UP Exit Poll 2022: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे, लेकिन उससे पहले आए एग्जिट पोल (Exit Poll) में योगी सरकार प्रचंड बहुमत के साथ लौटती दिख रही है. इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में बीजेपी को 288 से 326 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि सपा गठबंधन को 76 से 101 सीटें मिलने का अनुमान है. सूबे में पहले के मुकाबले भले ही सपा की सीटें बढ़ रही हों, लेकिन एम-वाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को दूसरी जातियों का साथ नहीं मिला. इस तरह सपा की खूबी ही चुनाव में उसे ले डूबी?
इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के सर्वे अगर नतीजे में तब्दील होते हैं तो साफ है कि उत्तर प्रदेश में सपा को मुस्लिम और यादव ने जमकर वोट दिए हैं, लेकिन दूसरे अन्य समुदाय का साथ नहीं मिला. सर्वे के मुताबिक सपा को 36 फीसदी और बीजेपी को 46 फीसदी वोट मिल रहा है. सपा को मिल रहे वोट शेयर में सबसे बड़ी हिस्सेदारी उसके एम-वाई समीकरण की है.
एग्जिट पोल के सर्वे में सपा को 83 फीसदी मुस्लिम और 86 फीसदी यादव वोट मिलने का अनुमान है. आरएलडी का साथ होने के चलते 45 फीसदी जाट वोट मिलता दिख रहा है. इसके अलावा सपा गठबंधन को दूसरी अन्य जातियों का वोट नहीं मिलता दिख रहा है. सपा को 25 फीसदी गैर-जाटव दलित वोट मिल रहा है तो 13 फीसदी जाटव ने वोट किया है. सपा को 20 फीसदी ओबीसी और 16 फीसदी सामान्य वर्ग का वोट मिला है. कुर्मी समुदाय का 28 फीसदी, 16 फीसदी ब्राह्मण,14 फीसदी ठाकुर ने सपा को वोट किया है.
वहीं, एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को जाट, ओबीसी, दलित समुदाय ने सपा से ज्यादा वोट दिया है. बीजेपी को जाटों का 56 फीसदी वोट मिला तो 21 फीसदी जाटव और 52 फीसदी गैर-जाटव दलितों का साथ मिला है. इस तरह से ओबीसी का 67 फीसदी वोट मिला तो 71 फीसदी सामान्य वर्ग साथ रहा. बीजेपी को 60 फीसदी कुर्मी, 70 फीसदी ब्राह्मण, 73 फीसदी ठाकुर वोट मिलने का अनुमान है.
इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के आंकड़े नतीजे में तब्दील होते हैं तो साफ है कि सपा को मुस्लिम और यादव छोड़कर किसी का साथ नहीं मिल सका. एम-वाई समीकरण के दम पर सपा भले ही अपनी सीटें तो बढ़ा रही है, पर सत्ता के सिंहासन तक नहीं पहुंच पा रही. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सपा के मुस्लिम-यादव परस्त झुकाव के चलते दूसरी ओबीसी जातियां उसके साथ नहीं आईं.
ओबीसी का चेहरा माने जाने वाले ओपी राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान जैसे बड़े चेहरे एसपी के साथ आ गए. खूब हो हल्ला हुआ कि अखिलेश यादव के साथ गैर यादव ओबीसी आ गया है. ये वही गैर यादव ओबीसी है जिसने दो बार बीजेपी को भारी बहुमत से जिताया. एग्जिट पोल देखकर लगता है कि बीजेपी से एसपी में शामिल हुए ओबीसी के बड़े नेता सिर्फ हेडलाइन में ही चमके. जमीन पर उनका वैसा प्रभाव नहीं दिखा, जैसा कि कयास लगाए जा रहे थे. इन नेताओं के साथ आने से लगा कि गैर यादव ओबीसी एक बार फिर से सपा के साथ आ गया है. लेकिन शायद ऐसा नहीं हुआ.
यूपी चुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद को मुस्लिम और यादव परस्त छवि से बाहर निकालने की कवायद करते दिखे लेकिन एग्जिट पोल को देखकर लगता है कि गैर-यादव ओबीसी का विश्वास नहीं जीत सके. इसकी वजह यह मानी जा रही है कि चुनाव में सपा के पक्ष में जिस तरह से यादव-मुस्लिम गोलबंद हुआ तो दूसरी तरफ दूसरी जातियां बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ी हो गईं. सपा के साथ एम-वाई समीकरण तो मजबूती से रहा पर दूसरी जातियों से साथ न मिलने से सत्ता में वापसी के सारी कवायद फेल होती दिख रही है.