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UP Election: 'यादव बेल्ट' में उतरे अखिलेश, पिछले चुनाव में शिवपाल से दूरी पड़ी थी भारी

2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव के साथ सुलह-समझौता करने का बाद अखिलेश यादव अब अपने यादव बेल्ट यानि मैनपुरी, इटावा और एटा इलाके को साधने के लिए उतरेंगे, जहां 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी भगवा झंडा फहराने में कामयाब रही थी.

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शिवपाल यादव और अखिलेश यादव
शिवपाल यादव और अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच गठबंधन
  • मैनपुरी और एटा में अखिलेश यादव की दस्तक
  • यादव बेल्ट में बीजेपी के लिए बढ़ सकती चुनौती

सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के हाथ मिलाने का फॉर्मूला यूपी के पंचायत चुनाव में 'यादव बेल्ट' वाले इलाके में हिट रहा है. यही वजह है कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव के साथ सुलह-समझौता करने का बाद अखिलेश यादव अब अपने यादव बेल्ट यानि मैनपुरी, इटावा और एटा इलाके को साधने के लिए उतर रहे हैं, जहां 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी भगवा झंडा फहराने में कामयाब रही थी. 

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अखिलेश यादव मंगलवार को समाजवादी विजय रथ पर सवार होकर सपा गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी और एटा इलाके का दौरा करेंगे. इस पूरे इलाके को 'यादव बेल्ट' भी कहा जाता है, जो मुलायम सिंह यादव के दौर से सपा के साथ रहा है. मैनपुरी सीट से अभी भी मुलायम सिंह यादव सांसद हैं. मैनपुरी और एटा दोनों ही जिलों में यादव समाज के वोटर निर्णायक भूमिका है, जिन्हें साधने के लिए अखिलेश यादव उतर रहे हैं. 

क्या है इलाके का समीकरण

बता दें कि मैनपुरी और एटा जिले में चार-चार विधानसभा सीटें है. 2017 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी जिले में तो बीजेपी महज एक भोगांव सीट ही जीत सकी थी, लेकिन एटा की सभी चारों सीट पर वो जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी. एटा में सपा की हार में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच मनमुटाव एक अहम वजह बनी थी. 

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एटा जिले को शिवपाल यादव का गढ़ माना जाता है, जहां सपा समर्थक चाचा-भतीजे के बीच बंट गए थे. इसी का फायदा बीजेपी को मिला था. सपा के गढ़ में पहली बार भगवा रंग में रंगा नजर आया था. जिले की चारों सीटों पर 2012 में सपा के विधायक थे उन सभी सीटों पर एक साथ चार विधायक बीजेपी के पहली बार बने थे. 

सपा को उठाना पड़ा था नुकसान

अखिलेश और शिवपाल के बीच बिगड़े रिश्ते के चलते एटा ही नहीं बल्कि इटावा, कन्नौज, फिरोजाबाद, औरैया, फर्रुखाबाद, बदाऊं, संभल जैसे यादव बहुल जिले में भी सपा को खामियाजा उठाना पड़ा था. इतना ही नहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन के बाद भी सपा को यादव बेल्ट में मुलायम परिवार को हार का सामना करना पड़ा था. फिरोजबाद में सपा की हार का कारण शिवपाल बने थे. 

सपा 2022 में वाले वाले चुनाव में आपसी विवाद के चलते नुकसान का जोखिम नहीं लेगी, क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव पारिवारिक कलह से पार्टी को खासा नुकसान उठाना पड़ा था और सत्ता भी गंवानी पड़ी थी. उत्तर प्रदेश का यह पूरा इलाका मुलायम सिंह के परिवार के प्रभाव वाला माना जाता है. इस पूरे इलाके में लंबे अरसे से सपा का सियासी प्रभुत्व रहा है, लेकिन शिवपाल और अखिलेश के रिश्ते बिगड़ने से सपा का सियासी समीकरण बिगड़ गया था. 

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लेकिन, अब फिर से चाचा-भतीजे साथ आए और 2022 के चुनाव में मिलकर लड़ने का फैसला किया है. शिवपाल ने भले ही अपनी पार्टी का विलय नहीं किया है, लेकिन सपा के चुनाव निशान पर लड़ने की बात कह कर एक तरह से बड़ा सियासी संदेश दे दिया है. वहीं, लंबे समय के बाद पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव की फोटो को सपा नेताओं ने अपने होर्डिंग और पोस्टर लगाए हैं.

हालांकि, मुलायम परिवार के प्रभाव वाले इस पूरे इलाके में यादव वोटर के साथ-साथ शाक्य, मौर्य और लोध वोटर भी अहम है.  ऐसे में अखिलेश यादव ने महान दल के साथ गठबंधन कर रखा है, जिसका सियासी प्रभाव मैनपुरी, एटा, इटावा, कन्नौज, बदाऊं और फिरोजबाद के इलाके में शाक्य और मौर्य समाज के बीच है. महान दल के प्रमुख केशव देव मौर्य इस पूरे इलाके में यात्रा कर माहौल बनाने की कवायद कर चुके हैं. वहीं, अब अखिलेश यादव मैनपुरी जिले से अपनी यात्रा शुरू करेंगे और फिर एटा जिले में एंट्री करेंगे. 


 

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