उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने खोए हुए सियासी जनाधार को वापस लाने में जुटे हैं. पूर्वांचल के सियासी समीकरण दुरुस्त करने के बाद अखिलेश अब सपा के लिए सबसे कमजोर माने जाने वाले बुंदेलखंड को मजबूत करने उतरे हैं. तीन दिन अखिलेश बुंदलेखड में डेरा जमाकर तमाम जिलों में सपा के पक्ष में माहौल बनाने की कवायद करेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि सपा के लिए बंजर पड़ी बुंदेलखंड की सियासी जमीन को 2022 में उपजाऊ बना पाएंगे?
बुंदलेखंड दौरे पर पहुंचे अखिलेश
अखिलेश यादव अपने बुंदेलखंड दौरे के पहले दिन बांदा और महोबा में चुनावी हुंकार भरेंगे तो गुरुवार को ललितपुर और शुक्रवार को झांसी में विजय रथ पर सवार होकर अपने सियासी समीकरण को मजबूत करेंगे. हालांकि, अखिलेश यादव ने अपने रथ यात्रा की शुरूआत कानपुर-बुंदेलखंड इलाके से किया था. उन्होंने जालौन और हमीरपुर जिले में समाजवादी विजय रथ निकाला था.
बुंदेलखंड का इलाका सियासी तौर पर सपा के लिए काफी अहम है. 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी के विजय रथ पर सवार बीजेपी ने सपा, बसपा और कांग्रेस का इस इलाके में पूरी तरह से सफाया कर दिया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा मिलकर भी बुंदेलखंड में बीजेपी के विजय रथ को नहीं रोक सकी थी, जिसका नतीजा था इस इलाके की सभी लोकसभा सीटों पर बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रहीं.
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी क्लीन स्वीप कर इतिहास रचने की तैयारी में है. इतना ही नहीं बुंदेलखंड का इलाका बीजेपी से पहले बसपा और कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, यहां सपा बहुत बढ़िया प्रदर्शन कभी नहीं कर पाई है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी बुंदेलखंड का दौरा कर चुके हैं.
अखिलेश 19 सीटों को साधने में जुटे
वहीं, उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए अखिलेश यादव की बुंदेलखंड की 19 सीटों पर निगाह है, जिन पर जीत का परचम फहराने के लिए अखिलेश यादव पहुंचे हैं. वो चार जिलों बांदा, महोबा, ललितपुर और झांसी की रथ यात्रा के जरिए साधने की कवायद करेंगे.
बुंदेलखंड में हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट मिलाकर एक मंडल है झांसी, ललितपुर, जालौन मिलाकर दूसरा मंडल है. यहां कुल सात जिले और 19 विधानसभा सीटें हैं. इन सभी 19 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है. ऐसे में सपा को इस बार बुंदेलखंड के इलाके से बहुत ज्यादा उम्मीदें है.
बुंदेलखंड में बीजेपी को रोकना आसान नहीं
बुंदेलखंड का इलाका भले ही सूखे की किल्लत से जूझता रहा हो, पर राजनीति की फसल के लिए यहां की जमीन हमेशा से बहुत उर्वर रही है. बुंदेलखंड में कभी सूखा राजनीति का मुद्दा बन जाता है तो कभी पीने का पानी, वाटर ट्रेन और घास की रोटियां. यहां चुनाव जीतने के लिए भले ही जातीय समीकरण फिट किए जा रहे हों, लेकिन जनसभाओं में सभी नेता इन मुद्दों को हवा देते रहते हैं.
हालांकि, यूपी में योगी सरकार के आने के बाद बुदंलेखंड में विकास को रफ्तार मिली है. बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो रहा है. इसके अलावा बुंदेलखंड के विकास के लिए एक बोर्ड भी बनाया गया है. ऐसे में अखिलेश के लिए बुंदेलखंड की जमीन पर साईकिल को रफ्तार पकड़ना बीजेपी के सामने आसान नहीं होगा.