बिहार के चुनावी दंगल में ताल ठोककर उतरी शिवसेना के लिए एक अजीब समस्या खड़ी हो गई है. प्रचार अभियान शुरू करने से पहले अब पार्टी को अपने चुनाव चिन्ह को लेकर माथापच्ची करनी पड़ रही है. दरअसल, शिवसेना का चुनाव चिन्ह तीर-धनुष है, जो राज्य में पहले से मौजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा का भी चुनाव चिन्ह है.
गौरतलब है कि झामुमो और शिवसेना दोनों को ही राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा मिला हुआ है. शिवसेना महाराष्ट्र में तो झामुमो झारखंड में तीर-धनुष के साथ चुनाव लड़ती आई है. ऐसे में दूसरे राज्यों में इनका अपने चुनाव चिन्ह पर एकाधिकार नहीं है. हालांकि, बिहार में तीर-धनुष पर पहला दावा झामुमो का बनता है, क्योंकि उसने 2010 में भी बिहार में 60 उम्मीदवारों को उतारा था. इनमें से एक प्रत्याशी को जीत भी मिली थी.
'हम कोशिश में हैं लोग प्रत्याशी को जानें'
एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए शिवसेना नेता और बिहार में चुनाव प्रभारी संजय राउत ने कहा, 'हम लोग बिहार में इस समस्या का सामना कर रहे हैं. हमें यहां अपना चुनाव चिन्ह नहीं मिला. हमलोग कोशिश कर रहे हैं कि लोग सेना के प्रत्याशी को जानें.'
राउत ने बताया कि शिवसेना के 37 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी गई है. शेष नामों की घोषणा भी जल्द की जाएगी. उन्होंने कहा, 'पार्टी बिहार में 150 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.' प्रचार अभियान के बारे में राउत ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे बिहार में वोट मांगने नहीं आएंगे. उन्होंने कहा कि उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे बिहार में जनसभा को संबोधित करेंगे.