बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी ने समाजवादी पार्टी का दामन थामने के बाद आजतक से बातचीत में कहा कि बीजेपी में परिवारवाद का पैमाना छलावा है. मैं आज तक पता कर रहा हूं कि बीजेपी ने परिवारवाद का क्या मानक तय किया है? आखिर किस आधार पर राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को टिकट दे दिया जाता है. फागू चौहान के बेटे को टिकट मिल सकता है लेकिन रीता बहुगुणा जोशी के बेटे को नहीं मिल सकता. इनका परिवारवाद का मानक इन नेताओं पर क्यों नहीं लागू होता?
सपा में शामिल होने की बताई यह वजह
मयंक जोशी ने बीजेपी हमला करते हुए कहा,"मैंने 13 साल भाजपा में लगाएं हैं लेकिन पार्टी ने कुछ नहीं दिया. अच्छा हुआ पार्टी ने मुझे टिकट नहीं दिया. अब मैं संतुष्ट हूं और मुझे लगता है कि समाजवादी पार्टी में युवाओं का भविष्य है और वह पार्टी सबसे प्रोग्रेसिव पार्टी है इसलिए मैं समाजवादी पार्टी में आकर खुश हूं."
'मां संन्यास लेकर किताबें-संस्मरण लिखेंगी'
अपनी सांसद मां की चर्चा करते हुए मयंक जोशी ने कहा कि उनकी मां ने लगभग अब राजनीति से संन्यास ले ही लिया है क्योंकि 73 साल की हो चुकी हैं. वह कह भी चुकी हैं कि अगला चुनाव नहीं लड़ेंगी. किताबें लिखेंगी, संस्मरण लिखेंगी. वह अभी बीजेपी में हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा होता है कि एक ही परिवार के कुछ लोग एक पार्टी में हों और उसी परिवार के कुछ लोग दूसरी पार्टी में.
अखिलेश से मिले, फिर 12वें दिन सपाई बन गए
22 फरवरी को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा के बेटे मयंक जोशी की मुलाकात हुई थी. अखिलेश ने इसे शिष्टाचार भेंट बताते हुए सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर में शेयर की. उसके बाद से ही मयंक जोशी का सपा में जाना तय हो गया था, बस औपचारिक ऐलान होना भर बाकी था. फिर 5 मार्च को मयंक जोशी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की आजमगढ़ के गोपालपुर विधानसभा की जनसभा में सपा की सदस्यता ले ली है.
2017 से क्षेत्र में थे सक्रिय, लेकिन कट गया टिकट
2019 में जब रीता बहुगुणा जोशी प्रयागराज से सांसद बनीं तभी उन्होंने आगे चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था. रीता जोशी के इस बयान से ही माना जाने लगा कि बहुगुणा परिवार से यूपी में राजनीति का अगला चेहरा मयंक जोशी होंगे. इसके बाद चर्चा होने लगी कि मयंक 2022 के चुनाव में लखनऊ की कैंट सीट से चुनाव लड़ेंगे. लेकिन जब टिकट बंटना शुरू हुआ तभी मुलायम परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने बीजेपी ज्वाइन कर ली और अपर्णा के कैंट सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा होने लगी. लेकिन पार्टी ने कानून मंत्री बृजेश पाठक को कैंट सीट से उम्मीदवार बना दिया. कैंट सीट से जब 2017 के चुनाव में रीता बहुगुणा जोशी विधायक बनीं तभी से मयंक जोशी सक्रिय थे.