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चुनावी चौपाल: जनता के मन में मोदी हैं, योगी हैं...और वरुण गांधी भी हैं...

चुनावी माहौल में जब ज़िले की सियासी नब्ज़ टटोलने की बात आती है, तो एक चेहरा जेहन में छाता है और उसी की चर्चा ज़ुबां पर आ जाती है. ये चेहरा है पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी का.

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वरुण गांधी के साथ है जनता
वरुण गांधी के साथ है जनता
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ज़रूरत पड़ने पर सांसद वरुण गांधी से संपर्क कर सकते हैं
  • वो लोगों की मदद करते हैं, सही मुद्दे उठाते हैं वो भी सही हैं

स्थान: पीलीभीत जंक्शन के सामने चाय की दुकान
समय: शाम 7:30

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तराई क्षेत्र की बढ़ती ठंड के साथ ही चाय की दुकान पर शाम को भीड़ इकट्ठा है. स्थानीय युवा यूपी में गहराते चुनावी माहौल पर भी चर्चा करते देखे जा सकते हैं. सहमति-असहमति भी हो रही है पर ज़िले में चुनाव के मुद्दों को लेकर लगभग एक ही राय दिख रही है. रोज़गार, बड़े शैक्षणिक संस्थानों की कमी और हाल ही में हुई कुछ घटनाओं का ज़िक्र करते हुए, महिला सुरक्षा का भी मुद्दा उठ जाता है.

चुनावी माहौल में जब ज़िले की सियासी नब्ज़ टटोलने की बात आती है, तो एक चेहरा जेहन में छाता है और उसी की चर्चा ज़ुबां पर आ जाती है. ये चेहरा है पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी का.

जल, जंगल और ज़मीन, तीनों प्राकृतिक सम्पदा से सम्पन्न हैं. तराई क्षेत्र जिसका प्रमुख ज़िला पीलीभीत, वर्तमान राजनीति में वरुण गांधी की वजह से भी जाना जाता है. वरुण गांधी कुछ समय से अपनी पार्टी बीजेपी के स्टैंड से हटकर, न सिर्फ़ सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे हैं, बल्कि काफ़ी मुखर दिखाई पड़ रहे हैं. किसान आंदोलन हो या लखीमपुर हिंसा, वरुण गांधी के ट्वीट कई बार इतने मुखर होते हैं कि उनकी पार्टी को असहज करते रहे हैं. उनके अपने संसदीय क्षेत्र में लोगों की राय जानने के लिए हमने बात शुरू की.

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वरुण गांधी ‘एप्रोचेबल’ हैं

चाय की चुस्कियों के बीच चर्चा चलती है, तो सबसे पहले शिवम ने बात छेड़ी, जो इलाज के लिए दिल्ली गए थे. उन्होंने कहा, 'AIIMS में इतना आसान नहीं था, पर वरुण जी को फ़ोन किया तो उन्होंने मदद की.' कई लोगों ने उनकी इस बात का समर्थन किया और कहा कि सांसद वरुण गांधी ‘एप्रोचेबल’ हैं. यानी ज़रूरत पड़ने पर आप उनको सम्पर्क कर सकते हैं. वहां मौजूद ज़्यादातर लोग इस बात से सहमत दिखते हैं कि वरुण गांधी लोगों की व्यक्तिगत तौर पर मदद करते हैं. एलएलबी की पढ़ाई कर चुके शिवम् कहते हैं, 'जो लोग भी वरुण जी को संपर्क करते हैं, वो उनकी मदद करते हैं. जो मुद्दे वो उठाते हैं वो भी सही हैं. अभी शारदा सागर डैम इलाके में बाढ़ आई थी, तो वरुण जी दिल्ली में थे. लेकिन उन्होंने 30 लाख रुपए का राशन और दूसरी सहायता तुरंत भिजवाई.'

जनता के मन में मोदी हैं, योगी हैं...और वरुण गांधी भी हैं...!!!' 

चर्चा आगे बढ़ती है तो कई लोग इस बात के समर्थन में आते हैं. लोगों का कहना है कि वरुण गांधी की ये बातें सही हैं. बासु गौरव कश्यप कहते हैं कि 'वरुण को पीलीभीत की जनता सपोर्ट करती है. वरुण गांधी प्रमुख चेहरा हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें कोई बड़ी ज़िम्मेदारी नहीं दी. क्षेत्र की जनता इस बात को महसूस करती है.' उनकी बात में ये जस्टिफ़िकेशन झलकता है कि अगर पार्टी में वरुण गांधी सही मुद्दे उठाते हैं, तो इसमें हर्ज़ क्या है. युवा पत्रकार अतीक कहते हैं, 'प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न होने के बावजूद, ज़िले का विकास नहीं हुआ है. वरुण गांधी एक सांसद के तौर पर लोगों में लोकप्रिय हैं क्योंकि वो यहां अपने क्षेत्र में आते-जाते हैं. लोगों के बीच रहते हैं.' इस चर्चा में जुड़े आशीष दुबे कहते हैं, 'वरुण गांधी यहां आते हैं. लोगों की समस्याएं सुनते हैं और जहां तक हो सकता है उसको सॉल्व करने की भी कोशिश करते हैं.'

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इतने लोग वरुण गांधी का समर्थन कर रहे हैं. फिर भी एक सवाल और उठता है कि अटकलें लग रही हैं कि गांधी कहीं और जा सकते हैं? ज़िले में तो बीजेपी को समर्थन मिला था और चारों सीटों पर बीजेपी विधायक हैं. तो समर्थन किसको देंगे? आशीष दुबे इसका जवाब देते हैं, 'जनता के मन में मोदी है, योगी है... और वरुण गांधी भी है....!!!' 

डबल इंजन की सरकार है, लेकिन ज़िले में विकास नहीं

चुनावी मुद्दों की बात हो, तो अभी ज़िले की चारों विधानसभा सीटों पीलीभीत सदर, बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर पर बीजेपी के विधायक हैं. चुनावी मुद्दों में रोज़गार, उद्योग जैसे मुद्दे हैं. इस बात में भी सहमति दिखती है. शिवम् कहते हैं, 'डबल इंजन की सरकार है, लेकिन ज़िले में वैसा विकास नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था. जबकि चारों सीटों पर बीजेपी का क़ब्ज़ा है.' वह रोज़गार की बात करते हैं. कहते हैं कि ज़िले में बड़े शैक्षणिक संस्थानों में सीटें नहीं हैं. पिछले दिनों ज़िले के महाविद्यालय में हुई घटना का ज़िक्र करते हुए महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उठाते हैं. 

वहीं अतीक इस बात को और स्पष्ट करते हैं कि यहां प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, ऐसे में भी ज़िले का विकास नहीं हो पा रहा. बासु गौरव कहते हैं, 'गेंहू, धान की ढुलाई में बिचौलिये सक्रिय हैं. किसानों को नुकसान होता है. क्या प्रशासन की छूट के बिना ये हो सकता है?' कई और युवा इनका समर्थन करते दिखते हैं. कहते हैं कि अफ़सर काम नहीं करते. मझौला चीनी मिल की बात भी चर्चा में आ जाती है. बीएसपी सरकार में मझौला चीनी मिल बंद हुई थी, पर इसको इस सरकार में भी नहीं शुरू किया जा सका. एक युवा यहां के उपाधि डिग्री कॉलेज की बात भी करते हैं. वह कहते हैं कि वहां एमएससी की सीटें नहीं है. 

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खेती करने वाले युवा किसान किरण पाल की राय कुछ अलग है. वह कहते हैं कि वरुण गांधी को समर्थन है, लेकिन जिस तरह वो नाराज़ चल रहे हैं, उसका फ़ायदा समाजवादी पार्टी को मिल सकता है. लेकिन इसमें भी एक बात होगी. सपा किसको टिकट देती है ये देखना होगा. ज़िले के नेता सक्रिय हैं अगर उनको मौक़ा मिलता है तो पीलीभीत सदर सीट पर सपा बेहतर कर सकती है.' किरण पाल गन्ना किसानों का भुगतान न होने को ज़िले में चुनाव का मुद्दा मानते हैं.

 

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