उत्तर प्रदेश की आगरा ग्रामीण विधानसभा (Agra Rural Assembly) अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीट है. ये आगरा जिले की नौ विधानसभा सीटों में से एक है. आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट के मतदाता संसदीय चुनाव में फतेहपुर सीकरी सीट का सांसद चुनने के लिए मतदान करते हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट को पहले दयालबाग विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था. नए परिसीमन में इस विधानसभा सीट का नाम बदलकर आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट रख दिया गया. आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट के सियासी अतीत की बात करें तो यहां कभी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम का सिक्का चलता था. इस सीट से विजय सिंह राणा चार बार विधायक चुने गए थे.
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आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट से 2012 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कालीचरण सुमन चुनाव जीतकर विधायक चुने गए थे. उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) की प्रत्याशी हेमलता दिवाकर को हराया था. इस चुनाव में बसपा के कालीचरण को 69969 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहीं सपा की प्रत्याशी हेमलता को 51123 वोट मिले थे. कांग्रेस के उपेंद्र सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रत्याशी ओम प्रकाश खटीक चौथे नंबर पर रहे थे.
2017 का जनादेश
आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सपा से आईं हेमलता दिवाकर को टिकट दिया. हेमलता दिवाकर 1 लाख 29 हजार 887 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहे बसपा के कालीचरण सुमन को 64591 वोट मिले थे. कांग्रेस के उपेंद्र सिंह 31312 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे. राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नारायण सिंह सुमन को 17446 वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो इस सीट की गिनती जाट बाहुल्य सीटों में होती है. इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक जाट वोटर हैं. जाट के बाद यहां जाटव वोटर अधिक तादाद में हैं. इस विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में ब्राह्मण वोटर भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. आगरा ग्रामीण सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या पिछले 20 साल में तेजी से बढ़ी है.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट से विधायक हेमलता दिवाकर का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का चातुर्दिक विकास हुआ है. हेमलता दिवाकर के समर्थक और बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता जहां विकास के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विरोधी दलों के नेता इन दावों को हवा-हवाई बता रहे हैं.