उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एक विधानसभा सीट है मेजा विधानसभा सीट. प्रयागराज की इस सीट को कुंवर रेवती रमण सिंह का गढ़ माना जाता था. इस इलाके में कुंवर रेवती रमण का सिक्का चलता था. परिसीमन के बाद जब सीट का पुनर्गठन हुआ, इस सीट से कुंवर रेवती रमण का प्रभाव लगभग खत्म सा हो गया.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
मेजा विधानसभा सीट पहले करछना विधानसभा क्षेत्र में ही शामिल थी. करछना से अलग होने के बाद मेजा विधानसभा क्षेत्र ब्राम्हण बाहुल्य इलाके में तब्दील हो गया जिसके बाद कुंवर रेवती रमण की पकड़ कमजोर पड़ गई. नए परिसीमन के बाद मेजा विधानसभा सीट के लिए हुए पहले चुनाव में सपा के गिरीश चंद उर्फ गामा पांडेय इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए.
2017 का जनादेश
मेजा विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हत्या के मामले में निरुद्ध पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया को टिकट दिया. बीजेपी के टिकट पर उतरी नीलम करवरिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के राम सेवक पटेल को करीब 20 हजार वोट के अंतर से हरा दिया था. बसपा के एसके मिश्रा तीसरे और निर्बल इंडिया शोषित दल के सर्वेश चंद्र चौथे स्थान पर रहे थे.
सामाजिक ताना-बाना
मेजा विधानसभा सीट ब्राह्मण बाहुल्य सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद सबसे अधिक बताई जाती है. अनुमानों के मुताबिक प्रयागराज के मेजा विधानसभा क्षेत्र में यादव, मुस्लिम, दलित मतदाता भी चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यहां का वोटिंग पैटर्न जाति पर आधारित रहा है.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
मेजा विधानसभा सीट से विधायक 48 साल की नीलम करवरिया 1996 में हुई सपा विधायक जवाहर पंडित की हत्या के मामले में जेल में बंद उदयभान करवरिया की पत्नी हैं. करवारिया बंधु सपा विधायक जवाहर पंडित की हत्या के आरोप में जेल चले गए तो सियासत पर परिवार की पकड़ बनाए रखने के लिए करवरिया खानदान की पुत्रवधु नीलम सियासत में आ गईं. एमए तक शिक्षा प्राप्त करने वाली नीलम करवरिया मेजा विधानसभा सीट से पहली महिला विधायक भी हैं.
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मेजा विधायक नीलम के पति उदयभान करवरिया दो दफे बारा सीट से विधायक रहे जबकि उनके बड़े भाई कपिल मुनि करवरिया फूलपुर से सांसद रहे. उदयभान के छोटे भाई सूरजभान करवरिया इलाहाबाद-कौशांबी परिक्षेत्र से एमएलसी रहे हैं. नीलम करवरिया ने अपनी विधायक निधि से शत-प्रतिशत धनराशि खर्च कर दिया है. इनकी छवि आम जनता के साथ जुड़े रहने वाले नेता की है.