उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 150 किलोमीटर की दूरी पर बड़ा सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है. हम बात कर रहे हैं कौशांबी के हाई प्रोफाइल सिराथू सीट की. वही सिराथू जहां से मैदान में खुद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हैं, जिन्हें टक्कर देने के लिए समाजवादी पार्टी ने पल्लवी पटेल को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है.
कौशांबी जिले की तीन सीटों में से सिराथू पर लड़ाई रोचक हो गई है, लेकिन बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि खुद केशव प्रसाद मौर्य का मैदान में होना है. सिराथू से बीजेपी प्रत्याशी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के सामने चुनाव लड़ रहीं सपा-अपना दल (कमेरावादी) गठबंधन की प्रत्याशी पल्लवी पटेल की राह कठिन है.
ऐन वक्त पर सिराथू में पल्लवी की एंट्री
दरअसल, सिराथू में केशव प्रसाद मौर्य को घेरने के लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दो हफ्ते पहले पल्लवी पटेल को प्रत्याशी बनाया. शुरुआती आनाकानी के बाद पल्लवी पटेल मैदान में उतर तो चुकी हैं, लेकिन उनकी जीत की डगर इतनी आसान नजर नहीं आती है. इसकी सबसे बड़ी वजह ऐन वक्त पर मैदान में उतरना है.
दो हफ्ते पहले ही मैदान में आईं पल्लवी पटेल के लिए भाजपा संगठन की मोर्चेबन्दी को तोड़ पाना आसान नहीं है. बीजेपी के बूथ से लेकर सेक्टर तक कार्यकर्ता सक्रिय हैं, जिनकी लगातार मॉनीटिरिंग एक बड़ी टीम कर रही है. इसके अलावा गरीबों का बांटे गए निःशुल्क राशन का प्रभाव गरीब मतदाताओं पर साफ नजर आ रहा है.
क्या है सिराथू का जातीय समीकरण
सिराथू विधानसभा सीट दलित बाहुल्य है. यहां करीब 1.20 लाख दलित वोटर हैं. इसके बाद करीब 55 हजार मुस्लिम वोटर हैं. करीब 35 हजार पटेल, 28 हजार मौर्य, 25 हजार ब्राह्मण, 25 हजार यादव, 12 हजार पाल, 7 हजार प्रजापती, 28 हजार वैश्य, 6 हजार ठाकुर वोटर हैं. दलितों में अधिक संख्या पासी वोटरों की है.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सिराथू से मुंसब अली को मैदान में उतारा है. उसकी नजर दलित और मुस्लिम वोटों का समीकरण बनाने की है. मुंसब से पहले बसपा ने संतोष त्रिपाठी को टिकट दिया था, लेकिन अब मुंसब अली के मैदान में आ जाने से सबसे अधिक नुकसान सपा की पल्लवी पटेल को हो रहा है. पल्लवी की कोशिश फिलहाल वोटों के बंटवारे को रोकने की है.
बिजली पासी के नाम पर ओवरब्रिज
जातीय समीकरण बीजेपी के पक्ष में नजर आ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह दलित वोटरों खासतौर पर पासियों में बीजेपी की मजबूत पकड़ है. सिराथू में ओवरब्रिज का नाम संत मलूकदास और बिजली पासी के नाम से रखा गया है. पहली बार पासी साम्राज्य के बड़े राजा रहे बिजली पासी के नाम से रखा गया है.
इसके अलावा बीजेपी की कोशिश पटेल, मौर्य, ब्राह्मण, पाल, प्रजापति, वैश्य और ठाकुर वोटरों का वह समीकरण बनाने की है, जो किसी भी राजनीतिक दल के लिए अभेद्य हो. हालांकि पल्लवी की भी कोशिश पटेल, यादव, मुस्लिम, पाल बिरादरी के वोटरों में सेंधमारी की है, लेकिन इसमें अभी भाजपा की पकड़ मजबूत है.
केशव मौर्य को योजनाओं को मिल रहा है फायदा?
सिराथू में एक तरफ जातीय समीकरण के जरिए बीजेपी की कोशिश समीकरण साधने की है तो दूसरी तरफ योजनाओं के जरिए लाभार्थी वर्ग को अपने पाले में लाने की है. उज्ज्वला योजना, पीएम आवास योजना, पीएम किसान सम्मान योजना और ई श्रम योजना के लाभार्थियों से बीजेपी कार्यकर्ता लगातार संपर्क कर रहे हैं और उनसे काम के बदले वोट मांग रहे हैं.
इसके अलावा पिछले कुछ सालों में सिराथू में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव हुए हैं. विधानसभा में बने तीन आरओबी और गंगा नदी पर बनाये गए पुल बनकर तैयार है. साथ ही मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू हो गया है. ये बड़ी योजनाएं केशव प्रसाद मौर्य के लिए चुनाव में मजबूत घेराबंदी का काम कर रही है.
पल्लवी पटेल बेरोजगारी के मुद्दे को हवा दे रही हैं. कौशांबी की बहु बताकर माहौल बना रही हैं. महिला होने के कारण महिलाओं के बीच भी पैठ बनाने की कोशिश कर रही हैं. इसके साथ ही वह बेरोजगारी, आवारा पशु जैसे मुद्दे को उठा रही हैं. हालांकि पल्लवी के सामने सबसे बड़ा चैलेंज सभी बूथों तक पहुंचना बन रहा है.
बहन को हराने के लिए मैदान में उतरीं अनुप्रिया
सिराथू में दो बहनों की जंग भी देखने को मिल रही है. अपना दल में जिन दो बहनों की वजह से खींचतान हुई, वह अब सिराथू में आमने-सामने हैं. पल्लवी पटेल को हराने के लिए अनुप्रिया पटेल भी मैदान में कूद पड़ी हैं. केशव प्रसाद मौर्य के नामांकन के दौरान अनुप्रिया पहुंचीं थी. साथ ही 21 फरवरी को भी अनुप्रिया सिराथू में रैली करेंगी.
केशव के पक्ष में नेताओं की फौज, पल्लवी अकेलीं
सिराथू की हाई प्रोफाइल सीट पर केशव प्रसाद मौर्य के पक्ष में बीजेपी नेताओं की बड़ी फौज मैदान में उतर चुकी है, जबकि पल्लवी पटेल के पक्ष में अभी कोई बड़ा नेता नहीं आया है. एक ओर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा खुद केशव मौर्य के नामांकन में मौजूद थे, दूसरी ओर हर दिन कोई न कोई बीजेपी का बड़ा नेता कैंपेन कर रहा है.
पल्लवी पटेल की मां कृष्णा पटेल खुद प्रतापगढ़ सदर सीट से चुनावी मैदान में हैं, इसलिए वह भी वहां व्यस्त हैं. इसके अलवा सपा की ओर से अभी किसी बड़े नेता का कार्यक्रम नहीं हुआ. हालांकि पल्लवी अभी चुनावी चौपाल लगाकर अपने पक्ष में माहौल करने की कोशिश कर रही हैं.