
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नहटौर विधानसभा 2008 में हुए परिसीमन के बाद बनी थी. इससे पहले यह क्षेत्र धामपुर विधानसभा के अंदर जुड़ता था और इस क्षेत्र के सभी वोटर धामपुर विधानसभा के लिए वोट किया करते थे, लेकिन परिसीमन में नहटौर विधानसभा बनाई गई जिसमें नहटौर और बिजनौर विधानसभा का हलदौर क्षेत्र जोड़ा गया. फिर नहटौर विधानसभा बनाई गई.
नहटौर की पहचान यहां के टेक्सटाइल कारोबार से है. नहटौर में कपड़ा बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता था. यहां के बने स्कार्फ और स्टोल विश्व भर में प्रसिद्ध है. यहां जैसी कारीगरी कहीं और देखने को नहीं मिलती, लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते अब यह धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है. अब मुश्किल से 10 या 15 यूनिटें ही कपड़ा बनाने का काम कर रही है जबकि एक दौर में इसका वार्षिक टर्न ओवर 400 करोड़ से ज्यादा का होता था और तब कपड़ा बनाने का कारोबार ही नहटौर की पहचान हुआ करता था.
सामाजिक तानाबाना
नहटौर की सीमा बिजनौर विधानसभा, धामपुर विधानसभा, नगीना विधानसभा और नूरपुर विधानसभा से जुड़ती है. नहटौर आने-जाने के लिए साधन पर्याप्त हैं. यहां से मुरादाबाद, हरिद्वार, काशीपुर, नैनीताल, जसपुर, बिजनौर, दिल्ली और मेरठ आदि के लिए बसें हमेशा मिल जाती हैं. यहां पर रेलवे का कोई साधन फिलहाल नहीं है इसके लिए धामपुर जाना पड़ता है.
इसे भी क्लिक करें --- Bijnor Assembly Seat: राम मंदिर आंदोलन के बाद से बीजेपी का इस सीट पर रहा है दबदबा
क्षेत्र में अगर शिक्षा की बात करें तो इसमें 10 के करीब इंटर डिग्री कॉलेज मौजूद हैं. चिकित्सा की अगर बात की जाए तो कुछ एमबीबीएस डॉक्टर को छोड़कर किसी भी बड़ी बीमारी के इलाज के लिए लोगों को मेरठ या मुरादाबाद ही जाना पड़ता है.
नहटौर विधानसभा सीट के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो इसमें 2,94,269 कुल मतदाता है जिसमें 1,56,581 पुरुष और 1,37,688 महिला मतदाता हैं.
अगर जातिगत वोटों की बात करें तो विधानसभा के अंदर 90,000 मुस्लिम, 82,000 दलित, 32,000 सैनी, 28,000 जाट और 30,000 चौहान मतदाता मौजूद हैं. इस सीट पर जाट और चौहान मतदाताओं की भी मुख्य भूमिका है, ये निर्णायक भूमिका में रहते हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस विधानसभा में 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ था जिसमें बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में ओम कुमार जीत हासिल करते हुए इस विधानसभा के पहले विधायक बने थे और आज भी ओम कुमार इस सीट का विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
नहटौर (सुरक्षित) विधानसभा की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो यह विधानसभा 2008 में हुए परिसीमन के बाद बनी थी. इस विधानसभा पर 2012 में पहली बार चुनाव हुआ था जिसमें बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में ओम कुमार ने इस सीट पर जीत हासिल की थी.
उन्होंने अपने विपक्षी प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के राजकुमार राजू को 19,398 वोटों के अंतर से हराया था. इसमें ओम कुमार को 51,389 और सपा के राजकुमार राजू को 31,991 वोट मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी सुभाष बाल्मीकि तीसरे स्थान पर रहे थे.
2017 का जनादेश
हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में ओम कुमार पाला बदलते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और इस सीट से द्वारा अपनी किस्मत आजमाई. उनकी किस्मत ने फिर साथ दिया और वह दोबारा इस सीट पर विधायक चुने गए. इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मुन्ना लाल प्रेमी को चुनाव में हराया. इस चुनाव में ओम कुमार को 76,444 और मुन्ना लाल प्रेमी को 53,493 वोट मिले.
इस तरह से विधानसभा बनने से लेकर अब तक इस सीट पर ओम कुमार का ही कब्जा है. अब आने वाले समय में देखना है कि ओम कुमार को कोई टक्कर देकर इस सीट को खाली करा पाएगा या नहीं. फिलहाल पिछले 10 सालों से ओम कुमार इस सीट पर अपना कब्जा बनाए हुए हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
विधायक ओम कुमार बिजनौर के गांव महेश्वरी जट के रहने वाले हैं. इनकी प्राथमिक शिक्षा यहीं बिजनौर में हुई है. उन्होंने बिजनौर के राजकीय इंटर कॉलेज से इंटर किया और स्नातक की शिक्षा के लिए वर्तमान डिग्री कॉलेज में एडमिशन लिया. लेकिन तभी इनका असम राइफल्स में सलेक्शन हो गया और फिर फौज में चले गए.
करीब 3 साल तक फौज में रहने के बाद उन्होंने नोएडा में ओम सिक्योरिटी के नाम से अपना बिजनेस शुरू किया जिसकी ब्रांच आज पूरे देश में है. करीब 10,000 से ज्यादा लोग इनके कंपनी में काम करते हैं. ओम कुमार बिजनेसमैन के साथ-साथ किसान भी हैं. इनके परिवार के अन्य सदस्य गांव में खेती भी करते हैं.
अगर इनके राजनीतिक सफर की बात करें तो ओम कुमार ने 2008 में बिजनौर में समाज सेवी के रूप में अपना काम शुरू किया था और 2009 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे. पार्टी ने इनको नहटौर विधानसभा का कोऑर्डिनेटर बना दिया था और 2012 में इनको विधानसभा का टिकट देकर चुनाव लड़ाया जिसमें ओम कुमार चुनाव जीतकर पहली बार में ही विधायक बन गए.
लेकिन 2016 में उनका बसपा से मोहभंग हो गया और 2017 में बसपा को छोड़ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली और बीजेपी ने भी इन्हें टिकट देकर नहटौर से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया. इस सीट से वह दोबारा भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत कर विधायक बन गए और वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.