उत्तर प्रदेश में होना वाला विधानसभा चुनाव कांग्रेस के सियासी वजूद को बचाए रखने का सवाल बन गया है. यही वजह है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी के अपने नेताओं को एसी कमरों से बाहर निकालकर गांव और कस्बों में प्रवास करने की रणनीति बनाई है. कांग्रेस अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए गुरुवार को 'जय भारत महासंपर्क अभियान' शुरू किया है, जिसके तहत पार्टी के छोटे से लेकर बड़े नेता तक गांव में तीन दिन रहेंगे.
कांग्रेस यूपी में पिछले तीन दशकों से सत्ता का वनवास झेल रही है, जिसके चलते पार्टी के बड़े नेता से लेकर कार्यकर्ता दूर हो चुके हैं. कांग्रेस का सियासी जनाधार खिसक चुका है और कोर वोटबैंक दूसरे दलों का दामन थाम चुके हैं. ऐसे में कांग्रेस के साथ सूबे में सपा-बसपा जैसे दल भी हाथ मिलाने के लिए तैयार नहीं हैं. इसके चलते कांग्रेस अब अपने दम पर 2022 का चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है.
आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस जमीन पर उतरकर संघर्ष करने और अपने खोए हुए राजनीतिक जनाधार को वापस लाने के लिए गांव में प्रवास करने की रणनीति तैयार की है. 'जय भारत महासंपर्क अभियान' के दौरान पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी यूपी के ग्राम पंचायत में कम से कम 75 घंटे गुजारेंगे. तीन दिनों में कांग्रेस के बड़े नेता 30 हजार ग्राम सभा, वार्ड और करीब 90 हजार लोगों से संपर्क करेंगे.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के गांव में प्रवास करेंगे तो पार्टी के विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना अपने विधानसभा क्षेत्र रामपुर खास में रहेंगी. पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी प्रतापगढ़ के संग्रामगढ़, शीतलमऊ और सांगीपुर ग्राम सभा में तीन दिन प्रवास करेंगे जबकि संगठन सचिव अनिल यादव आमजगढ़ के निजामाबाद के डिहवा बारी गांव में रहेंगे. इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद और पार्टी संगठन के तमाम पदाधिकारी भी गांव में तीन दिनों तक प्रवास करेंगे.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपने जय भारत महासंपर्क अभियान के जरिए लोगों को यह बताने की कोशिश करेगी कि यूपी की इस बिगड़ी हालात के लिए कौन जिम्मेदार है. इस अभियान में पार्टी जनता को यह बताने का प्रयास करेगी कि कांग्रेस पार्टी ने अपने शासन के दौरान देश के लिए क्या-क्या किया. इस दौरान दो पुस्तकों 'हम कांग्रेस के लोग और भारत के खिलाफ संघ का प्रचार' के जरिए लोगों को कांग्रेस के साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी.
कांग्रेस ने यूपी में अपने आपको मजबूत करने और अपनी सियासत ताकत दिखाने के लिए अगले 3 महीने में हर गांव तक पहुंचने और संगठन को खड़ा करने की अहम रणनीति बनाई है. कांग्रेस ने करीब डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का टारगेट रखा है.
कांग्रेस के संभावित विधानसभा प्रत्याशी और पार्टी नेता संपर्क अभियान के तहत गांव में जाकर खाट, चौपाल और पंचायतों में बैठकर जनता की नब्ज भी टटोलने का प्रयास करेंगे और साथ ही उन्हें पार्टी से जोड़ने की कवायद करेंगे ताकि आगामी चुनाव में मजबूती से लड़ सकें. कांग्रेस नेता ग्राम सभाओं और शहरी क्षेत्रों में पहुंचते ही लोगों से मुलाकात करेंगे और वहां पर भोजन करने के बाद 'मेरा शहर-मेरा देश ' संवाद के जरिए लोगों की समस्याओं को सुनकर उसे एक डायरी में दर्ज करेंगे और उन्हें कांग्रेस की नीतियों से अवगत कराएंगे.
'कांग्रेस देगी 'हर घर दस्तक'
कांग्रेस जय भारत महासंपर्क अभियान के तहत हर घर दस्तक देने की योजना है. इसके तहत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता गांवों में प्रवास के दौरान कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन भी करेंगे. गांव में वो सह-भोज का आयोजन करेंगे और इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता क्षेत्र की समस्याओं को समझने, लोगों से उसका संभावित समाधान खोजने और उसके क्रियान्वयन के मुद्दे पर भी बात करेंगे. इस दौरान गांव में तिरंगा झंडा भी फहराया जाएगा और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती भी इस बार गांव में मनाएंगे.
'परिवर्तन का संकल्प और कांग्रेस ही विकल्प'
कांग्रेस का दावा है कि यूपी में 20 सालों में पहली बार इतने बड़े स्तर पर प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है. कांग्रेस दीपावली के पहले लखनऊ में एक बड़ा सम्मेलन करेगी, जिसके जरिए पार्टी अपनी ताकत दिखाएगी. इस सम्मेलन में प्रियंका गांधी मौजूद रहेंगी. माना जा रहा है कि इस सम्मेलन से पार्टी 2022 के अपनी चुनाव अभियान का आगाज करेगी. कांग्रेस ने इस बार 'परिवर्तन का संकल्प और कांग्रेस ही विकल्प' के नारे के साथ पार्टी चुनावी मैदान में उतरने जा रही है. ऐसे में देखना है कि कांग्रेस इसके जरिए क्या विकल्प बनती है.