भले हीं 2015 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी बिना किसी स्थानीय चेहरे को आगे किए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम और नीतियों के बल पर उतरने को तैयार दिख रही हो लेकिन अगर देखा जाए तो बिहार बीजेपी में भी सबसे बड़ा कद एक और मोदी का ही दिखता है. भाजपा के ये दूसरे मोदी हैं सुशील मोदी. बेशक सुशील मोदी आज के वक्त में बिहार बीजेपी में सबसे बड़ा कद रखते हैं. वे एनडीए सरकार में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसी अहम भूमिका निभा चुके हैं और कभी बिहार में बीजेपी का चेहरा माने जाते थे. आइए डालते हैं सुशील मोदी के राजनीतिक जीवन पर एक नजर:
1. सुशील कुमार मोदी का जन्म 5 जनवरी 1952 को पटना में हुआ था.
2. पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान सुशील मोदी छात्र राजनीति में सक्रिय थे और 1974 में जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर छात्र आंदोलन में कूद पड़े.
3. 1962 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य बने.
4. 1983–86 के बीच सुशील मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव रहे.
5. जेपी आंदोलन और आपातकाल के दौरान सुशील मोदी की 5 बार गिरफ्तारी हुई.
6. 1990 में वे सक्रिय राजनीति में आए और पटना सेंट्रल विधानसभा सीट से चुने गए. 1995 और 2000 में भी वे विधानसभा पहुंचे.
7. 1996 से 2004 के बीच वे बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे.
8. पटना हाईकोर्ट में उन्होंने लालू प्रसाद के खिलाफ जनहित याचिका डाली जिसका खुलासा चर्चित चारा घोटाले के रूप में हुआ.
9. 2004 में सुशील मोदी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और भागलपुर से विजयी रहे.
10. 2005 में बिहार चुनावों में एनडीए को बहुमत मिला. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो सुशील मोदी को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली. साथ में वित्त मंत्रालय और कई अन्य विभागों की जिम्मेदारी संभाली.
11. 2010 में एनडीए की फिर जीत हुई और नीतीश सरकार में सुशील मोदी फिर उपमुख्यमंत्री बने.
12. वित्त मंत्री के रूप में जुलाई 2011 में सुशील मोदी को GST पर बनी राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति का चेयरमैन बनाया गया.
इस बार के चुनावों में बीजेपी बिहार में किसी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं करने जा रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम की बदौलत चुनाव लड़ने की तैयारी में है. लेकिन चुनाव के दौरान या चुनाव बाद सुशील मोदी की भूमिका या संभावनाएं इससे कहीं से भी कम नहीं होती.