बिहार में विधानसभा का बिगुल अभी ठीक ढंग से बजा भी नहीं और सियासी शोर शुरू हो चुका है. दिलचस्प है कि चुनाव में नीतीश कुमार के सामने पीएम नरेंद्र मोदी को चेहरा बनाने पर बीजेपी में ही विवाद खड़ा हो गया है. इस बाबत केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के बयान का सुशील मोदी ने खंडन किया है. सुमो ने कहा कि मोदी बनाम नीतीश का प्रचार भ्रामक है.
गौरतलब है कि मंगलवार सुबह बिहार चुनाव प्रभारी अनंत कुमार ने कहा कि बीजेपी बिहार में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के भरोसे चुनाव लड़ेगी. यानी बिहार में नीतीश बनाम नरेंद्र मोदी की सियासी लड़ाई होगी. लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील मोदी ने कुमार के बयान का खंडन कर दिया. सुशील मोदी ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री बीजेपी से ही होगा, लेकिन सीएम कौन होगा या चुनाव में किसका चेहरा सामने होगा इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है.
यह पूरा वाकया इस मायने में भी खास है कि जिस समय अनंत कुमार 'नीतीश बनाम मोदी' वाला तीर चला रहे थे, उस वक्त सुशील मोदी भी उनके साथ थे, लेकिन तभी सुमो ने इस ओर कोई टिप्पणी नहीं की थी. ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि आखिर दिन ढलते-ढलते ऐसा क्या हुआ कि 'छोटे मोदी' ने अपने तरकश की सुध ली.
दूसरी ओर, इस पूरे मामले में बीजेपी की मजबूरी को भांपकर विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. जेडीयू-आरजेडी गठबंधन पहले ही नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगा चुका है. केजरीवाल की तर्ज पर नीतीश पहले ही अपने चेहरे को सबसे पहले आगे रखकर भुना रहे हैं.
जुलाई में होगा फैसला
बीजेपी नेता सुशील मोदी ने अनंत कुमार के बयान का खंडन करने के साथ ही यह भी कहा कि पार्टी विधानपरिषद चुनाव के बाद जुलाई में सीएम उम्मीदवार या इस ओर कोई फैसला करेगी. हालांकि, इसे बीजेपी की मजबूरी कहें या फिर पार्टी और गठबंधन में कलह पर लगाम लगाने की कोशिश, साफ जाहिर है कि बीजेपी के पास फिलवक्त सीएम पद के लिए कोई दमदार चेहरा नहीं है. ऐसे में अनंत कुमार के बयान और उस पर सुशील मोदी के खंडन ने बीजेपी की अंदरूनी सियासत को भी गर्म कर दिया है.
लालू प्रसाद ने बताया था निर्वंश
यह भी महज संयोग है कि बीजेपी में यह पूरा मसला ऐसे समय में आया है जब सोमवार को ही कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने बीजेपी को निर्वंश करार दिया था. लालू ने साफ तौर पर कहा था कि बीजेपी वंशहीन हो चुकी है और उसके पास कोई चेहरा अब नहीं बचा है जो नीतीश के सामने खड़ा हो सके.
हालांकि, वंशहीन के मुद्दे पर सुशील मोदी ने लालू प्रसाद को को घेरा और कहा कि लालू के लिए सत्ता ही वंश और वंश ही सत्ता है. सुशील मोदी के मुताबिक जीतनराम मांझी के प्रयोग के बाद लालू प्रसाद के लिए वंशवाद और पुख्ता हो चुका है, जबकि बीजेपी हमेशा अपनी आगे की पीढ़ी तैयार कर जाती है.