.