Panchayat Aaj Tak Uttar Pradesh 2021 Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी, सपा समेत सभी दल तैयारियों में जुट गए हैं. प्रमुख दलों के नेता एक-दूसरे पर तीखे वार कर रहे हैं. ऐसे में आगामी चुनाव से पहले शुक्रवार को लखनऊ में 'पंचायत आजतक' का आयोजन हुआ. इस कार्यक्रम में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शामिल हुए. उन्होंने तंज कसते हुए बताया कि कई मामलों में आज के समय उत्तर प्रदेश 'नंबर वन' हो गया है.
उन्होंने दावा किया कि आज जनता समाजवादी सरकार में हुए कामों को याद कर रही है. आज की बीजेपी सरकार को बहुत समर्थन मिला था, लेकिन पिछले साढ़े चार सालों में क्या किया? अपना संकल्प पत्र कूड़े दान में फेंक दिया. लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सिर्फ विज्ञापन लगे हुए हैं. आज यूपी मिड-डे मील में बच्चों को खाने देने के बजाय नमक-रोटी देने में नंबर वन है. कुपोषित बच्चों की संख्या में यूपी नंबर वन है. टीबी जैसी बीमारी में उत्तर प्रदेश नंबर वन है. उन्होंने कहा कि जनता ने राज्य सरकार को इस लिए वोट नहीं दिया था कि इन सब चीजों को आप भूल जाएं.
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यूपी सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने आगे बताया कि उत्तर प्रदेश गरीब बच्चों में मिड-डे मील के बजट से बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाने में नंबर वन है. यूपी भूख से मरने वालों की संख्या में नंबर वन है. कोरोना बीमारी के दौरान दवाइयों की कालाबाजारी करने में यूपी नंबर वन है. नागरिकों को बिना इलाज दिए मरने देने में नंबर वन है. उत्तर प्रदेश गंगा नदी के किनारे में दफ्न की गई लाशों के ऊपर से कफन उतारने में नंबर वन है.
किसान की आय पर अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
सपा अध्यक्ष ने किसान मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि संकल्प पत्र में लिखा गया था कि किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी. मैं उनसे जानना चाहता हूं कि आज महंगाई बढ़ गई है. डीजल-पेट्रोल की कीमत बढ़ गई है. जीएसटी की वजह से तमाम चीजों की कीमत में इजाफा हुआ है. आज किसान की आय क्या है और अगर किसानों की आय दोगुनी करनी थी तो किस फसल से आय दोगुनी हुई?
'कोरोना में 90 से ज्यादा मजदूरों की गई जान'
कोरोना महामारी पर योगी सरकार पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पहली लहर के दौरान मजदूर चलते-चलते अपने घर पहुंचे. क्या सरकार मजदूरों को घर पहुंचाने का इंतजाम नहीं कर सकती थी? आखिरकार सरकार ने उनकी क्या मदद की? यूपी में पैदल चलते-चलते 90 से ज्यादा मजदूरों की जान चली गई. पहली लहर के दौरान आखिरकार सरकार ने क्या सबक सीख? इसके बाद जब दूसरी लहर आई तो बड़ी संख्या में लोगों की जान गई. जिन परिवार वालों ने अपने घर के सदस्य को खोया, उन्हें अभी तक इस बात का दुख है. सरकार क्यों बिस्तर, दवाइयां, ऑक्सीजन क्यों नहीं उपलब्ध करवा पाई. लोगों को खुद इंतजाम करने के लिए छोड़ दिया गया.