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UP Election: असदुद्दीन ओवैसी को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य का पत्र- जहां जीत पक्की बस वहां लड़ें चुनाव

UP Election 2022 के लिए असदुद्दीन ओवैसी (asaduddin owaisi) को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ने पत्र लिखा है. इसमें मुस्लिम वोटों के बंटवारे की शंका जताई गई है.

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असदुद्दीन ओवैसी को मौलाना सज्जाद नोमानी का पत्र
असदुद्दीन ओवैसी को मौलाना सज्जाद नोमानी का पत्र
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मौलाना नोमानी ने ओवैसी को गठबंधन की सलाह दी
  • यूपी में 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है ओवैसी की पार्टी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी (asaduddin owaisi) को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के एक सदस्य Maulana Nomani की तरफ से पत्र लिखा गया है. खलील-उर-रहमान सज्जाद नोमानी की तरफ से असदुद्दीन ओवैसी को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जिन सीटों पर जीत पक्की हो, बस उन सीटों पर ओवैसी को उम्मीदवार उतारने चाहिए.

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पत्र में AIMPLB के सदस्य सज्जाद नोमानी ने 11 जनवरी का भी जिक्र किया है. इस दिन यूपी के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य समेत अन्य OBC नेताओं ने बीजेपी छोड़ी थी. ओवैसी को गठबंधन के विकल्प तलाशने की सलाह दी गई है और लिखा है कि जो लोग 'निर्दयी' हैं, उनके खिलाफ वोटों का बंटवारा होने से रोकना चाहिए.

पत्र में मौलाना सज्जाद नोमानी ने यह भी शंका जताई है कि यूपी चुनाव में मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है. ऐसे में AIMIM को सलाह दी गई है कि जिन सीटों पर जीत 'पक्की' है, वहां से पूरी ताकत के साथ लड़ा जाए और वहीं उम्मीदवार उतारे जाएं.

यह भी पढ़ें - यूपीः मुरादाबाद से मुजफ्फरनगर तक...ओवैसी के भाषणों में छाए हुए हैं ‘दंगे’!

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अपने पत्र में मौलाना सज्जाद नोमानी ने दावा किया है कि ओवैसी को नेता के रूप में लोग पसंद करते हैं. बता दें कि ओवैसी की AIMIM यूपी में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है. यूपी में कुल 403 सीटें हैं. यहां सात चरणों में मतदान होना है. इन चरणों के तहत 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान होगा. नतीजे 10 मार्च को बाकी राज्य (पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा) के साथ आएंगे.

बता दें कि यूपी में 20 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं. करीब 125 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में है. सूबे में मुस्लिम सपा का परंपरागत वोटर माना जाता है, जिसे कांग्रेस भी साधने में जुटी है. वहीं ओवैसी भी सूबे में अपने सियासी आधार को मजबूत करने में कमी नहीं छोड़ रहे.

 

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