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Exit Poll: तमिलनाडु में सरकार नहीं, अपना वजूद बचाना होगी AIDMK की चुनौती

इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक डीएमके गठबंधन को 175 से 195  सीटों के साथ 10 साल बाद सत्ता में वापसी हो रही हैं. वहीं, एआईएडीएमके गठबंधन 38 से 54 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. जयललिता की गैरमौजूदगी में  AIDMK की कमान संभाल रहे पलानीस्वामी के सामने अब अपनी सत्ता बचाने के ज्यादा पार्टी के सियासी वजूद को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई. 

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 पलानीस्वामी
पलानीस्वामी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तमिलनाडु में डीएमके की 10 साल बाद वापसी संभव
  • AIADMK-बीजेपी गठबंधन की करारी हार की संभावना
  • AIADMK के सामने पार्टी को टूट से बचाने की चुनौती

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एमके स्टालिन की अगुवाई वाली डीएमके गठबंधन क्लीन स्वीप करता नजर आ रहा जबकि AIDMK को करारी हार मिलने की संभावना दिख रही है. इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक डीएमके गठबंधन को 175 से 195  सीटों के साथ 10 साल बाद सत्ता में वापसी हो रही हैं. वहीं, एआईएडीएमके गठबंधन 38 से 54 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. जयललिता की गैरमौजूदगी में  AIDMK की कमान संभाल रहे पलानीस्वामी के सामने अब अपनी सत्ता बचाने के ज्यादा पार्टी के सियासी वजूद को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई. 

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तमिलनाडु के सियासी इतिहास में पहली बार करुणानिधी और जयललिता के बगैर विधानसभा चुनाव हुए हैं. पिछला चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीने बाद जयललिता बीमार पड़ीं और फिर अस्पताल में ही उनका निधन हो गया. दो साल बाद 2018 में एम करुणानिधि भी चल बसे. ऐसे में एक तरफ तो करुणानिधि के बेटे डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ई पलानीसामी के नेतृत्व में जयललिता की राजनीतिक विरासत के दावेदार के रूप में थे. 

विधानसभा चुनाव के जंग में बीजेपी और एआईडीएमके ने साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी. इसके बावजूद सभी एग्जिट पोल में एआईडीएमके के हाथों सिर्फ सत्ता ही जाती हुई नहीं दिख रही बल्कि पार्टी की करारी हार होने का अनुमान है. किसी भी सर्वे में एआईडीएमके को 80 से ज्यादा सीटें नहीं दी हैं जबकि औसतन 65 सीटों मिलने की ही संभावना है. वहीं, तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन लोकसभा की तरह ही विधानसभा चुनाव में भी काफी अंतर से लीड लेती दिख रही है.

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जयललिता की सियासी विरासत के झगड़े में उलझी एआईडीएमके के लिए विधानसभा चुनाव काफी अहम है. तमिलनाडु में एआईडीएमके के सामने अब सत्ता बचाने की नहीं बल्कि पार्टी वजूद को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. एआईडीएमके को जिस तरह से सीटें मिल रही है, उसके साथ पार्टी में टूट का खतरा बढ़ जाएगा. AIADMK में विरासत की जंग तो जयललिता के निधन के बाद ही शुरू हो गई थी, लेकिन सजा हो जाने के कारण शशिकला के मुख्यमंत्री बनने के सपने पर पानी फिर गया था और जेल से छूटने के बाद उन्होंने राजनीति को त्याग दिया है. 

पलानीसामी के विरोध में जयललिता के जेल जाने की स्थिति में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते रहने वाले ओ. पनीरसेल्वम भी खड़े हो गए थे, लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि पनीरसेल्वम खुद डिप्टी सीएम से संतोष कर लिये और ई. पलानीसामी मुख्यमंत्री पर स्थायी तौर पर बन गए. अंदरूनी लड़ाई का नतीजा ये हुआ कि शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन ने अपनी अलग AMMK पार्टी बना रखा थी. ऐसे में पार्टी की हार  AIADMK की एक और बिखराव हो सकता है. ऐसे में पलानीसामी के लिए पार्टी के सियासी वजूद को बचाए रखने की चुनौती है.

वहीं, तामिलनाडु में डीएमके को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरता हुआ बता रहे हैं. कांग्रेस से गठबंधन करने वाले स्टालिन ने अपने चेहरे पर चुनावी मैदान में उतरे थे और इसका फायदा गठबंधन को मिलता दिख रहा है. एमके स्टालिन को 46 फीसदी लोगों ने सीएम पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया है. ई पलानीस्वामी को 34, कमल हासन को 4 और टीटीवी दिनाकरन को 3 फीसदी लोगों ने सीएम पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया है.

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