शिवगंगा से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि तमिलनाडु में दविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIDMK) फ्रंट की पार्टी हैं और इनके बीच ही मुकाबला होना है. इसमें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी-कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं है. तमिलनाडु का सियासी इतिहास भी यही है. यह राज्य डीएमके और अन्नाद्रमुक का सियासी मैदान रहा है. यहां किसी तीसरे को एंट्री नहीं मिली. लेकिन इस बार दक्षिण भारतीय राज्य की राजनीति में एक तीसरे दल मक्कल नीधि मय्यम (MNM) ने एंट्री मारी है जिसकी अगुवाई मशहूर अभिनेता कमल हासन कर रहे हैं.
कमल हासन जहां डीएमके और अन्नाद्रमुक को खारिज कर राज्य के लोगों के लिए तीसरा विकल्प पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं ये दोनों पार्टियां मान रही हैं कि कमल हासन तमिलनाडु में कोई कमाल नहीं कर पाएंगे. डीएमके ने तो कमल हासन को बीजेपी की बी टीम भी बता दिया.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2021 में दयानिधि मारन ने कहा कि कमल हासन को ऊपर से निर्देश मिलते हैं, उन्हें बीजेपी कंट्रोल कर रही है, वह बीजेपी के इशारे पर नाच रहे हैं. दयानिधि मारन ने रजनीकांत से जोड़ते हुए कमल हासन को बीजेपी का मोहरा ठहराने की कोशिश की. उनकी दलील थी कि कमल हासन, रजनीकांत की पार्टी में अपनी पार्टी का विलय करने को तैयार थे, और हम सभी जानते हैं कि रजनीकांत किनके साथ जाने को तैयार थे. असल में, रजनीकांत के बीजेपी के साथ आने की अटकलें लगती रही हैं लेकिन फिलहाल उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने से इनकार कर दिया है.
लेखक सरवनन भी इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते की कमल हासन तमिलनाडु की राजनीति में कोई कमाल करने जा रहे हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या कमल हासन चुनाव जीतेंगे. सरवनन ने कहा कि वह सिर्फ लहर बना रहे हैं. ईमानदारी से कहूं तो कमल हासन तमिलनाडु में अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगे क्योंकि कोई वैचारिक आधार नहीं है. आप सिर्फ राजनीति में आकर ये नहीं कह सकते कि कि आपके पास चार्म है और इसके लिए लोग आपको वोट दें. तमिलनाडु के लोग वोट नहीं देंगे.
सरवननन का मानना है कि तमिलनाडु में लोग कलाकारों को देवी-देवताओं के रूप में नहीं देखते हैं. उनका कहना था कि उन दिनों, सिनेमा एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. यहां तक कि द्रविड़ियन आंदोलन के दौरान, उनकी अपनी विचारधाराएं थीं. उन्होंने अपनी करिश्माई ताकत से लोगों को नहीं लुभाया. उनकी फिल्मों में एक अंतर्निहित सामाजिक न्याय था.
कमल हासन का दावा
इन बातों के बावजूद कमल हासन दावा करते हैं कि उनकी पार्टी तमिलनाडु चुनाव में सिर्फ हिस्सा लेने के लिए या किंगमेकर बनने के लिए नहीं बल्कि चुनाव जीतने के लिए उतरी है. उनका कहना है कि इस बार चुनाव में फर्क पड़ेगा. हम चुनाव जीतने के लिए लड़ रहे हैं. हासन ने कहा कि उनकी तीन साल पुरानी पार्टी का मुख्य उद्देश्य सत्ता में रहना नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करना है. कमल हासन ने कहा कि चुनाव में हम DMK को एक चुनौती के रूप में देख रहे हैं. AIADMK खुद से खुद को तबाह कर रही है. DMK और AIADMK दोनों तमिलनाडु के लिए बुरे हैं, हमें एक तीसरा विकल्प तलाशना होगा.
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को भरोसा है कि उनकी पार्टी बहुमत के साथ जीत रही है. उन्होंने पलानीस्वामी की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि वह बस महीने भर के मेहमान हैं. इस समय की राज्य सरकार केंद्र सराकर के दबाव में काम कर रही है. बीजेपी एआईडीएमके के जरिए राज्य में आना चाहती है. लेकिन ऐसा नहीं हो पाएगा.
पलानीस्वामी को लौटने का भरोसा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ईके. पलानीस्वामी डीएमके के आरोपों को खारिज करते हैं और राज्य में अपने कामों की बदौलत चुनाव जीतने का दावा किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में राज्य के स्कूल बढ़े हैं. मेडिकल कॉलेज बढ़े हैं. उनमें सुविधाएं बढ़ाई गई हैं. डीएमके ने जो भ्रष्टाचार के आरोप सरकार और पार्टी के ऊपर लगाए हैं, वो निराधार हैं. मैं चाहता हूं कि विपक्षी दल के नेता एमके स्टालिन के सामने आएं. मुझसे बहस करें.
इस बार बीजेपी के लिए मौका!
वहीं तुगलक मैगजीन के संपादक और दक्षिणपंथी विचारक एस. गुरुमूर्ति तमिलनाडु में इस बार बीजेपी के लिए मौका देख रहे हैं. उनका कहना है कि डीएमके और अन्नाद्रमुक का अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर करता है. एक खत्म हो तो दूसरी भी खत्म हो जाएगी. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में पहले राष्ट्रवादी वोट कांग्रेस को मिलता था, लेकिन बाद में यह एमजी रामचंद्रन के अन्नाद्रमुक के पास चला गया. अब तक यह वोट राष्ट्रवादी पार्टियों को शिफ्ट नहीं हुआ है. कांग्रेस फिर कभी अपनी जगह नहीं बना पाई. एंटी डीएमके जो भी माहौल रहा वह भी अन्नाद्रमुक के पास गया, कांग्रेस के पास नहीं. इसलिए बीजेपी के पास काफी मौका है. यहां राष्ट्रवादी वोट हासिल करना है तो डीएमके से लड़ना होगा. अब कांग्रेस यह नहीं कर सकती, लेकिन बीजेपी कर सकती है.
तमिल संस्कृति, बीजेपी का राष्ट्रवाद
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दो दिनों के दौरान डीएमके ने बीजेपी पर तमिलनाडु की संस्कृति पर हमला करने, हिंदी थोपने का आरोप लगाया जबकि अन्नाद्रमुक द्रविड़ियन संस्कृति का संरक्षक बताया. डीएमके सांसद ए राजा और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने हिंदी भाषा भोपने का आरोप लगाया तो बीजेपी ने डीएमके को एंटी ब्राह्मण करार दिया.