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अयोध्या की धरती से ही ओवैसी ने किया था यूपी की सियासत में डेब्यू, 'जय भीम-जय मीम' का चला था दांव

असदुद्दीन ओवैसी अयोध्या से मिशन-2022 का आगाज करने जा रहे हैं. ओवैसी मंगलवार को अयोध्या के मुस्लिम बहुल रुदौली विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित कर रहे हैं. ये क्षेत्र ओवैसी की पार्टी के लिए काफी खास है. AIMIM ने यूपी की राजनीति में अयोध्या जिले से ही अपना चुनावी डेब्यू किया था और 'जय भीम और जय मीम' समीकरण को जमीन पर उतारने की कोशिश की थी. 

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असदुद्दीन ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • असदुद्दीन ओवैसी मिशन-2022 का करेंगे आगाज
  • AIMIM ने यूपी में पहला चुनाव 2016 में लड़ा था
  • ओवैसी का दलित-मुस्लिम समीकरण का फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश की सियासत में किस्मत आजमाने उतरे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी अयोध्या से मिशन-2022 का आगाज करने जा रहे हैं. ओवैसी मंगलवार को अयोध्या के मुस्लिम बहुल रुदौली विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित कर रहे हैं. ये क्षेत्र ओवैसी की पार्टी के लिए काफी खास है. AIMIM ने यूपी की राजनीति में अयोध्या जिले से ही अपना चुनावी डेब्यू किया था और 'जय भीम और जय मीम' समीकरण को जमीन पर उतारने की कोशिश की थी. 

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एआईएमआईएम को यूपी में चुनावी धार देने के लिए असदुद्दीन ओवैसी अवध क्षेत्र का तीन दिवसीय दौरा आज अयोध्या से शुरू कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने मुस्लिम बहुल सीटों पर खास फोकस किया है. मंगलवार को अयोध्या के रुदौली में ओवैसी की जनसभा है, इसके बाद बुधवार और गुरुवार को वह सुल्तानपुर एवं बाराबंकी में जनसभा को संबोधित करेंगे. ओवैसी की नजर यूपी में मुस्लिम वोटों पर है. 

बीकापुर सीट पर लड़ी थी पहली चुनाव लड़ाई

बता दें कि असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी म‍जलिस-ए-इत्‍तेहादुल मुस्लिमीन ने यूपी की सियासत में अपनी जगह बनाने के लिए मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सक्रियता दिखाई थी, लेकिन चुनावी रण में पहली बार अपनी ताकत को नापने के लिए उसने अयोध्या जिले की बीकापुर विधानसभा सीट को चुना था, जो सपा की परंपरागत सीट मानी जाती थी. 

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बीकापुर से सपा के तत्कालीन विधायक मित्रसेन यादव के निधन के चलते फरवरी 2016 में उपचुनाव हुए थे. सपा ने मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन को टिकट दिया था तो असदुद्दीन ओवैसी ने दलित समुदाय से आने वाले प्रदीप कोरी पर दांव खेला था. प्रदीप कोरी उस समय 'कोरी समाज' के उत्‍तर प्रदेश अध्‍यक्ष भी थे. 

दलित युवा नेता पर खेला था दांव 

महाराष्ट्र में 2014 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित ओवैसी की पार्टी 2016 में पहली बार यूपी में उपचुनाव लड़ रही थी. ऐसे में दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन के जरिए सफलता हासिल करने के लिए ओवैसी ने AIMIM के टिकट पर उपचुनाव लड़ने के इच्छुक मुस्लिम उम्मीदवारों को नजरअंदाज करते हुए दलित युवा नेता प्रदीप कोरी को मैदान में उतारा था. 

उपचुनाव में प्रदीप कोरी को उम्‍मीदवार बना कर ओवैसी दरअसल 'जय भीम-जय मीम' यानि 'दलित-मुस्लिम एकता' की परख करना चाहते थे. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले यह ओवैसी का बड़ा दांव माना गया था. प्रदीप कोरी की जीत के लिए  हैदराबाद, मुंबई और लखनऊ से आई AIMIM की टीमों ने यहां कैंप किया था. 

नहीं चला था ओवैसी का दलित-मुस्लिम कार्ड

फरवरी 2016 को हुए उपचुनाव में बीकापुर विधानसभा सीट के कुल 3,64,820 वोटों में से 16,7999 वोट पड़े थे. सपा के उम्मीदवार आनंद सेन यादव को 68,896 वोट मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर आरएलडी के मुन्ना सिंह चौहान को 62,456 वोट मिले थे. इस तरह से सपा को 6,440 वोट से जीत मिली थी. 

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ओवैसी का दलित कार्ड भले ही बीकापुर में उपचुनाव में न चल सका, लेकिन बीजेपी उम्मीदवार के लगभग बराबर जबकि कांग्रेस और पीस पार्टी से कहीं ज्यादा वोट AIMIM उम्मीदवार प्रदीप कोरी को मिले थे. प्रदीप कोरी को महज 11,857 वोट ही मिल सके थे. वहीं, बीजेपी के रामकृष्ण तिवारी को 11,933 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस पार्टी के असद अहमद को सिर्फ 2,945 वोट मिले जबकि पीस पार्टी के आजमुद्दीन को 2,800 वोट मिले थे. 

मुस्लिम बाहुल्य सीट पर भी फीकी रखी थी AIMIM

हालांकि, बीकापुर विधानसभा सीट पर करीब 80 हजार से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं, जिसके चलते ओवैसी ने अपनी पार्टी का चुनावी डेब्यू यहां से किया था और दलित कार्ड खेला था. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बीकापुर में गैर-मुस्लिम उम्मीदवार को उतारने के चलते स्थानीय मुसलमान नाराज हो गए थे. मुसलमानों का मानना था कि समुदाय के हित की कीमत पर राजनीतिक लाभ को पूरा करना स्वीकार्य नहीं होगा. इस तरह से ओवैसी का बीकापुर में जय-भीम और जय मीम का नारा सियासी गुल नहीं खिला सका. 

ओवैसी ने अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. एक तरफ वो ओम प्रकाश राजभर और चंद्रशेखर के साथ मिलकर सियासी गठजोड़ बनाने में जुटे हैं तो दूसरी तरफ मुस्लिम मतों को भी साधने की कवायद में लग गए हैं. ओवैसी ने इस बार 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है. ये वो सीटें हैं, जहां पर मुस्लिम मतदाता चुनाव नतीजों को प्रभावित करते हैं. 

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