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UP: नौतनवा से निषाद पार्टी ने BJP के ऋषि त्रिपाठी को दिया टिकट, अमनमणि हैं MLA

गठबंधन के तहत यह सीट निषाद पार्टी के खाते में गई है. हालांकि, बीजेपी इस सीट से अभी तक जीत नहीं पाई. ऐसे में बीजेपी अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी के गठबंधन से यहां कमल खिलाने के फिराक में है. ऋषि त्रिपाठी की वजह से यहां की सियासी लड़ाई के त्रिकोणीय होने का आसार हैं.

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भाजपा के जिला महामंत्री ऋषि त्रिपाठी को निषाद पार्टी ने दिया टिकट
भाजपा के जिला महामंत्री ऋषि त्रिपाठी को निषाद पार्टी ने दिया टिकट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नौतनवा से अमन मणि त्रिपाठी हैं विधायक
  • गठबंधन के तहत बीजेपी ने निषाद पार्टी को दी सीट

यूपी के महराजगंज की नौतनवा विधानसभा सीट से बीजेपी की सहयोगी निषाद पार्टी ने अपने उम्मीदवार का घोषणा कर दी. इस सीट से निषाद पार्टी ने भाजपा के जिला महामंत्री ऋषि त्रिपाठी को टिकट दिया है. इस सीट से बाहुबली नेता और पूर्व मंत्री अमरमणि के बेटे अमन मणि त्रिपाठी निर्दलीय विधायक हैं. 

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गठबंधन के तहत यह सीट निषाद पार्टी के खाते में गई है. हालांकि, बीजेपी इस सीट से अभी तक जीत नहीं पाई. ऐसे में बीजेपी अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी के गठबंधन से यहां कमल खिलाने के फिराक में है. ऋषि त्रिपाठी की वजह से यहां की सियासी लड़ाई के त्रिकोणीय होने का आसार हैं. 

ऋषि त्रिपाठी गोरखपुर के बेतियाहाता के रहने वाले हैं. वे पेशे से वकील हैं. वे केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को अपना राजनैतिक गुरू मानते हैं. ऋषि त्रिपाठी ने 2014 में बीजेपी की सदस्यता लेकर राजनीतिक पारी शुरू की. 

ऋषि 2017 में  फरेंदा विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे थे. लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला. इसके बाद वे नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो गए. इस बार चुनाव में यह सीट निषाद पार्टी के खाते में गई. पहले चर्चा थी निर्दलीय विधायक अमन मणि त्रिपाठी निषाद पार्टी से टिकट मांग रहे हैं. लेकिन निषाद पार्टी ने ऋषि त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया. 

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दो सियासी परिवारों के बीच ऋषि का होगा त्रिकोणीय मुकाबला 

नौतनवा सीट की सियासत पिछले 40 साल से ब्राह्मण और ठाकुर के इर्द-गिर्द ही घूम रही है. बाहुबली नेताओं का विधानसभा चुनावी अखाड़ा बना रहा. इस सीट से वीरेन्द्र प्रताप शाही और अखिलेश सिंह दो-दो बार विधायक रहे. इसके बाद अमर मणि त्रिपाठी यहां से चार बार विधायक बने. इस सीट से कुंवर कौशल सिंह और अमन मणि एक-एक बार विधायक चुने गए. कल्याण सिंह की सरकार में पहली बार अमर मणि त्रिपाठी मंत्री बने थे. 

 मधुमिता हत्याकांड में सजा होने के बाद अमर मणि के बेटे अमनमणि अपने पिता की सियासत की विरासत को संभालने के लिए पहली बार 2012 में सपा के टिकट में चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन अपने परिवार के कुंवर कौशल किशोर सिंह से चुनाव हार गए. इस सीट से कांग्रेस ने सदामोहन उपाध्याय को प्रत्याशी घोषित किया है. हालांकि, सपा और बसपा ने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किए. 

 

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