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लखनऊ में परशुराम प्रतिमा, जिलों में प्रबुद्ध सम्मेलन, ब्राह्मण एजेंडे को धार देने में जुटी सपा

यूपी चुनाव से पहले सपा ब्राह्मण एजेंडे को धार देने में जुट गई है. सपा ब्राह्मण मतों को साधने के लिए एक तरफ प्रबुद्ध सम्मेलन कर रही है तो दूसरी तरफ लखनऊ में भगवान परशुराम की 108 फीट की मूर्ति लगाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली है. ऐसे में देखना है कि अखिलेश यादव 2022 में सत्ता में वापसी कर पाते हैं कि नहीं?

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परशुराम की मूर्ती के साथ अखिलेश यादव और अभिषेक मिश्रा
परशुराम की मूर्ती के साथ अखिलेश यादव और अभिषेक मिश्रा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी में ब्राह्मणों को साधने में सपा और बसपा जुटे
  • सपा लखनऊ में भगवान परशुराम की प्रतिमा लगाएगी
  • यूपी के जिलों में सपा ब्राह्मण सम्मलेन शुरू किया

उत्तर प्रदेश की सियासी जंग जीतने लिए और सत्ता में वापसी के लिए समाजवादी पार्टी लगातार अपने सियासी समीकरण दुरुस्त करने में जुटी है. सूबे में ब्राह्मण एजेंडे को धार देने के लिए सपा ने बकायदा रूप रेखा तैयार की है. सपा ब्राह्मण मतों को साधने के लिए एक तरफ प्रबुद्ध सम्मेलन कर रही है तो दूसरी तरफ लखनऊ में भगवान परशुराम की 108 फीट की मूर्ति लगाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली है. ऐसे में देखना है कि यूपी का ब्राह्मण मतदाताओं की पंसद 2022 के चुनाव में अखिलेश यादव बनते है कि नहीं? 

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साल 2017 के चुनाव में ब्राह्मणों ने बीजेपी का जमकर समर्थन किया. 15 साल के बाद बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की तो राजपूत (क्षत्रीय) समुदाय से आने वाले योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने. यही वजह है कि योगी सरकार में राजपूत बनाम ब्राह्मण के विपक्ष के नैरेटिव के मद्देनजर ब्राह्मण वोटों का अपने पाले में जोड़ने के लिए विपक्ष सक्रिय है. 

सपा ने शुरू किया ब्राह्मण सम्मेलन

बसपा की तर्ज पर सपा ने ब्राह्मणों को साधने के लिए यूपी के सभी जिलों में प्रबुद्ध सम्मेलन शुरू कर दिया है. इसका आगाज सपा ने पूर्वांचल के बलिया और मऊ कर दिया है और अब 25 अगस्त से 5 सितंबर के बीच दूसरे चरण के जिलों में शुरू करने जा रही है. जौनपुर, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज व गोंडा में प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद दूसरे राउंड में श्रावस्ती, देवरिया, वाराणसी और गोरखपुर में यह सम्मेलन आयोजित होंगे.

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पूर्वांचल के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में भी सपा ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित करेगी. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ब्राह्मणों को सपा से जोड़ने की जिम्मेदारी पार्टी के ब्राह्मण नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, पूर्व कैबिनेट मंत्री, अभिषेक मिश्रा, मनोज पांडेय, पूर्व विधायक सनातन पांडेय और संतोष पांडेय की पांच सदस्यीय टीम को सौंपी है. 

परशुराम की मूर्ति लगाएगी सपा

ब्राह्मण समुदाय को सियासी संदेश देने के लिए सपा अक्टूबर के आखिर में लखनऊ में 108 फीट की भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने जा रही है. इसके लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निपट सपा ने मौरा गांव में दो बीघा जमीन भी चिंहित कर ली गई है. मूर्ति के अनावरण के मौके पर सपा ब्राह्मणों का एक बड़ा कार्यक्रम भी करेगी, जिसमें ब्राह्मण समुदाय के तमाम लोगों और मंदिर के पुजारियों को बुलाने की योजना है. 

अखिलेश यादव के मौजूदगी में सपा नेता अभिषेक मिश्रा ने लखनऊ में परशुराम की मूर्ति लगाने का ऐलान किया था, जिसे 2022 के चुनाव से ठीक पहले अमलीजामा पहनाने का काम शुरू कर दिया है. इस तरह से सपा यूपी के ब्राह्मणों को बड़ा मैसेज देने की रणनीति बनाई है. 

अलग-अलग जिलों में मूर्ति लग रही

हालांकि, सपा ने ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए यूपी के अलग-अलग जिलों में भगवान परशुराम के मूर्ति बनवा रही है. प्रदेश में सबसे बड़ी मूर्ति लखनऊ में लगने जा रही है. कांस्य की यह मूर्ति जयपुर में प्रसिद्ध मूर्तिकार राजकुमार पंडित तैयार कर रहे हैं. सपा के ब्राह्मण नेता व लंभुआ के पूर्व विधायक संतोष पांडेय की चिरंजीवी भगवान परशुराम चेतना पीठ यह मूर्ति लगवा रही है.

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यूपी में मेरठ के हस्तिनापुर, आगरा, जौनपुर, प्रयागराज, बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद, श्रावस्ती में 11 फीट से लेकर 31 फीट तक की परशुराम की मूर्ति परशुराम चेतना पीठ लगवा चुकी है. इतना ही नहीं गाजियाबाद के वसुंधरा और साहिबाबाद में परशुराम चौक की स्थापना भी की गई है. वहीं, अब यूपी चुनाव से पहले वाराणसी, जौनपुर, भदोही, प्रतापगढ़, श्रावस्ती, गोंडा, महराजगंज, बस्ती, गोरखपुर, फैजाबाद व सुलतानपुर में भी भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने की कवायद है. 

उत्तर प्रदेश की सियासत में भले ही ब्राह्मणों की ताकत सिर्फ 10 से 12 फीसदी वोट तक नहीं सिमटी हुई है. ब्राह्मणों का प्रभाव समाज में इससे कहीं अधिक है. ब्राह्मण समाज प्रभुत्वशाली होने की वजह से राजनीतिक हवा बनाने में भी सक्षम है. 1990 से पहले तक सत्ता की कमान ज्यादातर ब्राह्मण समुदाय के हाथों में रही है, लेकिन नारायण दत्त तिवारी के बाद से कोई ब्राह्मण सीएम नहीं बना है. ऐसे में अब फिर ब्राह्मण राजनीति यूपी की सियासत में गर्मा गई है. 

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