बीजेपी के साथ एक बार फिर से हाथ मिलाने की चर्चाओं के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को बीजेपी पर जमकर हमला बोला. 'पंचायत आजतक' कार्यक्रम के मंच पर राजभर ने बीजेपी में जाने से इनकार करते हुए कहा कि जिस दिन मैंने सत्ता छोड़ी थी उसी दिन कसम खाई कि जब तक उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी की विदाई न हो जाए मैं शांत नहीं बैठूंगा. उन्होंने ये भी कहा कि मेरे मां-बाप ने सिखाया है कि गर्दन कटा लेना लेकिन गर्दन झुकाना नहीं.
बीजेपी के साथ जाने के सवाल पर राजभर ने कहा कि लोकसभा चुनाव से छह महीने पहले अमित शाह ने सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था. उन्होंने समान शिक्षा, घरेलू बिजली का बिल माफ करने, सबका विकास करने का वादा किया था. लेकिन सरकार बनने के बाद मेरा एक भी काम नहीं किया.
उन्होंने बीजेपी के विकास के दावे को झूठ बताते हुए कहा कि सड़कें सिर्फ कागजों में बनी हैं. 100 में से 90 शौचालयों में या तो दरवाजा नहीं है, या फिर वे किसी काम के नहीं हैं. यूपी बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाने दीजिए, ओमप्रकाश राजभर भारतीय जनता पार्टी को बेदखल करके दिखाएगा.
इससे पहले, तीन अगस्त को ही ओमप्रकाश राजभर ने यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के दौरान यूपी बीजेपी उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह भी मौजूद थे. हाल ही में वे बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से भी मिल चुके हैं. इन मुलाकातों के बाद राजभर के बीजेपी के साथ जाने को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं. स्वतंत्र देव सिंह से मिलने के बाद राजभर ने ये भी कहा था कि अगर बीजेपी उनकी मांगें मान ले तो वे एनडीए में जा सकते हैं.
अब सवाल ये है कि अचानक वे बीजेपी पर हमलावर क्यों हो रहे हैं? क्या राजभर बीजेपी के साथ गठबंधन की चर्चाओं को विराम देने के लिए उस पर हमला बोल रहे हैं या फिर बीजेपी के साथ चर्चा आगे नहीं बढ़ पा रही है?
दरअसल, ओमप्रकाश राजभर की पार्टी ने 2017 का चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा था और योगी सरकार में वे मंत्री बने थे. हालांकि, बाद में 2019 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए गठबंधन तोड़ दिया था.
भागीदारी संकल्प मोर्चा का क्या होगा?
बीजेपी से अलग होने के बाद राजभर ने बीजेपी को रोकने के लिए भागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया. भागीदारी संकल्प मोर्चा में करीब 10 पार्टियां शामिल हैं. बाबू सिंह कुशवाहा जो कुशवाहा समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनकी जन अधिकार पार्टी इस मोर्चे में शामिल है.
अपना दल (के) यानी कि कृष्णा गुट भी भागीदारी संकल्प मोर्चा में सम्मिलित है. खुद ओमप्रकाश राजभर इस मोर्चे के संयोजक हैं. प्रेमचंद प्रजापति भी जो प्रजापति समाज का नेतृत्व करते हैं इससे जुड़े हुए हैं, इनके अलावा अन्य पार्टियों के नेता भी जुड़े हुए हैं, जो अलग-अलग जातियों का नेतृत्व करते हैं. ऐसी चर्चा है कि ओवैसी की एआईएमआईएम पार्टी भी भागीदारी संकल्प मोर्चा का हिस्सा बन सकती है.
ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे थे कि ओमप्रकाश राजभर और ओवैसी के मिल जाने से इन जातियों का वोट बैंक और मुसलमान वोट बैंक आने वाले इलेक्शन का समीकरण बदल सकते हैं. लेकिन बीजेपी के बड़े नेताओं से मिलने के बाद अटकलें लगीं कि राजभर भागीदारी संकल्प मोर्चा छोड़कर फिर से बीजेपी में जा सकते हैं. हालांकि, आजतक के इस कार्यक्रम में उन्होंने अपना रुख बदलते हुए बीजेपी को हराने की कसम खाने की बात कही.
राजभर वोटों का गणित
पूरे उत्तर प्रदेश में राजभर समाज का कुल वोटबैंक 3 फीसदी है जबकि पूर्वांचल के करीब 25 जिलों की करीब 125 से ज्यादा सीटों पर राजभर वोटबैंक काफी मजबूत है. इन सीटों पर राजभर वोटबैंक करीब 18 फीसदी तक है. पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, मऊ, जौनपुर, देवरिया, चंदौली, आजमगढ़, लालगंज, अंबेडकरनगर, मछलीशहर, मिर्जापुर और भदोही जैसे जिलों में राजभर मतदाताओं की अच्छी संख्या है जो किसी भी पार्टी की जीत हार तय करते हैं. प्रदेश की करीब 65 विधानसभा सीटों पर 45 हजार से 80 हजार तक राजभर मतदाता हैं. यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव में माना गया था कि करीब 22 सीटों पर बीजेपी को राजभर वोटों के कारण अच्छी खासी बढ़त मिली थी.
दरअसल, राजभर ने छोटे दलों का जो मोर्चा बनाया है, वह किंगमेकर की भूमिका में आ सकता है, लेकिन उसके लिए उसे कम से कम एक बड़ी पार्टी का साथ चाहिए. लेकिन अब तक कोई बड़ा दल इस मोर्चे के साथ नहीं आया है. राजभर का बीजेपी नेताओं से मिलना और फिर बीजेपी पर हमला बोलना इस बात का संकेत है कि अभी इस मोर्चे की भूमिका तय होनी बाकी है.
(लखनऊ से सत्यम मिश्रा के इनपुट के साथ)