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Sikandra Rao Assembly Seat: 1991 से हर बार बदला विधायक, क्या बीजेपी रच पाएगी इतिहास?

सिकंदराराऊ विधानसभा सीट के सियासी मिजाज की बात करें तो क्षेत्र के मतदाताओं ने साल 1991 से हर चुनाव में विधायक बदला है. कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत सकी है.

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यूपी Assembly Election 2022 सिकंदराराऊ विधानसभा सीट
यूपी Assembly Election 2022 सिकंदराराऊ विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सिकंदराराऊ से विधायक हैं बीजेपी के वीरेंद्र सिंह राणा
  • 2012 में विधायक रहे थे बसपा के रामवीर उपाध्याय

यूपी के हाथरस जिले में सिकंदराराऊ विधानसभा सीट है. यह क्षेत्र धान उत्पादन के लिए जाना जाता है. इस क्षेत्र में सर्वाधिक उसर भूमि है. इस क्षेत्र का हसायन क्षेत्र गुलाब इत्र के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. यहां इत्र का व्यवसाय बड़े पैमाने पर होता है. यहां का पुरदिलनगर इलाका कांच के नग बनाने के लिए देश-विदेश में अपनी पहचान रखता है.

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ग्रामीण उसर और परती भूमि के साथ ही एटा, अलीगढ़ और कासगंज से लगती सीमाओं वाले इस क्षेत्र में बड़े उद्योग धंधों की स्थापना की मांग भी उठती रही है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सलेमपुर में पेट्रो केमिकल परियोजना की स्थापना कराने का भरोसा दिलाया था. इसके लिए जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया गया था लेकिन इस दिशा में आगे कुछ भी नहीं हुआ. किसान अपनी जमीन वापस करने की मांग करते रहे हैं लेकिन ये मांग भी मांग बनकर ही रह गई.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

सिकंदराराऊ विधानसभा सीट के सियासी मिजाज की बात करें तो क्षेत्र के मतदाताओं ने साल 1991 से हर चुनाव में विधायक बदला है. कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीत सकी है. साल 1991 में जनता दल के उम्मीदवार को जीत मिली थी. साल 1993 के चुनाव में यहां सपा उम्मीदवार को जीत मिली. 1996 में जीत का सेहरा बीजेपी उम्मीदवार के सिर सजा तो 2002 में यहां निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली. 2007 में ये सीट फिर से बीजेपी के पास आ गई तो 2012 के चुनाव में यहां बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का हाथी चल गया. 2012 में बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे रामवीर उपाध्याय विजयी रहे थे.

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सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से बसपा के रामवीर उपाध्याय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के यशपाल सिंह चौहान को करीबी मुकाबले में तकरीबन एक हजार वोट के करीबी अंतर से शिकस्त दी थी. बसपा के रामवीर को 94471 वोट मिले थे वहीं सपा के यशपाल भी 93408 वोट प्राप्त करने में सफल रहे थे. 2017 के चुनाव में तस्वीर बदल गई और बीजेपी इस सीट से जीतने में सफल रही.

2017 का जनादेश

सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से 2017 के चुनाव में बीजेपी ने वीरेंद्र सिंह राणा को उम्मीदवार बनाया. राणा के मुकाबले बसपा ने बनी सिंह बघेल और सपा ने यशपाल सिंह चौहान को उतारा. बीजेपी के वीरेंद्र सिंह राणा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के बनी सिंह बघेल को 14 हजार से अधिक वोट के अंतर से हरा दिया. सपा के यशपाल तीसरे स्थान पर रहे.

सामाजिक ताना-बाना

सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र में हर जाति-वर्ग के लोग रहते हैं. अनुमानों के मुताबिक सिकंदराराऊ विधानसभा क्षेत्र में ठाकुर वर्ग के मतदाताओं की बहुलता है. यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण और बघेल मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में हैं. अनुसूचित जाति के मतदाता भी सीट का परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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विधायक का रिपोर्ट कार्ड

सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक बीजेपी के वीरेंद्र सिंह राणा का जन्म एक नवंबर 1958 को हाथरस के बिसाना गांव में हुआ था. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव और माध्यमिक शिक्षा सादाबाद इंटर कॉलेज से पूरी की. इसके बाद वीरेंद्र सिंह राणा छत्तीसगढ़ चले गए और 1976 से 1996 तक एक शराब फैक्ट्री में बतौर मैनेजर कार्य किया. छत्तीसगढ़ में रहते हुए ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और उन्होंने वनवासी कल्याण समिति के लिए भी काम किया. साल 1996 में वीरेंद्र सिंह राणा हाथरस लौट आए.

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हाथरस वापस आने के बाद राणा बीजेपी से जुड़े और पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रहे. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वीरेंद्र सिंह राणा को सिकंदराराऊ विधानसभा सीट से टिकट दे दिया और वे चुनावी बाजी जीतकर विधानसभा पहुंचने में भी सफल रहे. बीजेपी विधायक वीरेंद्र सिंह राणा अपनी विधायक निधि से क्षेत्र में इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण कराने के साथ-साथ करीब 70 से 75 करोड़ रुपये की लागत से अन्य विकास कार्य कराने के भी दावे करते हैं. इनमें दो विद्यालय, एक पॉलिटेक्निक कॉलेज, एक स्टेडियम का निर्माण भी शामिल है. वीरेंद्र सिंह राणा के खिलाफ कोई आपराधिक केस नहीं है.

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