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Sahjanwa Assembly Seat: यहां की जनता को बदलाव पसंद है, क्या बीजेपी बदल पाएगी अतीत?

सहजनवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को बदलाव पसंद है. यहां का वोटर हर पार्टी को आजमाता रहा है. जनता ने सियासी दलों से लेकर निर्दल तक, हर किसी को मौका दिया है.

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यूपी Assembly Election 2022 सहजनवा विधानसभा सीट
यूपी Assembly Election 2022 सहजनवा विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सहजनवा से नई सदी में रिपीट नहीं हुआ है कोई विधायक
  • सियासी दल से निर्दल तक, जनता ने सबको दिया मौका

गोरखपुर शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर सहजनवा थाना क्षेत्र पड़ता है और उसी के आसपास से शुरू होता है सहजनवा विधानसभा क्षेत्र. सहजनवा, गोरखपुर फोरलेन के साथ ही कई अन्य मार्गों से भी गोरखपुर से जुड़ा हुआ है. सहजनवा से लखनऊ की दूरी 260 किलोमीटर के करीब पड़ती है. यहां से जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है. यहां पर पोस्ट ऑफिस, तहसील, स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा उपलब्ध है.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

सीएम योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर जिले के सहजनवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को बदलाव पसंद है. यहां का वोटर हर पार्टी को आजमाता रहा है. जनता ने सियासी दलों से लेकर निर्दल तक, हर किसी को मौका दिया है. इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस, हर दल को जीत मिली है. सहजनवा में रावत परिवार का दबदबा रहा है. सपा से टिकट कटने पर यशपाल रावत 2007 के चुनाव में बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और जीते भी.

यशपाल रावत 2012 में भी निर्दल लड़े लेकिन इसबार तीसरे नंबर पर रहे. इस विधानसभा सीट पर हर सियासी पार्टी को कड़ी चुनौती मिलती रही है. साल 1977 में जेएनपी के शारदा प्रसाद रावत, 1980 में कांग्रेस आई के किशोरी शुक्ला, 1985 में कांग्रेस के त्रियुगी नारायण मिश्रा विजयी रहे थे. 1989 में जेडी के शारदा प्रसाद रावत, 1991 में बीजेपी के तारकेश्वर प्रसाद, 1993 में सपा से प्रभाव रावत और 1996 में फिर बीजेपी से तारकेश्वर प्रसाद शुक्ला विधायक रहे. 2002 में बसपा के जीएम सिंह, 2007 में निर्दल यशपाल सिंह रावत और 2012 में बसपा के बृजेश सिंह विजयी रहे थे.

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2017 का जनादेश

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जनादेश बीजेपी के पक्ष में रहा था. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के शीतल पांडेय विधानसभा पहुंचने में सफल रहे थे. शीतल पांडेय ने बसपा उम्मीदवार देव नारायण सिंह को हराया. शीतल पांडेय को 72203 वोट मिले थे. शीतल पांडेय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 15 हजार से अधिक वोट के अंतर से हराया.

सामाजिक ताना-बाना

गोरखपुर के सहजनवा विधानसभा क्षेत्र में हर जाति और वर्ग के मतदाता हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या करीब तीन लाख 60 हजार है. सजनवा में करीब दो लाख मतदाता पुरुष वर्ग के हैं और करीब डेढ़ लाख मतदाता महिला वर्ग की हैं. यहां थर्ड जेंडर के वोटर भी हैं. यहां के वोटर वोट के समय जातिगत समीकरण कम, परिवर्तन पर अधिक ध्यान देते हैं.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

बीजेपी विधायक शीतल पांडे का जन्म गोरखपुर के ही पिपराहेमा में हुआ था. इनके पिता का नाम कैलाश नाथ पांडे है. गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक शीतल पांडे की शादी 23 जून 1975 को जयंती देवी के साथ हुई. विश्वविद्यालय से ही राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले शीतल पांडे की गिनती अच्छे वक्ता के तौर पर होती है. ये सीएम योगी के भी करीबी माने जाते हैं. सहजनवा में कई विकास कार्य कराने का दावा विधायक की ओर से किया गया है.

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विविध

शीतल पांडे साल 1975 में देश में लागू आपातकाल के दौरान पर्चा बांटते हुए गिरफ्तार हुए थे. तब पांडेय ने 19 माह जेल में गुजारे और उसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया लेकिन उन्हें परोल पर भी नहीं छोड़ा गया. 1977 में जेल से छूटने के बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय से छात्रसंघ चुनाव लड़ा और शिव प्रताप शुक्ला को हराया. शिव प्रताप शुक्ला केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे.

 

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