मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के चुनाव नतीजे आ गए हैं. बीजेपी ने मध्य प्रदेश में सत्ता में वापसी की है. इसके अलावा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से सत्ता छीन ली है. हालांकि, कांग्रेस को तेलंगाना में गुड न्यूज मिली. वहां केसीआर को सत्ता से हटाकर कांग्रेस काबिज हो गई है. हर बार की तरह इस चुनावी रेस में भी वोट स्विंग का अहम रोल रहा है. एक या दो प्रतिशत नहीं, बल्कि 0.49 प्रतिशत में मध्य प्रदेश में बड़ा खेल हो गया है. वहां 2018 के मुकाबले में कांग्रेस का वोट प्रतिशत सिर्फ 0.49 प्रतिशत घटा है और 48 सीटें कम हो गईं हैं. इसी तरह अन्य राज्यों के चुनाव में भी वोट स्विंग ने सरकार बनाने और गिराने में अहम रोल निभाया है.
दरअसल, विधानसभा चुनाव में वोट स्विंग होना आम बात मानी जाती है. राजनीतिक जानकर कहते हैं कि एक-दो प्रतिशत वोट स्विंग होने से ही सरकारें बनाने और गिराने के सारे समीकरण बदल जाते हैं. डेटा कहता है कि कई राज्यों में सिर्फ एक या दो परसेंट वोटों के अंतर से सरकार बदल जाती हैं. ऐसे में सभी पार्टियां अपने बेस वोट बैंक को साधने पर खास फोकस तो रखती ही हैं, अन्य दलों के परंपरागत वोट में भी सेंध लगाने में कसर नहीं छोड़ती हैं. ताकि सत्ता के समीकरण सटीक बैठाए जा सकें.
मध्य प्रदेश: कांग्रेस का सिर्फ 0.49 प्रतिशत वोट घटा
मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं. बीजेपी ने इस बार चुनाव में 163 सीटों पर जीत हासिल की है. बीजेपी को इस बार 54 सीटों का फायदा हुआ है. कांग्रेस ने इस चुनाव में 66 सीटें जीतीं और 48 सीटों का नुकसान हुआ है. 2018 में बीजेपी को 109 सीटें मिली थीं. कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थीं. हालांकि, बीजेपी का वोट शेयर तब भी ज्यादा था. लेकिन सीटों के मामले में कांग्रेस को फायदा पहुंचा था. 2018 में बीजेपी को 41.02% और कांग्रेस को 40.89% प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार बीजेपी को 48.55% और कांग्रेस को 40.40% वोट शेयर मिला. 2018 के मुकाबले इस बार कांग्रेस का वोट प्रतिशत सिर्फ 0.49 प्रतिशत घटा है.
छत्तीसगढ़: एक प्रतिशत से कम वोट आने से सत्ता गंवाई...
2023 के चुनाव में बीजेपी ने 46.27 वोट हासिल किए हैं और 54 सीटें जीतीं हैं. कांग्रेस 35 सीट पर सिमट गई है. कांग्रेस का वोट शेयर 42.23% रहा है. यानी दोनों की हार-जीत में 4 प्रतिशत से भी कम का मार्जिन रहा है. लेकिन, 19 सीटों का अंतर आने से सत्ता के सारे समीकरण गड़बड़ा गए हैं. इस बार चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 14 प्रतिशत बढ़ा है. 2018 में बीजेपी को 32.97 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं, कांग्रेस ने सिर्फ एक प्रतिशत से भी कम वोट घटने पर सत्ता गंवाई है. कांग्रेस को पिछले चुनाव में 43.04 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार 42.23 प्रतिशत वोट मिले हैं. यह भी एक फैक्ट है कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी तीन बार 49-50 सीटें जीतकर सरकार में आती रही है. 2003 में बीजेपी ने 50, 2008 में 50 और 2013 में 49 सीटें जीतकर सत्ता पर काबिज रही है. छत्तीसगढ़ में कुल 90 सीटें हैं. बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 46 है.
राजस्थान: छठवीं बार रिवाज कायम
राजस्थान में 6 बार से रिवाज कायम है. 1993 के बाद से छठवीं बार राजस्थान में सत्ता पलटने का रिवाज को वोटर्स ने बरकरार रखा है. कुल 199 सीटों पर चुनाव हुए. सत्ता के लिए 101 सीटों का आंकड़ा जरूरी है. बीजेपी ने 115 सीटें जीतीं. कुल 42 सीटों का फायदा हुआ. कांग्रेस 69 सीटों पर सिमट गई. 30 सीटों का नुकसान पहुंचा. अन्य को 15 सीटें मिली हैं. 2018 में बीजेपी को 73 सीटें मिली थीं. कांग्रेस ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी. अन्य को 27 सीटों पर जीत मिली थी.
बीजेपी का जबरदस्त वोटिंग परसेंटेज बढ़ा
वोट शेयर की बात की जाए तो इस बार बीजेपी ने 41.69 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं. कांग्रेस को 39.53% वोट मिले हैं. 2018 में बीजेपी को 38.77% और कांग्रेस को 39.30% वोट मिले थे. यानी कांग्रेस ने इस बार 0.23 प्रतिशत ज्यादा वोट हासिल किए हैं. लेकिन, 30 सीटों का नुकसान हो गया है. वहीं, बीजेपी के वोटिंग परसेंटेज में जबरदस्त 2.92 फीसदी सुधार हुआ है और सीधे 42 सीटों का फायदा पहुंचा है. डेटा कहता है कि बीजेपी का वोटिंग परसेंटेज बढ़ने से कांग्रेस को नुकसान पहुंचा है. बीजेपी ने कांग्रेस समेत अन्य दलों के वोट बैंक में सेंध लगाई है. निर्दलीय से लेकर बागी और छोटे दल भी पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके.
तेलंगाना: कांग्रेस को 45 सीटों का फायदा
तेलंगाना की सत्ता से केसीआर बाहर हो गए हैं. वे 9 साल से सरकार चला रहे थे. कांग्रेस ने तेलंगाना में पहली बार सरकार बनाई है. 2014 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना को अलग राज्य बनाया था. तब से दो चुनाव हुए और दोनों में केसीआर की पार्टी बीआरएस (पहले TRS) ने जीत हासिल की. तेलंगाना में 119 सीटों पर चुनाव हुए. बहुमत के लिए 60 सीटों का आंकड़ा जरूरी था. इस चुनाव में कांग्रेस ने 64 सीटें जीतीं. कांग्रेस को 45 सीटों का फायदा हुआ. बीआरएस ने 39 सीटों पर जीत हासिल की. उसे 49 सीटों का नुकसान पहुंचा. भाजपा ने 8 सीटें जीतीं. बीजेपी को सात सीटों का फायदा पहुंचा.
कांग्रेस ने 10 प्रतिशत ज्यादा वोट हासिल किए
इससे पहले 2018 में भारत राष्ट्र समिति (पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति) ने 47.4 प्रतिशत वोट हासिल किए थे और 88 सीटें जीती थीं. कांग्रेस ने 29% वोट शेयर हासिल किए और 19 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही थी. इस बार चुनाव में पूरी तस्वीर बदल गई. कांग्रेस का 10 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर बढ़ा और 45 सीटों का फायदा पहुंचा. जबकि बीआरएस को 10 प्रतिशत वोटिंग परसेंटेज का नुकसान हुआ है और 49 सीटें गंवानी पड़ी है. 2018 में सिर्फ एक सीट जीतने वाली भाजपा ने अपने वोट शेयर को लगभग दोगुना कर लिया है. पिछले चुनाव में उसे करीब 7 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार करीब 14 प्रतिशत वोट मिले हैं. बीजेपी ने दो उपचुनाव भी जीते थे, जिससे उसके विधायकों की संख्या तीन हो गई थी.
मध्य प्रदेश में वोट स्विंग क्या रहा....
पार्टी | 2023 वोट प्रतिशत | 2018 वोट प्रतिशत |
बीजेपी | 48.55% | 41.02% |
कांग्रेस | 40.40% | 40.89% |
बसपा | 3.40% | 5.01 % |
सपा | 0.46% | 1.30% |
नोटा | 0.98% | 1.42% |
अन्य | 5.52% | 5.82% (निर्दलीय) |
छत्तीसगढ़ में वोट स्विंग क्या रहा....
पार्टी | 2023 वोट प्रतिशत | 2018 वोट प्रतिशत |
बीजेपी | 46.27% | 32.97% |
कांग्रेस | 42.23% | 43.04% |
बसपा | 2.05% | 3.87% |
जेसीसीजे | 1.23% | 7.61% |
GGP | --- | 1.73% |
आप | 0.93% | --- |
नोटा | 1.26% | 1.98% |
अन्य | 5.55% | 5.88% (निर्दलीय) |
राजस्थान में क्या रहा...
पार्टी | 2023 वोट प्रतिशत | 2018 वोट प्रतिशत |
बीजेपी | 41.69% | 38.77% |
कांग्रेस | 39.53% | 39.30% |
बसपा | 1.82% | 4.03% |
RLTP | 2.39% | 0.33% (RLD) |
अन्य | 11.90% | 9.47% (निर्दलीय) |
नोटा | 0.96% | 1.31% |
तेलंगाना में क्या रहा...
पार्टी | 2023 वोट प्रतिशत | 2018 वोट प्रतिशत |
कांग्रेस | 39.40% | 28.7% |
बीआरएस | 37.35% | 47.40% |
बीजेपी | 13.90% | 7.10% |
AIMIM | 2.22% | 2.70% |
TDP | --- | 3.50% |
बीएसपी | 1.37% | 2.1% |
नोटा | 0.73% | 1.1% |
अन्य | 3.84% | 3.30% (निर्दलीय) |