यूपी के अंबेडकरनगर जिले का जिला मुख्यालय है अकबरपुर. अकबरपुर विधानसभा सीट अंबेडकरनगर की सदर विधानसभा सीट है. अकबरपुर में शिव बाबा का धार्मिक स्थल है. शिक्षा की बात करें तो यहां राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ ही एग्रीकल्चर कॉलेज, चीनी मिल और एक हवाई पट्टी भी है. ये इलाका कृषि पर आधारित निर्भर है.
अकबरपुर में सड़क जाम की समस्या नासूर बन गई है. आवारा पशु भी किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर उभरे हैं. इस इलाके में औद्योगिक इकाइयों का अभाव है. विकास के दावों के बावजूद इलाके में कोई बड़ी परियोजना स्थापित नहीं हुई है जिससे रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें. महंगाई और बेरोजगारी इलाके में इस दफे बड़ा चुनावी मुद्दा बनते नजर आ रहे हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
अकबरपुर विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राम अचल राजभर का गढ़ रही है. इस सीट से पांच बार के विधायक राम अचल राजभर जब भी बसपा की सरकार बनी, मंत्री बने और महत्वपूर्ण विभाग भी संभाले. राम अचल राजभर इस सीट से पहली दफे 1993 में विधायक निर्वाचित हुए थे और इसके बाद वे 1996, 2002, 2007 और 2017 में भी विधायक निर्वाचित हुए.
अकबरपुर विधानसभा सीट के सियासी अतीत की बात करें तो साल 1977 में यहां से जेएनपी के हरि राम वर्मा, 1980 में कांग्रेस के प्रियदर्शी जेटली, 1985 और 1989 में माकपा के अकबर हुसैन बाबर, 1991 में शिव सेना के पवन कुमार पांडेय विधायक निर्वाचित हुए. 1993 में बसपा के राम अचल राजभर पहली दफे विधायकी जीते और इसके बाद वे इस सीट पर अजेय रहे हैं. बसपा के उम्मीदवार को 2012 के चुनाव में सपा प्रत्याशी से मात खानी पड़ी थी. हालांकि, तब राम अचल राजभर ने चुनाव नहीं लड़ा था.
2017 का जनादेश
अकबरपुर विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर राम अचल राजभर मैदान में थे. राम अचल राजभर के सामने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चंद्र प्रकाश वर्मा और समाजवादी पार्टी (सपा) ने राम मूर्ति वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा था. बसपा के राम अचल राजभर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के राम मूर्ति वर्मा को 14 हजार वोट से अधिक के अंतर से हरा दिया था. बीजेपी के चंद्र प्रकाश वर्मा तीसरे स्थान पर रहे थे. इस दफे बसपा ने राम अचल को निष्कासित कर दिया था जिसके बाद वे सपा में शामिल हो गए हैं.
सामाजिक ताना-बाना
अकबरपुर विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां एससी-एसटी मतदाताओं की बहुलता है. इस विधानसभा क्षेत्र में राजभर और कुर्मी बिरादरी के मतदाता भी बड़ी तादाद में हैं. निषाद, यादव, ब्राह्मण के साथ ही मुस्लिम मतदाता भी इस सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
अकबरपुर विधानसभा सीट से विधायक राम अचल राजभर का दावा है कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र का अनवरत विकास हुआ है. विधायक का दावा है कि इसी विकास का परिणाम है कि जनता ने एक या दो नहीं, पांच दफे अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें विधानसभा में भेजा. राम अचल राजभर की कभी अपनी पार्टी रही बसपा के लोग ही अब उनके दावों को खोखला बताने लगे हैं.
(रिपोर्ट- केके पांडेय)