किताब में दावा किया गया है कि 1998-99 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री रहते हुए नीतीश ने बड़ा घोटाला किया. 'भ्रष्टाचार का बोलबाला' नाम की यह किताब दो बार राष्ट्रपति अवॉर्ड से सम्मानित और ICAR के पूर्व सहायक निदेशक सदाचारी सिंह तोमर ने लिखी है. तोमर ने दावा किया है कि वह इस घोटाले के व्हिसिल ब्लोअर हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश ने कुछ अहम प्रोजेक्ट्स को शुरू करने के लिए वर्ल्ड बैंक से लिए गए 2000 करोड़ के लोन में हेरफेर किया.
AAP के पूर्व नेता ने लिखी है भूमिका
ICAR के पूर्व सहायक निदेशक ने कहा कि यह प्रोजेक्ट कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण और बदलावों के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे थे. इस किताब को बत्रा के अलावा योग गुरु बाबा रामदेव का भी समर्थन मिला है. इस किताब की भूमिका जाने-माने वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण ने लिखी है.
जेडीयू ने सिरे से ठुकराए आरोप
घोटाले को लेकर जब जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी से सवाल किया गया तो उन्होंने किताब की रिलीज और उस पर लगे आरोपों पर खुद ही सवाल खड़े कर दिए. त्यागी ने कहा कि बीजेपी को बिहार में वहीं परिणाम मिलेगा जो दिल्ली में मिला है. उन्होंने नीतीश पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.