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फतेहपुर सदर विधानसभा सीटः गंगा-यमुना के दोआब में कभी था कांग्रेस का वर्चस्व, 2017 में खिला कमल

फतेहपुर सदर विधानसभा सीट पर साल 1989 तक कांग्रेस का एकछत्र राज था लेकिन इसके बाद 'हाथ' यहां जनता के साथ को तरस गया.

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यूपी Assembly Election 2022 फतेहपुर सदर विधानसभा सीट
यूपी Assembly Election 2022 फतेहपुर सदर विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साल 1993 में यहां पहली बार जीती थी बीजेपी
  • इस सीट पर 1989 तक कांग्रेस का रहा वर्चस्व

गंगा और यमुना नदी के दोआब में बसे फतेहपुर जिले की सदर विधाानसभा सीट पर कभी कांग्रेस का वर्चस्व था. साल 1989 तक इस सीट पर कांग्रेस का एकछत्र राज था लेकिन इसके बाद हाथ यहां जनता के साथ को तरस गया. गंगा नदी के तटीय इलाके में बसे सदर विधानसभा क्षेत्र में पहले से ही दो इंटर कॉलेज, दो डिग्री कॉलेज स्थापित किए गए थे. डिग्री कॉलेज में सीट की संख्या कम होने के कारण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए कानपुर का रुख करना पड़ता है. 

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स्वास्थ्य के लिहाज से यह क्षेत्र काफी पिछड़ा रहा है. किसी गंभीर बीमारी या किसी हादसे की स्थिति में अब भी मरीजों को उपचार के लिए कानपुर या लखनऊ जाना पड़ता है. यह क्षेत्र नेशनल हाईवे दो और हावड़ा-दिल्ली रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है. यहां बस और ट्रेन की अच्छी कनेक्टिविटी है. फतेहपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में हर जाति-वर्ग के लोग निवास करते हैं.

2017 का जनादेश

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से 14 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीधा मुकाबला था. बीजेपी के उम्मीदवार विक्रम सिंह 89481 वोट पाकर फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से विजयी हुए थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के चंद्र प्रकाश लोधी 57983 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे. बसपा के समीर त्रिवेदी को 35548 वोट मिले. वे तीसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे राजकुमार लोधी को मात्र 909 वोट मिले. साल 2017 के चुनाव में फतेहपुर सदर विधानसभा सीट पर कुल 3 लाख 26 हजार 564 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. इनमें तीन हजार से अधिक ऐसे मतदाता भी थे जिन्होंने पहली बार वोट डाला.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

साल 1989 के बाद दो बार इस सीट से जनता दल के उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे. साल 1993 में पहली बार इस सीट पर पहली बार कमल खिला और पार्टी के टिकट पर राधेश्याम गुप्ता जीतकर विधायक बने. राधेश्याम गुप्ता 1996 में भी जीते और प्रदेश सरकार में न्याय विभाग के मंत्री बनाए गए. 2002 में यह सीट बसपा के खाते में चली गई. 2007 में कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पौत्र विभाकर शास्त्री को फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार से उन्हें मात खानी पड़ी. साल 2012 में सपा ने जीत हासिल की लेकिन बीमारी के कारण विधायक के असमय निधन के बाद साल 2014 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने विजय पाई और 2017 में भी कब्जा बरकरार रखा.

सामजिक ताना-बाना 

फतेहपुर सदर विधानसभा सीट पर 2017 के चुनाव में 3 लाख 26 हजार 564 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा ओबीसी वर्ग के मतदाता जैसे कि लोधी, मौर्य हैं. मुस्लिम मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. क्षत्रिय, ब्राह्मण मतदाता भी फतेहपुर सदर सीट पर निर्णायक स्थिति में हैं.

विधायक की पृष्ठभूमि

फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से विधायक विक्रम सिंह का जन्म 20 मई 1967 को आगरा में हुआ था. उनके पिता आरके सेंगर एक डिफेंस ऑफिसर थे. विक्रम सिंह की शुरुआती पढ़ाई अम्बाला के केंद्रीय विद्यालय में हुई और पिता की सर्विस के दौरान उनके ट्रांसफर के साथ विक्रम सिंह के स्कूल भी बदलते रहे. इंटर तक की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से करने के बाद वे ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए प्रयागराज चले गए जहां उन्होंने इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला लिया और वहीं से छात्र राजनीति के जरिए सियासी सफर की शुरुआत की. विक्रम सिंह साल 1987 में अध्यक्ष चुने गए.

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फतेहपुर सदर के विधायक विक्रम सिंह (फाइल फोटो)
फतेहपुर सदर के विधायक विक्रम सिंह (फाइल फोटो)

छात्र राजनीत के दौरान ही उनका परिचय प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा से हुई. विक्रम सिंह ने उनके साथ काफी समय गुजारा फिर 1991 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ हो लिए. वीपी सिंह के साथ भी लंबा समय गुजारने के बाद विक्रम सिंह की मुलाकात बीजेपी के वरिष्ठ नेता चंद्रा स्वामी से हुई. विक्रम सिंह चंद्रा स्वामी के ट्रस्ट में मुख्य ट्रस्टी भी रहे. साल 2010 में विक्रम सिंह, नितिन गडकरी की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए और 2014 के उपचुनाव में पहली बार फतेहपुर सदर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

विक्रम सिंह साल 2017 में भी विधानसभा का चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने में सफल रहे. विक्रम सिंह की विधायक निधि से थरियांव सीएचसी में 70 लाख की लागत से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया जा रहा है. विक्रम सिंह ने दलित और पिछड़ी जातियों की कई बस्तियों में खड़ंजा और सीसी रोड का निर्माण कराया है. लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए जागरूक करने के लिए सदर विधायक ने 22 निगरानी समितियां गठित की हैं. इन समितियों में शामिल लोग गांव-गांव जाकर लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक कर रहे हैं.

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