दंगों की आंच में सुलग रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रदेश बीजेपी प्रभारी अमित शाह के दौरे से सियासी बवाल मचा है. कार्यकर्ताओं की छोटी-छोटी बैठकों की रणनीति से धुव्रीकरण की धार जहां तेज हुई है वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल और बहुजन समाज पार्टी की बेचैनी बढ़ा दी है.
पहले चरण के प्रचार अभियान में बीजेपी ने दोहरी रणनीति अपना रखी है. नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह जैसे नेता बड़ी जनसभाएं कर रहे हैं तो प्रदेश प्रभारी अमित शाह कार्यकर्ताओं की छोटी-छोटी बैठकें कर सक्रियता बढ़ाने में जुटे हैं. टिकट बंटवारे से पनपी नाराजगी दूर करने के बहाने इन बैठकों में समीकरणों को भी साधा जा रहा है. एक दिन में चार से पांच तक बैठकें आयोजित की जा रही हैं. मीडिया को इन बैठकों से दूर रखा जा रहा है. हर मीटिंग में सौ से दो सौ लोगों को जुटाकर उन्हें वोटों के विभाजन का नुकसान समझाया जा रहा है. खास बात ये कि इन बैठकों में दलित और अतिपिछड़े वर्ग के लोग ज्यादा हैं.कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्या और नाराजगी भी दूर करने की कोशिश की जा रही हैं.
अमित शाह के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी कैप्टन अभिमन्यु और स्वतंत्रदेव सिंह भी शामिल हो रहे हैं. शाह की इन बैठकों का सिलसिला दो अप्रैल को सहारनपुर से शुरू हुआ. कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और मेरठ में कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग के बाद अब गौतमबुद्धनगर और बागपत में सोमवार को बैठक होगी. सूत्रों के मुताबिक जिन इलाकों और वर्गो के बीच पार्टी की पकड़ कमजोर है वहां शाह की बैठकें प्राथमिकता से करायी जा रही हैं.