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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 25 प्रतिशत उम्मीदवार दागी, कई पर हत्या के मामले भी दर्ज

यूपी के चुनावी मैदान में उतरे 6944 उम्मीदवारों में से 1694 पर आपराधिक मामले दर्ज है. कई तो फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. इनमें से 1262 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमले, अपहरण, महिलाओं के प्रति अपराध जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं.

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UP ELECTION
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी चुनाव में दागी उम्मीदवारों की लंबी लिस्ट
  • महिलाओं के खिलाफ अपराध में भी संलिप्त

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ताल ठोक रहे कुल 6944 उम्मीदवारों में से 1694 का रिश्ता अपराध से है. यानी इनके खिलाफ अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. ये संख्या कुल उम्मदीदवारों का सीधा-सीधा 25 प्रतिशत है. यानी एक चौथाई उम्मीदवार तो आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं. उनमें भी 1262 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमले, अपहरण, महिलाओं के प्रति अपराध जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं. कुछ जमानत पर हैं कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज है.

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नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के साझा अध्ययन में विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे कुल 6944 में से 6874 उम्मीदवारों के हलफनामे खंगाले हैं. इनमें बाकी बच गए 70 उम्मीदवारों के चरित्र का पता इसलिए नहीं चल पाया क्योंकि उनके हलफनामे की छपाई बेहद खराब थी. उसे पढ़ा ही नहीं जा सका.

अध्ययन के मुताबिक 44 तो हत्या के अभियुक्त हैं जबकि 209 के खिलाफ आईपीसी की दफा 307 के तहत जानलेवा हमला करने के मुकदमे दर्ज हैं. महिलाओं के प्रति अपराध के 107 आरोपी हैं. इनमें से 16 रेप के मुलजिम हैं. उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की सूची देखने से तो पता चलता है कि यहां 18 से 65 फीसदी दलों के उम्मीदवार आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं. उत्तराखंड में थोड़े कम यानी 17 से 33 फीसदी उम्मीदवार इस श्रेणी में हैं. गोवा में 23 से 46 फीसदी, मणिपुर में 13 से 29 फीसदी और पंजाब में 11 से 65 फीसदी उम्मीदवार दागी रिकॉर्ड वाले हैं.

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गोवा में 301 में 77, मणिपुर में 265 में 53, पंजाब में कुल 1276 उम्मीदवारों में से 315 पर मुकदमे चल रहे हैं. उत्तराखंड में 626 में 107 और उत्तर प्रदेश में 4406 में 1142 दागी हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निर्वाचन आयोग के निर्देश के बावजूद सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के होमपेज, मीडिया और लोकप्रिय अखबारों में अपने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के कारनामों का खुलासा नहीं किया है. कायदे से उनको अपने ऐसे उम्मीदवारों के बारे में टिकट मिलने के बाद, नामांकन के बाद और फिर चुनाव प्रचार बंद होने के समय विज्ञापन देकर बताना होगा कि आखिर पार्टी ने उनको ही टिकट क्यों दिया.

 

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