Aaj Tak exit poll: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे तो 10 मार्च को आएंगे, लेकिन उससे पहले सोमवार को आए एग्जिट पोल को देखा जाए तो यह साफ हो गया है सूबे में बीजेपी और सपा में किसी तरह कांटे की टक्कर है ही नहीं. बीजेपी के डबल इंजन की रफ्तार के आगे न ही सपा का सियासी गठजोड़ काम आया और न ही कोई लोकलुभान वादे. इंडिया टुडे-एक्सेस माय इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक. योगी सरकार स्पष्ट बहुमत के साथ सूबे की सत्ता में लौटती दिख रही है. इस तरह मोदी-योगी की जोड़ी के जादू सहित पांच फैक्टर, जिसने विपक्ष के सारे सियासी समीकरण को ध्वस्त कर दिए हैं.
इंडिया टुडे-एक्सेस माय इंडिया एग्जिट पोल में यूपी में योगी सरकार की वापसी दिखाई गई है. बीजेपी को 288 से 326 तक सीटों पर जीत का आकलन किया गया है. वहीं, अखिलेश यादव की सपा को 71 से 101 सीटों पर जीत का अनुमान है. बसपा और कांग्रेस का प्रदेश से सफाया हो गया है. दोनों ही पार्टियां दहाई का आंकड़ा छूती नजर नहीं आ रही हैं. एग्जिट पोल के आंकड़े अगर 10 मार्च को चुनावी नतीजों में तब्दील होते हैं तो बीजेपी सूबे में कई सियासी इतिहास रच देगी. बीजेपी को मिलती दो तिहाई बहुमत के क्या फैक्टर रहे.
1- कानून व्यवस्था
यूपी के एग्जिट पोल आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर लोगों ने किस मुद्दे पर वोट किया. जवाब है यूपी की कानून व्यवस्था. सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर अमित शाह और पीएम मोदी तक चुनाव प्रचार में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का जिक्र करते नजर आए थे. बुलडोजर तो सिंबल की तरह इस्तेमाल होने लगा, जो योगी राज में माफिया और अपराधियों को घर पर चला. योगी आदित्यनाथ पूरे प्रचार के दौरान कहते नजर आए कि कानून का राज हमारी प्राथमिकता है, हर एक व्यक्ति को सुरक्षा, सबको सुरक्षा लेकिन तुष्टिकरण किसी का नहीं. योगी सरकार के पांच साल के कार्यकाल में सूबे के लोगों में एक धारणा बनी है कि कानून का राज है.
2- यूपी में विकास
बीजेपी ने योगी सरकार के दौरान पांच साल में कराए गए विकास कार्यों को लेकर जमकर प्रचार प्रसार किया था, जो एग्जिट पोल के मुताबिक चुनावी नतीजों में भी तब्दील होते दिख रहे हैं. इंडिया टुडे-एक्सेस माय इंडिया एग्जिट के मुताबिक यूपी में बीजेपी को 27 फीसदी लोगों ने राज्य के विकास के नाम पर वोट दिया है. मोदी-योगी के डबल इंजन की सरकार ने सूबे में विकास को रफ्तार दिया है. बीजेपी नेता पूरे चुनाव प्रचार में डबल इंजन वाली सरकार के नाम पर ही वोट मांगते नजर आए थे.
3- फ्री राशन और स्कीम
यूपी चुनाव में मोदी-योगी सरकार की फ्री राशन और दूसरी स्कीम के लाभार्थी बीजेपी के लिए सियासी तौर पर अहम साबित हुए हैं. कोरना काल से लेकर अभी तक मोदी-योगी सरकार की योजना के तहत गरीब लोगों को फ्री में अनाज बांटा गया, जो काफी सफल रही. यूपी चुनाव में फ्री अनाज लेने वाले ये लाभार्थी वर्ग सबसे ज्यादा साइलेंट रहा. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये दिए गए हैं, जिनकी संख्या भी यूपी में अच्छी खासी है.
सरकारी स्कीम के लाभार्थी वोटर बीजेपी के लिए सियासी तौर पर संजीवनी साबित हुए हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 11 फीसदी लोगों ने फ्री राशन स्कीम के नाम पर अपना वोट दिया है. इसके अलावा 9 फीसदी ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने सरकारी की स्कीम और योजनाओं के लिए वोट किए हैं. एग्जिट पोल से सर्वे से साफ जाहिर होता है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थी बीजेपी के पक्ष में जमकर वोटिंग की है.
4- मोदी-योगी का चेहरा
यूपी में बीजेपी मोदी-योगी के चेहरे पर चुनावी मैदान में उतरी थी, जिसका सियासी फायदा भी मिला. मोदी-योगी की जोड़ी के जादू के आगे विपक्ष का कोई सियासी हथियार काम नहीं आ सका. एग्जिट पोल्स के मुताबिक 8 फीसदी लोगों ने बीजेपी को मोदी के नाम पर वोट दिया है, जिसके साफ जाहिर है कि पीएम मोदी का असर यूपी में कायम है. मोदी पर जनता का प्रचंड विश्वास ऐसा है कि लोग दिक्कत में भी उनका हाथ मजबूती से थामे हुए हैं. वहीं, मोदी-योगी के चेहरे के आगे न तो सपा के अखिलेश यादव टिक पाए और न ही मायावती और प्रियंका गांधी.
5- हिंदुत्व का एजेंडा
उत्तर प्रदेश में एग्जिट पोल से आंकड़ों से यह बात साफ हो गई है कि बीजेपी का हिंदुत्व और राष्ट्रवाद एजेंडा सफल रहा. इन दोनों भवनात्मक मुद्दों को आगे महंगाई, कोरोना मिसमैनेजमेंट, आवारा पशु, बेरोजगारी और गरीबी जैसे मुद्दे नहीं टिक पाए, जिन्हें विपक्ष उठाकर बीजेपी को यूपी चुनाव में घेरना चाहता था. बीजेपी चुनाव में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के एजेंडे को सियासी धार दे रही थी. पश्चिमी यूपी में पलायन और मुजफ्फरनगर दंगे को उठाया तो अवध के क्षेत्र में राममंदिर और आतंकवाद के मुद्दे को धार दिया. पूर्वांचल में भी इसी तरह बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे के इर्द-गिर्द पूरे चुनाव को रखा, जिसका सियासी फायदा मिला.