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चाचा-भतीजे में गिले-शिकवे दूर, शिवपाल के करीबियों को एडजस्ट करने की अखिलेश के सामने चुनौती

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की गुरुवार को मुलाकात में साढ़े चार साल के सारे गिले-शिकवे दूर हो गए हैं और साथ ही गठबंधन पर मुहर भी लग गई, लेकिन चाचा-भतीजे एक होने के बाद असल सवाल सीटों को लेकर उठ रहे हैं.

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शिवपाल यादव और अखिलेश यादव
शिवपाल यादव और अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवपाल-अखिलेश के बीच गठबंधन तय
  • शिवपाल को मिल सकती हैं 7 से 10 सीटें
  • शिवपाल के करीबियों के लिए मुश्किल होगी

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के आवास ए-1 विक्रमादित्य मार्ग से करीब 400 मीटर की दूरी पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का बंगला  6 लालबहादुर शास्त्री है. इस दूरी को तय करने में अखिलेश को साढ़े चार साल लग गए. हालांकि अब 2022 के चुनाव से ठीक पहले चाचा-भतीजे के बीच हुई मुलाकात में सारे गिले-शिकवे दूर हो गए और साथ ही गठबंधन पर मुहर भी लग गई. 

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अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की गुरुवार को 45 मिनट की मुलाकात हुई. चाचा-भतीजे के एक होने के बाद असल सवाल सीटों को लेकर उठ रहे हैं, क्योंकि दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद न तो सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने आया और न ही समझौते की शर्त. ऐसे में सवाल उठता है कि शिवपाल यादव के करीबी नेताओं को अखिलेश यादव कैसे 2022 के चुनाव में एडजस्ट करेंगे. 
 

अखिलेश-शिवपाल के बीच गठबंधन

अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव के साथ हुई मुलाकात की फोटो ट्वीट करते लिखा... 'प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात हुई और गठबंधन की बात तय हुई. क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति सपा को निरंतर मजबूत कर रही है और सपा व अन्य सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत की ओर ले जा रही है. अखिलेश के बाद शिवपाल यादव ने भी ट्वीट कर लिखा, 'समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आवास पर शिष्टाचार भेंट की. इस दौरान उनके साथ आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में साथ मिलकर लड़ने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई. 

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शिवपाल को मिल सकती है 7 से 10 सीट

अखिलेश ने भले ही चाचा के घर पहुंचकर गिले-शिकवे दूर कर दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन पर सहमति जता दी, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने नहीं आया है. शिवपाल यादव पिछले दिनों 100 सीटों की मांग उठा चुके है, जिस पर सपा सहमति नहीं थी. वहीं, सूत्रों की मानें तो अखिलेश ने चाचा शिवपाल से मुलाकात में उन्हें महज 7 से 10 सीटें देने की बात कही है. साथ ही अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव से कह दिया है कि सपा साढ़े तीन सौ सीट पर चुनाव लड़ेगी. ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत उन सीट पर है, जहां से शिवपाल के करीबी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. 

बता दें कि अखिलेश यादव से विवाद के बाद शिवपाल सिंह यादव ने जब अलग होकर पार्टी बनाई तो सपा के तमाम दिग्गज नेता उनके साथ हो गए थे. पूर्व विधायक राजेंद्र यादव, पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल, शादाब फातिमा, विधायक हरिओम यादव, रामसिंह यादव, रघुराज शाक्य, शहला ताहिर, वीरपाल सिंह यादव, कमाल यूसुफ, भगवती सिंह, अमित जानी, दीपक मिश्रा, मो. शाहिद, फरहत मियां और राजेश यादव जैसे कई नेता सपा छोड़कर शिवपाल के साथ हो गए थे. 

शिवपाल के करीबियों की बढ़ी चिंता

भगवती सिंह और मो शाहिद का पिछले साल निधन हो चुका है. इसके बावजूद अभी भी शिवपाल के साथ एक दर्जन करीब बड़े नेता हैं, जो चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने की पूरी तैयारी कर रखे हैं जबकि उन्हीं सीट पर सपा नेता भी ताल ठोक रहे हैं. लखनऊ के बख्शी का तालाब सीट से शिवपाल के करीबी भगवती सिंह के बेटे पूर्व विधायक राजेंद्र यादव चुनावी जंग में उतरने की तैयारी में है तो सपा से पूर्व विधायक गोमती यादव भी दावेदारी कर रहे हैं. 

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शादाब फातिमा-शारदा शुक्ल के लिए चिंता

लखनऊ की सरोजनी नगर सीट पर पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ल के चुनाव लड़ने की तैयारी में है तो सपा से पिछला चुनाव लड़ चुके अनुराग यादव फिर से किस्मत आजमाने के मूड में है. अनुराग यादव सपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव के छोटे भाई हैं. गाजीपुर जिले की जहूराबाद सीट पर शिवपाल की पार्टी से शादाब फातिमा चुनाव लड़ने की तैयारी में है जबकि इस सीट पर सपा की सहयोगी सुहेलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर मौजूदा विधायक हैं. ऐसे में यह सीट पर शादाब फातिमा के लिए देना आसान नहीं है. 

फिरोजाबाद की सिरसागंज से विधायक हरिओम यादव एक बार फिर से चुनावी ताल ठोक रहे हैं, जिनके रामगोपाल यादव के छत्तीस के आंकड़े हैं. बीजेपी तक उन्हें अपने साथ मिलाने की लिए मशक्कत रही है. बीजेपी के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने उनके घर जाकर मुलाकात की थी, लेकिन अब अखिलेश-शिवपाल में गठबंधन के बाद हरिओम यादव अपनी पुरानी पार्टी से चुनाव लड़ने का तैयारी में है, लेकिन अखिलेश क्या अपने चाचा रामगोपाल को नाराज कर उन्हें टिकट देंगे. 

वीरपाल-अमित जानी कैसे होंगे एडजस्ट

बरेली जिले में शिवपाल के करीबी शहला ताहिर नवाबगंज सीट से चुनाव लड़ने के मूड में तो पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव बिथरीचैनपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रखी है. वीरपाल के सामने सपा से आदेश सिंह यादव टिकट मांग रहे हैं, पर महान दल भी इस सीट पर अपनी दावेदारी कर रखी है. नवाबगंज सीट से सपा के भागवत सरण गंगवार टिकट के दावेदार है, जो अखिलेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. 

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मेरठ जिले में सिवालखास सीट से अमित जानी चुनाव लड़ने की तैयारी है, लेकिन इस सीट पर सपा के कई नेता दावेदारी कर रहे हैं तो आरएलडी का भी दावा है. ऐसे ही डुमरियागंज सीट पर पूर्व विधायक कमाल युसूफ अपने बेटे के चुनाव लड़ाने की तैयारी में है, लेकिन सपा से रामकुमार उर्फ चिंकू यादव और फरहान खान चुनाव लड़ने की तैयारी में है. ऐसे में अखिलेश के लिए शिवपाल के करीबी को एडजस्ट करना और उन्हें 2022 के चुनाव में उतारना आसान नहीं है. 


 

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