उत्तर प्रदेश के चुनावी मौसम में बसपा विधायकों और नेताओं के पार्टी छोड़ने का सिलसिला लगातार जारी है. बसपा विधानमंडल दल के नेता शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने गुरुवार को मायावती को पत्र लिखकर पार्टी को अलविदा कह दिया है, जिसे पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
बसपा छोड़ने वाले गुड्डू जमाली पहले विधायक नहीं, बल्कि 75 फीसदी विधायक मायावती का साथ छोड़ चुके हैं. इस तरह से 2017 में बसपा के 19 विधायक जीतकर आए थे, जो अब महज चार बचे हैं. यूपी में अपना दल और कांग्रेस से भी कम विधायक बसपा के बचे हैं.
मायावती का गिरता सियासी ग्राफ
मायावती यूपी की सत्ता में चार बार विराजमान हुई और राष्ट्रीय पार्टी होने का खिताब भी अपने नाम किया, लेकिन 2012 के बाद से पार्टी का ग्राफ नीचे गिरना शुरू हुआ तो अभी तक थमा नहीं. ऐसे में मायावती अपने खिसकते सियासी जनाधार को रोकने के लिए 2017 से अभी तक चार प्रदेश अध्यक्ष बदल दिए, लेकिन न तो विधायकों की पार्टी छोड़ने का सिलसिला थमा और न ही 2022 के चुनाव में फ्रंटफुट पर पार्टी लड़ती दिखी.
बसपा छोड़ने का सिलसिला जारी
आजमगढ़ की सगड़ी से बसपा विधायक वंदना सिंह के पार्टी छोड़ने के अगले ही दिन बसपा विधानमंडल दल के नेता शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने पार्टी छोड़कर मायावती को तगड़ा झटका दिया है. आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट से विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को बसपा प्रमुख मायावती ने लालजी वर्मा के पार्टी छोड़ने के बाद विधानमंडल दल का नेता बनाया गया था.
माना जा रहा है कि जमाली सपा में जा सकते हैं. इस संबंध में जमाली की बात सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हो चुकी हैं और वह जल्द ही सपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे.
यूपी विधानसभा चुनाव का तापमान चढ़ने के साथ ही मायावती के सिपहसालार लगातार पार्टी छोड़ छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं. चुनाव से ठीक पहले पार्टी में भगदड़ की स्थिति है. सत्ता से बाहर होने के बाद बसपा छोड़ने वाले महारथियों का सैकड़ा पार हो चुका है. छह महीने में बसपा विधायक दल के दो नेता छोड़ चुके हैं, जिनमें लालजी वर्मा और गुड्डू जमाली हैं. अब जमाली की जगह मायावती उमाशंकर सिंह को विधानमंडल दल का नेता चुना है.
बसपा के पास चार विधायक बचे
बता दें कि साल 2017 के विधानसभा में बसपा यूपी में महज 19 सीटों पर सिमट गई थी, लेकिन लोकसभा के बाद उपचुनाव में एक सीट गंवाने के बाद पार्टी की सीटें 18 रह गईं थी. इसके बाद बसपा में एक-एक कर विधायकों का मोहभंग होना शुरू हुआ तो फिर 2022 का चुनाव आते-आते मायावती ने 19 में से 15 विधायकों को खो दिया है.
मायावती ने पहले अलग-अलग समय पर पार्टी विरोधी गतिविधियों की बात कहकर 9 विधायकों को निलंबित किया. उसके बाद लालजी वर्मा और राम अचल राजभर का निष्कासन हुआ और दोनों ही सपा में एंट्री कर कर गए.
कांग्रेस-अपना दल से नीचे आई बसपा
विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी भविष्य में चुनाव न लड़ाने का ऐलान कर चुकी है. सुखदेव राजभर का निधन हो चुका है जबकि रामवीर उपाध्याय बीजेपी के साथ खड़े हैं. ऐसे में फिलहाल श्याम सुंदर शर्मा, उमाशंकर सिंह, विनय शंकर तिवारी, आजाद अरिमर्दन बसपा के विधायक रह गए हैं.
वहीं, कांग्रेस के साथ विधायकों में एक पार्टी छोड़ दी और एक बागी है, जिसके बाद 5 विधायक बचे हैं. अपना दल के यूपी में 9 विधायक हैं. ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के चार विधायक हैं.
बसपा चार प्रदेश अध्यक्ष बना चुकी
बता दें कि मायावती ने यूपी में अपने सियासी जनाधार को वापस लाने के लिए 2017 के बाद में चार अध्यक्ष बदले, लेकिन कोई भी कामयाब नहीं रहा. पिछले साल नवंबर में बसपा ने भीम राजभर को अपनी उत्तर प्रदेश इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया था.
भीम राजभर चौथे बसपा के अध्यक्ष हैं. इससे पहले मुनकाद अली, आरएस कुशवाहा और राम अचल राजभर पार्टी अध्यक्ष थे, जिनमें मुनकाद अली को छोड़कर राजभर और कुशवाहा दोनों ही बसपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए हैं.