कभी गांधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी में पूरी तरह से बीजेपी का कब्जा है. लोकसभा सीट से लेकर विधानसभा की पांच में से चार सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं. अमेठी में अपने खोए हुए सियासी जनाधार को वापस पाने के लिए कांग्रेस बेताब है. ऐसे में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अमेठी में कैंप कर सियासी माहौल को बदलने की कवायद की है तो राहुल गांधी शुक्रवार को चुनावी प्रचार में उतरेंगे. राहुल-प्रियंका एक साथ रैली कर कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए उम्मीदों का दीया जलाने का प्रयास करेंगे.
अमेठी जिले की चार और एक रायबरेली जिले की सलोन सीट, जो अमेठी संसदीय क्षेत्र के तहत ही आती है. इन पांचों सीटों पर पांचवें चरण में 27 फरवरी यानि रविवार को वोटिंग होनी. ऐसे में प्रियंका गांधी अमेठी में कैंप करके चुनावी धार देने में जुटी हैं तो अब प्रचार के अंतिम दिन राहुल गांधी उतरेंगे. राहुल-प्रियंका शुक्रवार को एक साथ जगदीशपुर विधानसभा सीट पर चुनावी रैली को संबोधित करेंगे.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार यूपी चुनाव में अभी तक कोई भी रैली को संबोधित नहीं किया जबकि उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 30 रैलियों की हैं. उत्तर प्रदेश में राहुल ने न ही रोड-शो किया और न ही एक रैली को संबोधित किया है. ऐसे में राहुल गांधी की पहली रैली अमेठी में होने जा रही है, जहां से वो पहले सांसद हुआ करते थे. 2019 का चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी का यह दूसरा अमेठी दौरा है. इससे पहले वह ढाई साल के बाद दिसंबर 2021 में जगदीशपुर में ही कांग्रेस की प्रतिज्ञा रैली में शामिल हुए थे.
अमेठी संसदीय क्षेत्र के तहत अमेठी, गौरीगंज, तिलाई, जगदीशपुर और सलोन विधानसभा सीट आती है. 2017 के चुनाव में गौरीजंग सीट छोड़कर सभी चारों सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था. गौरीगंज सीट सपा को मिली थी जबकि कांग्रेस और बसपा का खाता नहीं खुल सका था. 2017 में अमेठी से राहुल गांधी सांसद थे और सपा के साथ गठबंधन भी कर रखा था, पर एक भी सीट पार्टी को नहीं मिली थी. गांधी परिवार का दुर्ग यहीं से दरकरना शुरू हुआ था और 2019 के चुनाव में राहुल को हार का मुंह देखना पड़ गया.
कांग्रेस अमेठी में अपने खोए हुए सियासी जनाधार को दोबारा से हासिल करने के लिए विधानसभा चुनाव में उतरी है. प्रियंका गांधी ने बुधवार को ताबड़तोड़ रोड शो और नुक्कड़ सभाएं कर अमेठी जिले में पार्टी प्रत्याशियों को उम्मीदों की आस जगाने का काम किया है. प्रियंका ने अमेठी, जगदीशपुर, गौरीगंज, जायस, नसीराबाद, सलोन में कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए चुनावी प्रचार किया.
2022 विधानसभा चुनाव में सपा, बीजेपी और बसपा की कड़ी चुनौतियों के बीच गांधी परिवार के गढ़ अमेठी में कांग्रेस को जीत दिलाना बड़ा चैलेंज है. अमेठी में बीजेपी के सामने अपनी सीटों को बचाए रखने की चुनौती है तो सपा गौरीगंज सीट पर कब्जा बनाए रखने के साथ-साथ बाकी सीटों पर जीत दर्ज करने की जद्दोजहद कर रही है. कांग्रेस ने अमेठी में सभी चारों सीटों पर नए प्रत्याशी उतारे हैं तो बीजेपी ने अमेठी सीट पर जीत को बरकरार रखने के लिए मौजूदा विधायक गरिमा सिंह की जगह उनके पति डॉ. संजय सिंह को उतारा है, जो साढ़े तीन दशक के बाद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.
गांधी परिवार के पुराने दुर्ग अमेठी की सभी सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है. अमेठी सीट पर बीजेपी से डॉ. संजय सिंह मैदान में है तो सपा ने गायत्री प्रजापति की पत्नी को महाराजी देवी को उतारा है. कांग्रेस से अशीष शुक्ला हैं तो बसपा से रागिनी तिवारी मैदान में हैं. तिलोई सीट पर बीजेपी ने मौजूदा विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह को उतार रखा है तो सपा से नईम गुर्जर हैं. कांग्रेस ने अपने जिला अध्यक्ष प्रदीप सिंघल पर दांव लगाया तो बसपा से रघुवंश प्रत्याशी हैं. ऐसे में तिलाई सीट पर कांग्रेस, बीजेपी और सपा के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.
गौरीगंज सीट पर सपा से सिटिंग विधायक राकेश प्रताप सिंह हैं तो बीजेपी से चंद्रप्रकाश मटियारी ताल ठोक रही है. कांग्रेस से फतेह बहादुर मैदान में हैं तो बसपा से ब्राह्मण नेता रामलखन शुक्ल हैं. इस सीट पर बीजेपी और सपा के बीच कांटे की जंग है. जगदीशपुर सुरक्षित सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा विधायक व मंत्री सुरेश पासी को उतारा है तो कांग्रेस से विजय पासी कड़ी टक्कर दे रहे हैं. बसपा से जितेंद्र कुमार पासी और सपा से विमलेश सरोज चुनाव लड़ी रही हैं. सलोन विधानसभा सीट पर बीजेपी से स्व. दलबहादुर कोरी के बेटे अशोक कोरी, सपा से डॉ. जगदीश प्रसाद, कांग्रेस से अर्जुन पासी और बसपा से इंजीनियर स्वाति सिंह पासी हैं.
बता दें कि अमेठी इंदिरा गांधी के समय से ही कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है. कांग्रेस भले ही सूबे की 400 सीटों पर चुनाव लड़ रही है लेकिन उसके लिए चुनौती तो रायबरेली और अमेठी जिलों की सीटें हैं. हालांकि पिछले चुनाव में गांधी परिवार के इस किले को बीजेपी भेद चुकी है. यही वजह है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में ये सीट काफी दिलचस्प बन गई है.
कांग्रेस पूरी कोशिश से अपने गढ़ अमेठी को बचाने में जुटी है. इस बार राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के बीच चुनावी जंग ने इसे और चर्चा में ला दिया था. स्मृति ईरानी जहां अमेठी में बीजेपी की जीत को बरकरार रखना चाहती हैं तो राहुल और प्रियंका गांधी दोबारा से अपने सियासी वर्चस्व को कायम करना चाहती है. इसी कड़ी में राहुल गांधी जगदीशपुर से यूपी चुनाव की हुंकार भरेंगे. ऐसे में देखना है कि राहुल-प्रियंका की कोशिश क्या सियासी रंग लाती है.