वैसे तो रायबरेली को गांधी का गढ़ कहा जाता है, पर इस गढ़ में बीते 40 सालों से लगभग हर बार विधानसभा चुनावों में 50% से ज्यादा सीटों पर ठाकुर बिरादरी का प्रत्याशी ही विधानसभा पहुंचता है.
यहीं नहीं चाहे 2007 का विधानसभा चुनाव हो या फिर 2012 या 2017 का... यहां एक ही बिरादरी का नाम सबसे ज्यादा आता है और वह जाति है क्षत्रिय. विधानसभा के बाद लोकसभा की बात करें तो आजादी के 75 सालों में अबतक महज 3 सांसद गैरकांग्रेसी बने, जिनमें से दो बार ठाकुर बिरादरी से अशोक सिंह ने जीत दर्ज की थी.
2007 के विधानसभा चुनाव में ऊंचाहार विधानसभा से अजय पाल सिंह, सरेनी विधानसभा से अशोक सिंह हो या सदर विधानसभा से अखिलेश सिंह, ये तीनों जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.
2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी से सरेनी विधानसभा से देवेंद्र सिंह सदर विधानसभा से अखिलेश सिंह तो हरचंदपुर विधानसभा से पंजाबी सिंह विधानसभा पहुंचे थे.
2017 विधानसभा चुनावों में भी ठाकुर बिरादरी का बोलबाला रहा था. 4 विधानसभा सीटों में 3 में ठाकुर जाति के प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. सदर विधानसभा से अदिति सिंह, हरचंदपुर विधानसभा से राकेश सिंह तो सरेनी विधानसभा से धीरेंद्र बहादुर सिंह ने जीत दर्ज की थी.
रायबरेली विधानसभा क्षेत्र में तीन लाख से अधिक मतदाता हैं. रायबरेली विधानसभा सीट की गिनती राजपूत बाहुल्य सीटों में होती है. ब्राह्मण के साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी रायबरेली विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं.