
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में 3 विधानसभा सीट आती हैं जिसमें ज्ञानपुर विधानसभा सीट (gyanpur assembly seat) अहम है. इस सीट की खासियत यह है कि यहां पर पिछले 20 सालों से (2002 से) बाहुबली विधायक का कब्जा है. भारतीय जनता पार्टी की कोशिश इस बार यहां से जीत हासिल करने पर होगी.
भदोही जिले के 3 विधानसभाओं में से एक और सबसे चर्चित विधानसभा ज्ञानपुर है. यहां पर बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का पिछले 20 वर्षों से लगातार बतौर विधायक कब्जा चल रहा है. इस विधानसभा की पूरी राजनीति विधायक विजय मिश्रा के इर्द-गिर्द घूमती है. पिछले तीन कार्यकाल में वह सपा से विधायक रहे और चौथी बार जब टिकट कट गया तो पार्टी से बगावत कर निषाद पार्टी से चुनाव लड़ कर भाजपा लहर में भी अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे.
ज्ञानपुर विधानसभा के एक इलाके से गंगा गुजरती हैं. यहां गंगा तट पर महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली भी है जहां सीता समाहित स्थल भी है. दूर-दूर से पर्यटक यहां माता सीता के दर्शन के लिए आते हैं. भदोही जिले का जिला मुख्यालय ज्ञानपुर में है. यह विधानसभा प्रयागराज की सीमा से सटा हुआ है. इस इलाके से नेशनल हाईवे 19 गुजरती है. जिसके कारण यहां आवागमन की एक बेहतर सुविधा उपलब्ध है.
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भदोही जिले के तीनों विधानसभाओं की तुलना में इस विधानसभा में कालीन उद्योग से जुड़ा ही कार्य कम होता है. ज्यादातर इलाका कृषि पर ही आधारित है. इस विधानसभा में भगवान भोलेनाथ के कई प्राचीन मंदिर भी हैं जिन्हें सेमराध नाथ, तिलेश्वर नाथ, और हरिहर नाथ के नाम से जाना जाता है. इस क्षेत्र की मिठाई गुझिया और लौंगलता यहां के मशहूर और स्वादिष्ट मिठाई मानी जाती है.
2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की लहर के बाद भी विजय मिश्रा निषाद पार्टी से चुनाव जीतने में कामयाब हो गए थे. बीजेपी यहां से चुनाव नहीं जीत पाई और उसका प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा. इस लिहाज से 2022 का चुनाव सभी दलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. सपा इसे अपना गढ़ मानती है तो बीजेपी अपने पिछले प्रदर्शन से उत्साहित होकर दोगुनी ताकत के साथ इस विधानसभा में चुनाव जीतने का प्रयास करेगी. अन्य दल भी इस सीट पर पूरी ताकत से जुटेंगे.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
ज्ञानपुर विधानसभा की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 1974 के बाद हुए चुनावों में यहां तीन बार कांग्रेस, एक बार बसपा, दो बार बीजेपी और तीन बार समाजवादी पार्टी की जीत हुई, हालांकि समाजवादी पार्टी से तीनों ही बार विजय मिश्रा विधायक चुने गए.
2017 के चुनाव में सपा से टिकट कटने के बाद भी निषाद पार्टी से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. बीते 20 वर्षों में यहां दूसरे दलों ने विजय मिश्रा को हराने के लिए काफी कोशिश की लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी.
समाजवादी पार्टी में मजबूत पैठ बनाने के बाद उन्होंने 2002 के विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट हासिल कर लिया और पहली बार विधायक बने और तब से लेकर अब तक काबिज हैं.
हालांकि इस चुनाव में खून खराबा भी हुआ. तत्कालीन विधायक और बीजेपी प्रत्याशी गोरखनाथ पाण्डेय के भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गयी जिसका आरोप विजय मिश्रा पर है. इसके बाद जिले में विजय मिश्रा की तूती बोलने लगी.
एक के बाद एक कुल तीन बार लगातार सपा से विधायक बने लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने विजय मिश्रा का टिकट काट दिया. टिकट कटने का कारण शिवपाल यादव से विजय मिश्रा की घनिष्ठता माना जाता है. इसके बाद विजय मिश्रा निषाद पार्टी से लड़कर बीस हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीतकर विधायक बने.
सामाजिक तानाबाना
ज्ञानपुर विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 377183 लाख है जिसमें 205834 लाख पुरुष और 171312 लाख महिला मतदाता हैं. इस विधानसभा के ब्राह्मण और बिंद-निषाद वर्ग के मतदाता अधिक हैं. इस वर्ग के अलावा, दलित, यादव, वैश्य और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी तादात में है.
इस विधानसभा में बिंद निषाद वर्ग के मतदाताओं को किंगमेकर के तौर पर देखा जाता है. इस पर मुहर तब लग गई जब विजय मिश्रा निषाद पार्टी से चुनाव जीतने में कामयाब हुए. माना गया कि निषाद पार्टी से चुनाव लड़ने के कारण इस वर्ग के लोगों ने उन्हें वोट दिया. हालांकि यह भी कहा जाता है कि जब विजय मिश्रा सपा से जीतते आ रहे थे तब भी उन्हें इस वर्ग का वोट मिलता रहा है.
2017 का जनादेश
2017 के विधानसभा चुनाव में विजय मिश्रा ने बीजेपी के मुकाबले 20 हजार के अंतर से चुनाव जीता था. जब उस चुनाव में बीजेपी की लहर थी. निषाद पार्टी से जीते विजय मिश्रा को 66418 हजार वोट मिले जबकि बीजेपी से चुनाव लड़े महेंद्र बिंद को 46218 हजार वोट मिले.
पिछले तीन चुनाव से जीत रही समाजवादी पार्टी इस चुनाव में चौथे स्थान पर रही. इस चुनाव में सपा ने विजय मिश्रा को टिकट काट कर रामरती बिंद को प्रत्याशी बनाया था. बसपा ने इस चुनाव में एक नया प्रयोग करते हुए यादव जाति से प्रत्याशी बनाया था लेकिन तीसरे स्थान पर रही. इस चुनाव में 208900 लाख मतदाताओं ने मतदान किया और कुल 17 प्रत्याशी मैदान में थे.
रिपोर्ट कार्ड
विजय मिश्रा का जन्म प्रयागराज जिले के सैदाबाद के खपटीहां गांव में 7 सितंबर 1957 को हुआ था. उनके पिता का नाम रामदेव मिश्रा है. विजय मिश्रा के क्षेत्र में तमाम विरोधी थे जिसके कारण उन्होंने पड़ोस के जनपद भदोही के डीघ ब्लाक की तरफ रूख किया और 1989 में पहली बार डीघ ब्लाक के प्रमुख बने.
बताया जाता है कि उस दौरान वो कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे. फिर समाजवादी पार्टी के साथ जुड़े और जिले में सपा का जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में काफी सहयोग किया. इसके बाद अगले जिला पंचायत चुनाव में खुद सपा से चुनाव लड़ कर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर ली.
सपा में दो दशक से अधिक समय तक रहे विजय मिश्रा अपने भतीजे मनीष मिश्रा को कई बार ब्लाक प्रमुख बनाया. अपनी पत्नी रामलली मिश्रा को जिला पंचायत अध्यक्ष और मिर्जापुर से एमएलसी बनाया. वर्तमान में रामलली मिर्जापुर की एमएलसी हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में अपनी बेटी सीमा मिश्रा को सपा से चुनाव लड़ाया लेकिन सफल नहीं हुए. इसके साथ ही अपने तमाम समर्थकों को उन्होने अलग-अलग पदों पर काबिज कराया. वर्तमान में विजय मिश्रा अपने ही रिश्तेदार की तरफ से मकान कब्जा करने के आरोपों में जेल में बंद हैं. जेल जाने के बाद दुष्कर्म सहित अन्य कई मामले भी दर्ज हो गए हैं. एक वर्ष पहले पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज 73 मुकदमों की सूची जारी की थी.
विधानसभा में कराए विकास कार्यों पर नजर डाले तो उनके समर्थक मानते हैं कि जब भी विधायक सरकार में रहे उन्होने विधानसभा के साथ पूरे जिले में विकास कार्य कराने का काम किया. निजी तौर पर भी वो गरीबों की मदद करते रहते हैं, वर्तमान में किचड़ मुक्त गांव, खपरैल मुक्त मकान के तहत उनके विधानसभा में कार्य कराए गए. अपनी निधि से उन्होंने सोलर लाइट आदि लगवाने का काम किया.
बीजेपी के लोग मानते हैं कि ज्ञानपुर विधानसभा में जो भी कार्य हुए वो सरकार की तरफ से कराए गए उसमें विधायक की कोई भूमिका नहीं है. अन्य विपक्षी दल भी ज्ञानपुर विधानसभा में विकास नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हैं. इस विधानसभा में रामपुर गंगा घाट पर पक्का पुल, काशी नरेश राजकीय महाविद्यालय को यूनिवर्सिटी, निर्माणाधीन जिला अस्पताल को पूर्ण कराकर उसके संचालन की मांग एक प्रमुख मुद्दा है.
(इनपुट- महेश जयसवाल)