
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) का गढ़ और गोरक्षनाथ मंदिर का प्रभाव होने की वजह से गोरखपुर सदर में विगत कई वर्षों से राम मंदिर आंदोलन से लेकर मोदी लहर तक गोरक्षनाथ मंदिर की अहम भूमिका रही है और लगातार बीजेपी के कब्जे में सीट रही है. राप्ती नदी के किनारे बसा हुआ गोरखपुर सदर विधानसभा (Gorakhpur Sadar Vidhansabha) क्षेत्र अब एक नए रूप में पहचाना जा रहा है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 270 किलोमीटर की दूरी पर गोरखपुर विधान सभा सदर की सीट स्थित है और आसपास के सभी शहर सभी मार्गों से जुड़े हैं. चाहे वह रेल लाइन हो या फोरलेन हो इसके अलावा सभी बड़े शहर के लिए हवाई उड़ान से भी जुड़ा हुआ है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गोरक्षनाथ मंदिर की वजह से गोरखपुर सदर की सीट अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और गोरखपुर की 9 विधानसभा सीटों में से गोरखपुर सदर विधानसभा की सीट में सबसे ज्यादा पोलिंग बूथ गोरखपुर सदर में है जिसकी संख्या 474 है.गोरखपुर सदर में राम मंदिर आंदोलन से लेकर आज तक लगातार गोरक्षनाथ मंदिर की भूमिका सभी चुनावों में बनी रही है. योगी आदित्यनाथ के गोरक्षनाथ मंदिर पीठाधीश्वर चुने जाने के बाद गोरखपुर सदर की सीट गोरखनाथ मंदिर से सीधे प्रभावित होने वाली सीट बन गई. मंदिर पीठाधीश्वर चुने जाने के पूर्व भी योगी आदित्यनाथ का प्रभाव गोरक्षनाथ मंदिर की वजह से गोरखपुर सदर के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी रहा है लेकिन गोरक्षनाथ मंदिर के प्रभाव के नाते गोरखपुर सदर पर पूरे उत्तर प्रदेश की निगाह लगी रहती है.
सामाजिक ताना-बाना
2011 के आंकड़ों के अनुसार यहां वोटरों की कुल संख्या 428086 है जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 199986 और महिला मतदाताओं की संख्या 157134 है. अगर उत्तर प्रदेश की आबादी की बात करें तो सूबे की शहरी आबादी 22.17 फीसदी यानी 4 करोड़ 45 लाख है जिनमें 2 करोड़ 34 लाख पुरुष और 2 करोड़ 10 लाख महिलाएं हैं. शहरी आबादी 2001 के मुकाबले 2011 में 22.27 फीसदी बढ़ी.
2017 का जनादेश
2017 के विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों के प्रत्याशी मैदान में थे. इसके बाद भी डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीते और समाजवादी पार्टी को करारी मात दी. 2012 में भी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने सपा प्रत्याशी राजकुमारी देवी को हराया था. इसके अलावा साल 2007 में भी उन्होंने सपा के भानु प्रकाश मिश्रा को मात दी थी.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल का जन्म गोरखपुर में हुआ और इनकी शिक्षा बीएचयू में हुई एमबीबीएस एमडी यह दोनों शिक्षा बीएचयू से ही पूरी की और उसके बाद 5 साल बीएचयू में प्रोफेसर भी रहे उसके बाद रिजाइन कर गोरखपुर आ गए पहली बार राजनीति में सन 2002 में आए और विधायक बन गए.
पहला चुनाव हिंदू महासभा से जीता था और बीजेपी के शिव प्रताप शुक्ला को हराकर राजनीतिक चर्चा में आए उसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए. प्रचंड बहुमत मिलने के बाद उनको पूरी उम्मीद थी कि उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें मंत्री पद जरूर मिलेगा लेकिन मंत्रियों की लिस्ट में अपना नाम ना देख कर उन्हें झटका लगा. अपनी टूटी हुई उम्मीद को सोशल मीडिया के माध्यम से जाहिर भी किया. आईपीएस चारू निगम की नोकझोंक के बाद सर्वाधिक चर्चा में आए और योगी सरकार में मंत्री पद ना मिलने की वजह से व्यथित डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल पूरी तरह से सदर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो गए.
विविध
डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल विधायक पेशे से बच्चों के डॉक्टर हैं. खाली समय में वह बच्चों का इलाज भी करते हैं. डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने बीएचयू से एमडी पीडियाट्रिक्स की डिग्री हासिल की. वह बच्चों के इलाज में अपना समय जरूर देते हैं. वह गरीबों की मदद भी करते हैं जिसकी वजह से सभी समुदायों में उनकी पैठ मजबूत है.