मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी DMK की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने पोस्टल बैलेट से वोटिंग कराने को रोकने की मांग की थी. पार्टी की दलील थी कि इससे वोटिंग की गोपनीयता का उल्लंघन होता है. दरअसल, कोविड महामारी के दौर में चुनाव आयोग ने 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए पोस्टल बैलेट से वोटिंग की सुविधा की थी. इससे बुजुर्ग और दिव्यांग पोस्टल बैलेट से ही वोट डाल सकते थे, उन्हें पोलिंग बूथ जाने की जरूरत नहीं पड़ती.
मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव बनर्जी की अगुवाई वाली बेंच ने चुनाव आयोग के इस कदम की तारीफ की. कोर्ट ने कहा कि वोट की गोपनीयता और वोटरों के अधिकार दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने वाले निकाय की कामयाबी का सबूत है. कोर्ट ने ये भी कहा कि उन्हें आयोग के इस फैसले में कहीं कोई अटपटा या कानून के विरुद्ध कदम नहीं लगा. ये तो लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने वाला कदम है.
रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 की धारा 60(C) के तहत चुनाव आयोग ने कोविड महामारी की वजह से गैरमौजूद रहने वाले 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग वोटर्स के लिए पोस्टल बैलेट से अपना वोट डालने की सुविधा दी थी.
तमिलनाडु में एक चरण में वोटिंग
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में 6 अप्रैल को वोटिंग होगी. 2016 में 134 सीटें जीतकर AIADMK ने सरकार बनाई थी. DMK को 97 सीटें मिली थीं.