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17 लाख का पैकेज छोड़ चुनावी रण में उतरीं रूही, बदला बाराबंकी सीट का समीकरण!

Barabanki Seat: कांग्रेस ने बाराबंकी सीट से रूही अरशद को प्रत्याशी बनाया है. रूही मूलरूप से नैनीताल की रहने वाली हैं. रूही को 17 लाख रुपये सालाना की जेट एयरवेज से नौकरी का ऑफर भी मिला था, लेकिन उन्होंने पैकेज छोड़कर सियासत में कदम रखा है.

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चुनाव प्रचार करतीं रूही अरशद
चुनाव प्रचार करतीं रूही अरशद
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बाराबंकी सीट पर रोचक हुई लड़ाई
  • कांग्रेस ने रूही अरशद को दिया है टिकट

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देकर उत्तर प्रदेश की सियासत में नया प्रयोग किया है. ज़्यादातर पढ़ी-लिखी और तेज़ तर्रार महिलाओं को कांग्रेस ने इस बार मैदान में उतारा है. इसी कड़ी में बाराबंकी सदर सीट से एयरलाइंस की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर रूही अरशद चुनाव मैदान में हैं. 

रूही अरशद के चुनावी प्रचार के अनोखे तरीके से बाराबंकी सदर सीट का सियासती समीकरण बदल गया है. रुही सिर पर पल्लू डालकर, नर्म लहजे में अपने चुनावी प्रचार का आगाज सुबह 8 बजे से कर देती हैं. यहीं नहीं क्षेत्रीय भाषा के साथ हिंदी- इंग्लिश-उर्दू में लोगों से बात करती हैं. इसी अंदाज की वजह से क्षेत्र की जनता के बीच चर्चा में हैं. 

कौन हैं रूही अरशद?

कांग्रेस उम्मीदवार रूही अरशद मूलरूप से नैनीताल की रहने वाली हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई लखनऊ में हुई है. इंग्लिश लिटरेचर एंड इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएशन के साथ ही उन्होंने इंटरनेशनल एयरलाइंस एंड टूरिज्म में डिप्लोमा भी किया है. 17 लाख रुपये सालाना की जेट एयरवेज से नौकरी का ऑफर भी मिला. टीचिंग का शौक रखने वाली रूही के पति अरशद इकबाल बिजनेसमैन हैं. रूही घर संभालने के साथ-साथ पति के बिजनेस में भी हाथ बंटाती है.

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'लड़की हूं लड़ सकती हूं' का बाराबंकी में क्या है असर?

लखनऊ से सटे बाराबंकी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को रोड शो किया. सदर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रूही अरशद का कहना है, 'प्रियंका गांधी के नारे 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' को जन-जन पहुंचना है. मुझे घरेलू कामों के अलावा बिजनेस में भी अच्छी रुचि है, लेकिन अब सब छोड़ कर जनता सेवा का मन बना लिया है.'

रुही बोलीं- क्षेत्र का विकास ही मेरी प्राथमिकता 

आजतक डिजिटल से बात करते हुए रुही अरशद ने कहा, 'हम पूरी ताकत के साथ विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं और उम्मीद है कि अच्छे वोटों से जीतेंगे भी. इस क्षेत्र का ज़्यादा विकास नहीं हुआ है. जनता ने जिसे अपना प्रतिनिधि चुना उसने सिर्फ अपना विकास किया है. सदर क्षेत्र के गांव की सड़कें खराब है, रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं है.'

रुही अरशद ने कहा, 'मैं जीतने के बाद सबसे पहले अच्छी सड़के, शिक्षा और रोजगार के साधन उपलब्ध करवाऊंगी.' रूही के इस चुनावी सफर में साथ देने वाली उनकी समाजसेवी ननद फेमिना आरिफ भी हैं. रुही के पति अरशद इकबाल भी साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं. रुही ने बताया कि उनका खानदान कांग्रेस से जुड़ा हुआ है.

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क्या है बाराबंकी का सियासी समीकरण 

बाराबंकी सदर सीट की आबादी करीब 4 लाख है. इस विधानसभा में कभी कांग्रेस और अब सपा का दबदबा है. भाजपा का खाता इस सीट पर कभी नहीं खुला है. ये सीट मुस्लिम-दलित-यादव बाहुल्य है. वर्मा बिरादरी का वोट भी अच्छी संख्या में है, लेकिन कहा जाता है कि मुस्लिम-यादव जिधर चला जाता है, वही इस सीट से विधायक बन जाता है.

इस बार बाराबंकी का सियासी समीकरण बदला हुआ है. सपा ने धर्मराज उर्फ सुरेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है. बसपा ने डॉ विवेक वर्मा, भाजपा ने शिक्षिका डॉ राम कुमारी मौर्य और कांग्रेस ने रुही इकबाल को मैदान में उतारा है. यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि कांग्रेस इस बार सदर सीट पर मजबूती से चुनाव लड़ रही है.

 

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