
मिर्ज़ापुर जनपद की सबसे प्रतिष्ठित विधानसभा सीट माने जाने वाली नगर विधान सभा सीट हमेशा से ही राजनीतिक दलों के लिए चुनौती पूर्ण रही है. यह विधानसभा क्षेत्र मिर्ज़ापुर शहर और ग्रामीण इलाकों को मिला कर बना हुआ है. शहर के अलावा कोन ब्लॉक और छानबे ब्लॉक के आधे हिस्से को मिला कर इस विधान सभा को बनाया गया है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस नगर विधान सभा सीट पर शुरू से ही जन संघ व बीजेपी का दबदबा रहा है. बसपा को इस सीट पर कभी जीत नहीं मिली है. जन संघ से इस सीट पर पहली बार 1962 में भगवान दास विधायक चुने गये. इसके बाद जन संघ से विजय बहादुर सिंह और आशाराम यादव जीत हासिल कर क्रमश: विधायक बने. इस सीट से 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर वर्तमान में बीजेपी के दिग्गज नेता व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहली बार 26 साल की उम्र में चुनाव जीत कर विधायक बने. कहा जाता है कि राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बनने के बाद उप चुनाव इस सीट से ही लड़ना चाहते थे. मगर तत्कालीन बीजेपी विधायक सुरजीत सिंह डंक व राजनीतिक परिस्थियों के कारण वह यहां से चुनाव नहीं लड़ सके. जिसके बाद उन्हें हैदरगढ़ से चुनाव लड़ना पड़ा था.
मगर इसके बाद 1980 में उन्हें कांग्रेस के अजहर इमाम से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद वह इस सीट से चुनाव लड़े मगर जीत नहीं पाए. 1989 में बीजेपी से सुरजीत सिंह डंग ने चुनाव जीता. इसके बाद 1991,1993,1996 में उन्होंने चुनाव जीत कर लगातार चार बार विधायक की कुर्सी अपने पास रखी. 2002 के विधान सभा चुनाव में इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा हो गया. समाजवादी पार्टी के कैलाश चौरसिया लगातार तीन बार इस सीट से विधायक रहे. 2017 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी के रत्नाकर मिश्रा ने सपा के लागातर तीन बार से विधायक कैलाश चौरसिया को हराकर चुनाव में जीत हासिल की.
सामाजिक ताना-बाना
मिर्ज़ापुर नगर विधानसभा सीट शहर और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर बनाई गई है. शहर में वैश्य मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है. लगभग 60 हजार के करीब वैश्य मतदाता इस सीट पर किसी भी पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. वहीं मुस्लिम लगभग 40 हजार हैं, ब्राह्मण लगभग 30 हजार, दलित लगभग 25 हजार, क्षत्रिय लगभग 22 हजार,यादव लगभग 20 हजार के करीब हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 35 हजार 790 है. जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 88 हजार 628 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 46 हजार 397 है.
नगर विधान सभा में शहर के इलाकों में सड़क इस समय बड़ी समस्या में है. शहर में प्रवेश के लिए मुख्य मार्ग इमामबाड़ा से होकर मिर्ज़ापुर मार्ग अमृत योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के कारण खराब हो चुका है. वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग मिर्ज़ापुर-प्रयागराज से शहर को जोड़ने वाले सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. नगर विधान सभा कभी व्यापार का प्रमुख स्थान हुआ करता था. नगर में सैकड़ों पीतल बर्तन बनाने के छोटे-छोटे कारखाने लगे थे, जिसमें हजारों मजदूर काम करते थे. मगर सरकारी मदद के अभाव में यह पूरी तरह से बंद होने के कगार पर हैं. कालीन उद्योग से जुड़ा व्यवसाय इस नगर विधान सभा में बड़ी संख्या में होता था, मगर मिर्ज़ापुर से भदोही के अलग होने के बाद इस व्यवसाय पर असर पड़ा और यह धीरे-धीरे बंद होने के कगार पर पहुंच गया है. आने वाले विधान सभा चुनाव में जर्जर सड़क सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है.
2017 का जनादेश
2017 विधान सभा चुनाव में नगर विधानसभा सीट पर बीजेपी,सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला था. सपा ने लगातार तीन बार इस सीट से विधायक रहे कैलाश चौरसिया को अपना प्रत्याशी बनाया. वहीं, बीजेपी ने रत्नाकर मिश्रा को टिकट दे कर चुनाव मैदान में उतारा था. चुनाव में जीत बीजेपी प्रत्याशी रत्नाकर मिश्रा की हुई. उन्हें 1 लाख 9 हजार 196 मत मिले तो वहीं दूसरे स्थान पर कैलाश चौरसिया रहे, उन्हें 57 हजार 784 मत मिले. रत्नाकर मिश्रा 57 हजार 412 मतों से जीत हासिल कर विधायक बने.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
नगर विधान सभा सीट से वर्तमान विधायक रत्नाकर मिश्रा विंध्याचल में स्थित प्रसिद्ध माँ विंध्यवानसी मंदिर के पुरोहित हैं. पुरोहित के साथ-साथ वह राजनीति में भी सक्रिय हैं. मंदिर में बीजेपी के बड़े नेताओं को दर्शन-पूजन यही कराते हैं. विंध्याचल में पिता अलबेले मिश्रा संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे. जिसकी वजह से बचपन से ही रत्नाकर मिश्रा का जुड़ाव संघ था.
वह 1990 से 2011 तक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में जुड़े रहे. इस दौरान वह विद्या मंदिर के अध्यक्ष, जिला राम सेतु रक्षा समिति के अध्यक्ष,विंध्यवानसी संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी रहे.विधायक रत्नाकर मिश्रा के के बारे में कहा जाता है कि वह हमेशा जनता को सुलभ रहने वाले विधायक रहे हैं. अपने विंध्याचल और शहर में स्थित कार्यालय पर वह जनता से मिल कर उनकी समस्याओं को सुनते हैं.