उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections 2022) में लगातार अब सारी पार्टियां युवाओं को टारगेट कर रही हैं. बीजेपी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य दल भी यूथ को प्रलोभन और चुनावी वादों से लुभाने की कोशिश में जुट गए हैं. मतदान से पहले सभी दल अपने घोषणा पत्रों को भी युवाओं के हिसाब से तैयार करवा रहे हैं.
उधर, यूपी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने तकरीबन 1 लाख मोबाइल फोन और टैबलेट युवाओं को साधने के लिए बांट दिए हैं. नौजवानों को इस क्रम में पढ़ाई और एजुकेशन सिस्टम मजबूत करने की बात कही गई और युवाओं को इस विधानसभा चुनाव में आगे रखने की क़वायद शुरू कर दी है.
समाजवादी पार्टी की बात करें तो पिछली बार सरकार ने बेरोजगारी भत्ता के बहाने युवाओं को अपनी तरफ किया था, वहीं इस बार लैपटॉप देने की बात कही. यहां तक कुछ लैपटॉप बांटे भी गए. ऐसे में युवाओं पर उनकी जरूरत के हिसाब से पार्टियां सियासी दांव खेल रही हैं, ताकि विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सकें.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं रही और उसने पहले तो 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा दिया और जिसके बाद यूथ लड़कियों को साधने के लिए 'पिंक स्कूटी मैराथन' कराकर लड़कियों को साधा. यही नहीं, कांग्रेस ने युवा प्रवक्ता बनाए, युवाओं को डिजिटली जोड़ा और यहां तक अब युवाओं का अलग से घोषणा पत्र निकालने की बात कही जा रही है, जिसमें यह जाहिर हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए युवाओं को अलग अलग तरीके से पार्टियां अपने हित के लिए आगे कर रही हैं.
हालांकि, इस क्रम में बहुजन समाज पार्टी मायावती की बात करें तो उन्होंने सीधे युवाओं को संवाद करने के लिए अपने भतीजे आकाश आनंद, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा, सतीश चंद्र मिश्रा के ही दामाद परेश मिश्रा को युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा कर दिया. आकाश आनंद नेशनल कोऑर्डिनेटर भी हैं. लगातार इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर पर युवाओं को साध रहे हैं. यही नहीं, सतीश मिश्रा के बेटे कपिल मिश्रा ने युवाओं के साथ यूथ संवाद भी शुरू कर दिया है.