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यूपी विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 55 विधानसभा सीटों पर 14 फरवरी को मतदान होना है. दूसरे चरण में जिन 55 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है, उन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का प्रदर्शन अस्थिर रहा है. इन सीटों के चुनावी अतीत की बात करें तो इन 55 में से 38 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को जीत मिली थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इन विधानसभा सीटों में से 27 सीटों पर बढ़त मिली थी.
यूपी विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की इन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की तादाद भी अच्छी खासी है. जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो नौ सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमानों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है. मुस्लिम बहुमत वाली कुछ सीटों में रामपुर, संभल, अमरोहा, चमरौआ और नगीना शामिल हैं. इसके अतिरिक्त 14 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी 40 से 50 फीसदी है. करीब दो दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं.
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) की स्टडी के मुताबिक 2017 में करीब 55 फीसदी मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पक्ष में मतदान किया था. सपा ने पिछली बार 26 फीसदी वोट शेयर के साथ 55 में से 15 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस इलाके में सपा का वोट शेयर सूबे के अन्य हिस्सों की तुलना में सबसे अधिक था. इस इलाके को सपा का गढ़ माना जाता है.
सपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था. सपा के गठबंधन सहयोगी ने तब आठ फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. उस समय सपा और कांग्रेस का संयुक्त वोट शेयर 34 फीसदी था जो इस क्षेत्र में बीजेपी को मिले 38 फीसदी वोट के करीब था. सपा 2022 का चुनाव राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के साथ मिलकर लड़ रही है. मुस्लिम के साथ ही यादव और अन्य ओबीसी मतदाताओं के वोट भी पारंपरिक रूप से सपा को वोट देते रहे हैं.
लोकसभा चुनाव में बसपा से गठबंधन कर उतरी थी सपा
सपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन किया था. इन 55 सीटों पर बसपा और सपा गठबंधन का संयुक्त वोट शेयर बीजेपी से अधिक था. सपा और सहयोगी गठबंधन ने 28 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई थी. ऐसा माना जाता है कि तब ओबीसी के अलावा दलित और मुसलमानों ने बड़ी तादाद में सपा-बसपा गठबंधन को वोट दिया था. जनगणना के आंकड़ों की मानें तो 31 सीटों पर दलितों और मुसलमानों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है. स्टडी के आंकड़े बताते हैं कि हाल के साल में दलितों ने बसपा के पक्ष में बड़ी तादाद में मतदान किया है.
हालांकि, 2014 के बाद से एक वर्ग का बीजेपी की ओर झुकाव होने के अनुमान भी जताए जाते हैं. सियासत के जानकारों की मानें तो इस दफे देखना होगा कि क्या इस बार मुस्लिम वोटर एकजुट होकर मतदान करेंगे. ऐसा होता है तो इसका बड़ा फायदा सपा-आरएलडी गठबंधन को मिल सकता है. बसपा और कांग्रेस का भी इस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है. सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि कांग्रेस और बसपा को भी मुस्लिम वोट अच्छी संख्या में मिल सकता है.
धनबल पर बढ़ी निर्भरता
इस दफे उम्मीदवारों की संपत्ति अधिक है. इन चुनावों में धनबल पर निर्भरता काफी बढ़ रही है. दूसरे चरण की सीटों पर जो उम्मीदवार मैदान में हैं, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के आंकड़ों के मुताबिक सपा उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 11.26 करोड़ और बीजेपी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 9.95 करोड़ रुपये की है. शैक्षिक योग्यता की बात करें तो कुल उम्मीदवारों में से तकरीबन 57 फीसदी उम्मीदवार सीनियर सेकण्ड्री या उससे कम शिक्षित हैं.
शाहजहांपुर और रामपुर हैं प्रमुख सीट
यूपी चुनाव के दूसरे चरण में शाहजहांपुर और रामपुर विधानसभा सीट पर सबकी नजरें हैं. शाहजहांपुर विधानसभा सीट से वरिष्ठ नेता सुरेश खन्ना नौवीं दफे विधानसभा पहुंचने की कोशिश में हैं. रामपुर विधानसभा सीट से रामपुर के सांसद आजम खान चुनाव मैदान में हैं.