उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीति तेज़ हो गई है. बहुजन समाज पार्टी के कुछ विधायकों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं. अब बसपा प्रमुख मायावती ने इस मसले पर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है.
बसपा प्रमुख मायावती ने बुधवार सुबह ट्वीट कर लिखा कि घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं, ये एक घोर छलावा है.
मायावती ने कहा कि जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आराप में बीएसपी से निलम्बित किया जा चुका है.
2. जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आराप में बीएसपी से निलम्बित किया जा चुका है। 2/5
— Mayawati (@Mayawati) June 16, 2021
दलित विरोधी है सपा का चाल-चरित्र: मायावती
निलंबित विधायकों को लेकर मायावती ने आगे कहा कि सपा अगर इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती. क्योंकि इनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं. इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बन्द किया व खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय है.
बसपा प्रमुख ने कहा कि बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने आदि का मीडिया में प्रचारित करने के लिए किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज्यादा लगती है. यूपी में बीएसपी जन आकांक्षाओं की पार्टी बनकर उभरी है जो जारी रहेगा.
अखिलेश यादव से मिले थे विधायक
आपको बता दें कि हाल ही में बहुजन समाज पार्टी से निलंबित कुल नौ विधायकों ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही थीं कि विधानसभा चुनाव से पहले ये सभी समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. अब इसी पर मायावती का रिएक्शन आया है.
अगर विधानसभा चुनावों को लेकर बात करें तो बीते दिन अखिलेश यादव ने साफ किया है कि वह इस बार बहुजन समाज पार्टी या कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेंगे. बल्कि छोटे दलों के साथ चुनाव लड़ेंगे.