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तेलंगाना का वो चुनावी गणित, जो नतीजों के बाद बदल सकता है सारे समीकरण!

तेलंगाना में आज 119 सीटों पर वोटिंग हो रही है. लेकिन बीजेपी विधायक के बयान से लगता है कि दोनों पार्टियों ने मिलाकर कांग्रेस को रोकने का प्लान बना लिया है. विधानसभा और कुछ महीने बाद लोकसभा चुनावों के नजरिये यह बयान काफी अहम माना जा रहा है. इससे पहले चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान भी चर्चा में रहा है.

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बीजेपी विधायक टी राजा सिंह के बयान के बाद नए राजनीतिक समीकरण के कयास लगाए जाने लगे हैं.
बीजेपी विधायक टी राजा सिंह के बयान के बाद नए राजनीतिक समीकरण के कयास लगाए जाने लगे हैं.

तेलंगाना में राज्य गठन के बाद तीसरी बार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. अब तक यहां 10 साल से के चंद्रशेखर की पार्टी बीआरएस (पहले टीआरएस) जादू देखने को मिल रहा है. इस बार चुनाव में बीआरएस-कांग्रेस और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. AIMIM भी 9 सीटों पर मैदान में है. इस बीच, वोटिंग से एक दिन पहले तेलंगाना में बीजेपी के विधायक टी राजा सिंह का बयान चर्चा में है. उन्होंने दावा किया है कि BRS हमारे संपर्क में है. राज्य में बीजेपी करीब 35-40 सीटें जीत सकती है. यानी सरकार बनाने में बीजेपी किंगमेकर बन सकती है और जरूरत पड़ने पर केसीआर को समर्थन कर सकती है. वहीं, राजा सिंह के बयान के बाद सियासी समीकरण भी देखे जाने लगे हैं.

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दरअसल, तेलंगाना में आज 119 सीटों पर वोटिंग हो रही है. लेकिन बीजेपी विधायक के बयान से लगता है कि दोनों पार्टियों ने मिलाकर कांग्रेस को रोकने का प्लान बना लिया है. विधानसभा और कुछ महीने बाद लोकसभा चुनावों के नजरिये यह बयान काफी अहम माना जा रहा है. इससे पहले चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान भी चर्चा में रहा है. पीएम ने दावा किया था कि केसीआर ने दोस्ती के लिए मुझसे संपर्क किया था.

पीएम का कहना था कि केसीआर को बीजेपी की बढ़ती हुई ताकत का एहसास बहुत पहले हो गया था. लंबे समय से वो इस कोशिश में थे कि किसी तरह बीजेपी से दोस्ती कर लें. जब वो एक बार दिल्ली आए थे तो मुझसे मिलकर भी यही रिक्वेस्ट की थी. लेकिन बीजेपी तेलंगाना के लोगों की इच्छा के खिलाफ कोई भी काम नहीं कर सकती. जब से बीजेपी ने केसीआर को मना किया है, तब से बीआरएस बौखलाई हुई है और मुझे गाली देने का कोई मौका नहीं छोड़ रही.

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'अगर बीजेपी 40 सीटें जीतती है तो...'

पीएम के इस बयान के बाद अब स्थानीय बीजेपी विधायक के दावे ने एक नए राजनीतिक समीकरण को जन्म दिया है. राजा सिंह ने कहा, तेलंगाना में अगर हम (बीजेपी) 40 सीटें जीत जाते हैं तो बीआरएस के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में सत्तारूढ़ पार्टी (भारत राष्ट्र समिति) ने हमसे (बीजेपी) संपर्क किया है. उनके तमाम नेता और विधायक हमारे संपर्क में हैं. हम भी BRS के विधायकों के संपर्क में हैं. इस बार चुनाव में केसीआर गजवेल और कामारेड्डी दो विधानसभा सीट से मैदान में हैं.  

'कांग्रेस को रोकने के लिए साथ आ सकती है BJP-BRS'

चूंकि इस चुनाव में बीआरएस और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है. एग्जिट पोल में भी दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस बहुमत हासिल कर सकती है और बीआरएस सत्ता से बाहर हो सकती है. ऐसे में सत्ता के समीकरण बदलने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. जानकार कहते हैं कि कांग्रेस को रोकने के लिए केसीआर हर मुमकिन दांव खेल सकते हैं. यही वजह है कि बीजेपी की तरफ से भी संकेत दिए जा रहे हैं कि बीआरएस संपर्क कर रही है. हालांकि, यह चुनावी नतीजे तय करेंगे कि दोनों पार्टियों (BJP-BRS) के बीच किसी तरह के नए समीकण बनते-बदलते हैं या नहीं? फिलहाल, यह संभव है कि जरूरत पड़ने पर बीआरएस का आलाकमान बीजेपी से संपर्क कर सकता है और कांग्रेस को रोकने के लिए दोनों मिलकर सरकार भी बना सकते हैं.

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क्या हैं सियासी समीकरण...

तेलंगाना में 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 6.98 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन चार महीने बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 19.65 प्रतिशत हो गया था. राज्य में सीटों की संख्या भी बढ़ गई थी. विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली थी. जबकि लोकसभा में चार सीटों पर चुनाव जीता था. साल 2018 में BRS को 88, कांग्रेस को 19, AIMIM को सात और TDP ने दो सीटें जीती थीं. वर्तमान में तेलंगाना में बीआरएस के 101, AIMIM के 7, कांग्रेस के 5, बीजेपी के 3, एक निर्दलीय और दो अन्य विधायक हैं.

2014 की बात करें तो विधानसभा चुनाव में बीआरएस 63 सीटों पर जीती थी. कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं. टीडीपी ने 15 सीटें जीती थीं. AIMIM को सात सीटों पर जीत मिली थी. बीजेपी पांच सीटें जीतने में कामयाब हुई थी. इसी तरह, 2014 के लोकसभा चुनाव में TRS ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस को दो, बीजेपी को एक सीट मिली थी.

जानकार कहते हैं कि यदि बीजेपी इस बार विधानसभा चुनाव में डबल डिजिट में सीटें जीत लेती है तो तो काफी हद तक यह तय कर सकती है कि सरकार कौन बनाएगा. बीजेपी को किंगमेकर की भूमिका में ले जाने के लिए पार्टी संगठन ने पूरा जोर लगा दिया है. यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां की हैं.

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कांग्रेस को रोकने की रणनीति क्या है? 

तेलंगाना राज्य का गठन 2 जून 2014 को तब हुआ था, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. तब से दो बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. लेकिन, कांग्रेस को जीत नहीं मिली है. केसीआर की पार्टी ने दोनों बार राज्य के चुनाव में जीत हासिल की है. इस बार भी केसीआर ने दावा किया है कि वो चुनावी जीत की हैट्रिक लगाएंगे. इसके लिए उन्होंने पूरा जोर लगा दिया है. वहीं, कांग्रेस ने भी जीत के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया है. तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके ने तेलंगाना में कांग्रेस के समर्थन का ऐलान किया है. कांग्रेस ने राज्य गठन से लेकर दलित कार्ड तक खेला है. आखिरी में सोनिया गांधी ने भी भावुक अपील की है. पार्टी ने तीनों सांसद को भी उम्मीदवार बनाया है. ए.रेवंत रेड्डी को कोडंडल से, कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी को नलगोंडा से और एन. उत्तम कुमार रेड्डी को हुजूरनगर से मैदान में उतारा है. कई राजनीतिक जानकार भी इस बार कांग्रेस का पलड़ा भारी बता रहे हैं. यही फैक्टर बीआरएस के लिए टेंशन बन गए हैं.

क्यों साथ आ सकते हैं बीआरएस और बीजेपी?

बीजेपी करीब 30 सीटों पर मुख्य मुकाबले में है. इनमें से आधी सीटों को बीजेपी ने ए कैटेगिरी में रखा है. यानी यहां बीजेपी चुनाव जीतने की स्थिति में है. इन सीटों पर बीआरएस या कांग्रेस लड़ाई में नहीं है और बीजेपी मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है. इन सीटों में मुधोल, निर्मल, कोरातला, निजामाबाद शहरी, हुजूराबाद, गोशामहल, करीमनगर का नाम शामिल है. अधिकतर सीटें उत्तरी तेलंगाना जिलों में हैं. बीजेपी का मानना ​​है कि इन सीटों पर जीत हासिल करने की अच्छी संभावना है. यदि और कुछ नहीं तो यह किसी भी पार्टी के जीतने-हारने की संभावना तो बना ही सकती हैं. बीजेपी ने राज्य में 15 सीटों को बी कैटेगिरी में रखा है. यहां त्रिकोणीय लड़ाई है. इन सीटों पर बीजेपी, बीआरएस और कांग्रेस को अच्छी टक्कर दे रही है. इस सूची में हैदराबाद की मुशीराबाद और कामारेड्डी जैसी सीटें शामिल हैं. जबकि 89 सीटों पर बीआरएस और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है.

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लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिल सकती है बड़ी बढ़त

राजनीतिक कहते हैं कि यदि बीजेपी राज्य विधानसभा चुनाव में किंगमेकर बन गई तो लोकसभा चुनाव में उसकी स्थिति बहुत बेहतर हो जाएगी. मशीनरी की मदद से राज्य में बेहतर तरीके से लोकसभा चुनाव लड़ पाएगी. इसके अलावा, बीआरएस के रूप में उसे एक ऐसा पार्टनर भी मिल जाएगा, जो पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मददगार बनेगा. इन राज्यों में बीजेपी की जितनी सीटें कम होंगी, उनकी भरपाई करने में भी मदद मिलेगी. यही वजह है कि बीजेपी ने इस चुनाव में  करीमनगर से सांसद बंदी संजय कुमार, बोथ से सांसद सोयाम बापू और कोरुतला से सांसद अरविंद धर्मपुरी को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी ने टी राजा सिंह को भी टिकट दिया है. पार्टी ने उन्हें अगस्त 2022 में सस्पेंड कर दिया था.

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