उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की एक विधानसभा सीट है पथरदेवा विधानसभा सीट. पथरदेवा एक कस्बा है जो यूपी और बिहार की सीमा के करीब है. पथरदेवा कस्बे के नाम पर ही इस सीट का गठन किया गया था. पथरदेवा विधानसभा सीट देवरिया जिले की ग्रामीण इलाकों की सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र की आबादी के लिए आजीविका का मुख्य साधन कृषि है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
पथरदेवा विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इससे पहले इस इलाके के मतदाता कसया विधानसभा सीट के लिए मतदान करते थे. पथरदेवा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रहा है. पथरदेवा विधानसभा सीट के लिए 2012 में हुए पहले चुनाव में सपा के शाकिर अली जीते थे. शाकिर ने बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को हराया था.
2017 का जनादेश
पथरदेवा विधानसभा सीट से 2017 के चुनाव में बाजी बीजेपी के हाथ लगी. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही जीते थे. बीजेपी के सूर्य प्रताप शाही ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के शाकिर अली को 42 हजार 997 वोट से हराकर 2012 में मिली हार का बदला चुकता कर दिया. बहुजन समाज पार्टी के नीरज तीसरे और पीस पार्टी के हारुन अली चौथे स्थान पर रहे थे.
सामाजिक ताना-बाना
पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र में तीन लाख से अधिक मतदाता हैं. इस विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां ब्राह्मण, राजपूत और भूमिहार बिरादरी के मतदाताओं की तादाद अधिक है. अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी पथरदेवा विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
पथरदेवा विधानसभा सीट से विधायक सूर्य प्रताप शाही सूबे की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं. सूर्य प्रताप शाही का दावा है कि उनके कार्यकाल में इलाके का चहुंमुखी विकास हुआ है. विपक्षी दलों के नेता शाही के दावे को खोखला बता रहे हैं. सपा ने इस दफे सूर्य प्रताप शाही के पुराने प्रतिद्वंदी ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को पथरदेवा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया है. इस सीट के लिए यूपी चुनाव के छठे चरण में 3 मार्च को मतदान होना है. गौरतलब है कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर सात चरणों में चुनाव हो रहे हैं.