उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव छोटे-छोटे दलों को मिलाकर अपना कुनबा बढ़ाने में जुटे हुए हैं. बीजेपी से चुनावी मुकाबले के लिए अखिलेश जातीय आधार वाले आधा दर्जन दलों के साथ गठबंधन फाइनल कर लिए हैं. लेकिन, सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई फॉर्मूला नहीं आ सका है. ऐसे में सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारा करना सपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
सपा का दस दलों के साथ गठबंधन
2022 विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव ने आरएलडी, सुभासपा, महानदल, एनसीपी, जनवादी सोशलिस्ट पार्टी और कृष्णा पटेल के अपना दल के साथ गठबंधन तय हो गया है. इसके अलावा भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल रहे कई दलों के साथ भी सपा ने तालमेल कर रखा है.
वहीं, शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को भी एडजस्ट करने और दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की बहुजन आजाद समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने की चर्चाएं हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के भी सपा के साथ आने की संभावना है. ऐसे में तकरीबन दस से ज्यादा दल सपा गठबंधन में शामिल हो सकते हैं.
सीट शेयरिंग को लेकर फंसा पेच
सूबे की कुल 403 विधानसभा सीटें है, लेकिन सपा कितने सीटों पर लड़ेगी और सहयोगी दलों के लिए कितनी सीटें छोड़ेगी यह बात अभी सामने नहीं आ सकी है. हालांकि, यह बात साफ है कि अखिलेश यादव ने इस बार बड़े दलों के बजाय छोटे दलों के साथ गठबंधन का फैसला किया है. ऐसे में साफ है कि सपा 300 से ज्यादा सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी और बाकी 80 से 90 सीटों में सहयोगी दलों को एडजस्ट करने का प्लान है.
बीजेपी से नाता तोड़कर इस बार सपा के साथ आए सुहेलदेव समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई दावा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो उनकी पार्टी की ओर से 20 सीटों की डिमांड की जा रही है. ऐसे में राजभर वोटों के समीकरण को देखते हुए अखिलेश उन्हें 10 से 12 सीटें दे सकते हैं.
महान दल और जनवादी पार्टी शामिल
महान दल और जनवादी पार्टी सोशलिस्ट सबसे पहले सपा के साथ आए, लेकिन इन दोनों दलों ने सीटों की कोई डिमांड नहीं रखी है. ऐसे में माना जा रहा है कि महान दल और जनवादी पार्टी दोनों ही सपा के चुनाव निशान पर किस्मत आजमा सकते हैं. जनवादी पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर चंदौली सीट से लड़ चुके हैं जबकि महान दल ने कहा कि शीट शेयरिंग को लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है.
आरएलडी के साथ गठबंधन फाइनल
सपा के गठबंधन में सबसे ताकतवर सहयोगी आरएलडी है, जिसका सियासी आधार पश्चिमी यूपी के इलाके में है. किसान आंदोलन के चलते आरएलडी को संजीवनी मिली है. ऐसे में आरएलडी की डिमांड को 50 से ज्यादा सीटों की थी, लेकिन अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद सीट बंटवारे का फॉर्मूला निकल आया है. ऐसे में माना जा रहा है कि सपा आरएलडी को करीब 36 सीटें दे सकती है.
आम आदमी पार्टी यूपी में 117 सीटों पर अपनी कैंडिडेट घोषित कर चुकी है, लेकिन अब सपा के साथ गठबंधन करने की चर्चाएं है. आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात भी की है और गठबंधन के संकेत भी दिए हैं. ऐसे में सपा यूपी में आम आदमी पार्टी को कितनी सीटें देगी यह बात अभी साफ नहीं है.
चंद्रशेखर भी सपा के साथ आ सकते हैं
वहीं, यूपी में अखिलेश यादव के साथ दलित नेता चंद्रशेखर की पार्टी के साथ भी चुनाव लड़ने की संभावना है. इस संबंध में चंद्रशेखर दो दिन पहले लखनऊ अखिलेश यादव से मिलने पहुंचे थे, लेकिन यह मुलाकात हो नहीं सकी. हालांकि, यह साफ है कि चंद्रशेखर सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन सीटों की डिमांड काफी ज्यादा है. वो आजतक के पंचायत कार्यक्रम में भी कहा था कि बड़े दलों को गठबंधन के लिए बड़ा दिल दिखाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारी हिस्सेदारी के लिहाज से भागीदारी दी जाएगी तभी गठबंधन करूंगा.
शिवपाल की सपा से बड़ी डिमांड
सपा के साथ गठबंधन करने के लिए बेताब नजर आ रहे शिवपाल यादव को अखिलेश ने एडजस्ट करने की बात कह चुके हैं, लेकिन शिवपाल ने 100 सीटों की डिमांड की है. ऐसे में सपा उन्हें इतनी सीटें देने के मूड में नहीं है, जिसके चलते गठबंधन पर संकट गहराया हुआ है. साथ ही राजभर के साथ कुछ छोटे दल सपा गठबंधन में है, जिन्हें सीटें देने की भी चिंता है. इसके अलावा कृष्णा पटेल की पार्टी अपना दल के साथ भी सपा ने गठबंधन फाइनल कर लिया है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है.