पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक पारी समाप्त हो गई है? अमृतसर लोकसभा सीट से बीजेपी के स्टार प्रचारक रह चुके सिद्धू की जगह उनकी पार्टी ने वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को प्रत्याशी बनाया है.
पंजाब से बीजेपी के एकमात्र सांसद सिद्धू को बाहर का रास्ता इसलिए दिखाया गया क्योंकि उनका पार्टी की प्रदेश इकाई के नेताओं और साझीदार शिरोमणि अकाली दल के 'शिखर नेतृत्व' के साथ मनमुटाव चरम पर था. हालांकि, सिद्धू को मैदान से हटाने का बीजेपी ने कोई विश्वसनीय कारण नहीं दिया है.
सिद्धू इस सीट से 2004, 2007 (उपचुनाव) और 2009 में चुनाव जीत चुके हैं. भाजपा ने उन्हें पश्चिमी दिल्ली और कुरुक्षेत्र (हरियाणा) सीट की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने अमृतसर के अलावा और कहीं से भी चुनाव लड़ने से मना कर दिया.
क्रिकेट और राजनीति के मैदान में लीक से हटकर चलने वाले के रूप में पहचाने जाने वाले सिद्धू को संभवत: पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साथ अदावत मोल लेने की कीमत चुकानी पड़ी है. वे सुखबीर बादल के साले और पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के साथ खुंदक रख रहे थे.
सिद्धू ने खुलेआम पंजाब की अकाली-बीजेपी सरकार पर अमृतसर में विकास और इसके लिए धन मुहैया कराने में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया था. इसका नतीजा यह रहा कि वे राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए. राज्य सरकार में मंत्री अनिल जोशी सहित अमृतसर में पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धू को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने के खिलाफ हो गए और उन्होंने जेटली को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की. सिद्धू को समर्थन सिर्फ उनकी पत्नी और बादल सरकार में मुख्य संसदीय सचिव नवजोत कौर से मिला. नवजोत कौर बीजेपी की विधायक हैं. कई राज्यों में बीजेपी के स्टार प्रचारक रह चुके सिद्धू की राजनीतिक पारी थोड़े समय के लिए ही सही खत्म नजर आ रही है.