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UP election: यूपी चुनाव में आज आखिरी चरण का मतदान, मुख्तार अंसारी-धनंजय सिंह समेत कई बाहुबलियों की परीक्षा

यूपी विधानसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण में कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर है तो पूर्वांचल के बाहुबली नेताओं की असल परीक्षा भी इसी फेज में है. मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी और बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह मैदान में हैं तो माफिया धनंजय सिंह और विजय मिश्रा जैसे नेता भी इसी चरण में चुनाव लड़ रहे हैं.

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बृजेश सिंह, मुख्तार अंसारी, धनंजय सिंह, विजय मिश्रा
बृजेश सिंह, मुख्तार अंसारी, धनंजय सिंह, विजय मिश्रा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास लड़ रहे चुनाव
  • बृजेश सिंह के भतीजे सुशील की साख दांव पर
  • माफिया धनंजय सिंह का 'तीर' क्या लगेगा सटीक?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है. सातवें चरण के लिए आज 54 सीटों पर वोटिंग हो रही है. इस चरण के चुनाव में कई मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है तो इस फेज में बाहुबली नेताओं के सामने भी चुनौती है. बाहुबली दिग्गजों पर भी सबकी नजरें हैं, जिनमें मुख्तार अंसारी की सियासी विरासत संभालने बेटे अब्बास उतरे हैं तो बृजेश सिंह के भतीजे मैदान में हैं. इतना ही नहीं, जौनपुर की मल्हनी सीट से चुनाव लड़ रहे बाहुबली धनंजय सिंह भी चर्चित उम्मीदवार बने हुए हैं. ऐसे में देखना है कि इस बार की चुनावी जंग में बाहुबली क्या अपना सियासी वर्चस्व कायम रख पाते हैं कि नहीं? 

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मुख्तार अंसारी के बेटे चुनावी मैदान में
जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी की मऊ सदर विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें हैं. मऊ सीट पर मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए सपा गठबंधन के तहत सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर भी इसी सीट से चुनाव मैदान में हैं, जिनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है. अब्बास अंसारी के खिलाफ बीजेपी से अशोक सिंह ताल ठोक रहे हैं. इस तरह मऊ सीट सातवें चरण की सबसे चर्चित सीटों में से एक बनी हुई है.

मुख्तार अंसारी मऊ सीट से 25 साल से विधायक हैं, लेकिन इस बार उनकी जगह अब्बास अंसारी उतरे हैं. अब्बास अंसारी इसके पहले भी 2017 में घोसी विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में देखना है कि इस बार सपा गठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हुए वो अपने पिता की सियासी विरासत बचा पाते हैं कि नहीं? 

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धनंजय सिंह क्या दोबारा बनेंगे विधायक?
जौनपुर जिले की नौ में से चार सीटों पर भाजपा, एक पर अपना दल, तीन पर सपा, एक पर बसपा का कब्जा रहा है. यहां की मल्हनी विधानसभा सीट पर सभी की नजरें हैं. जौनपुर की मल्हनी सीट पर पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह और सपा विधायक लकी यादव आमने-सामने हैं. धनंजय सिंह जेडीयू के टिकट पर मैदान में हैं तो सपा से पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव दोबारा मैदान में उतरे हैं. बीजेपी ने पूर्व सांसद डॉक्टर के पी सिंह और कांग्रेस ने पुष्पा शुक्ला तो बसपा ने शैलेंद्र यादव को मैदान में उतारा है.

माफिया बृजेश सिंह के भतीजे सुशील मैदान में
चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट पर बीजेपी ने बाहुबली बृजेश सिंह के भतीजे विधायक सुशील सिंह को मैदान में उतारा है. वो चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं. यहां से बसपा ने अमित कुमार यादव और सपा ने मनोज कुमार को मैदान में उतारकर सुशील के कारवां को रोकने की रणनीति बनाई है. बृजेश सिंह के भतीजे के चलते उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है. भाजपा के दिग्गज नेता सुशील के सहारे पूर्वांचल में अपनी धमक बनाए रखने की रणनीति पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष ने सियासी चक्रव्यूह रचा है. 

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जेल से ही चुनाव लड़ रहे विधायक विजय मिश्रा
भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा से लगातार चार बार के विधायक बाहुबली विधायक विजय मिश्रा इस बार जेल से चुनावी मैदान में हैं. आगरा जेल में बंद विधायक विजय मिश्रा प्रगतिशील मानव समाज पार्टी से प्रत्याशी हैं. बीजेपी ने विपुल दुबे, सपा ने रामकिशोर बिंद, बसपा ने उपेंद्र सिंह और कांग्रेस ने सुरेश चंद्र मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है. इस तरह से भदोही सीट पर  विजय मिश्रा के चुनाव प्रचार की कमान उनके परिवार के सदस्य संभाल रहे हैं. ऐसे में देखना है कि विजय मिश्रा क्या अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रख पाएंगे कि नहीं? 

पूर्व सांसद रमाकांत यादव की साख दांव पर 
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में सपा की असल परीक्षा होनी है, लेकिन जिले में सभी की निगाहें फूलपुर पवई सीट पर है. 2017 में इस सीट पर बीजेपी से अरुणकांत यादव विधायक बने थे, लेकिन इस बार उनके पिता पूर्व सांसद रमाकांत यादव सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. बसपा से शकील अहमद तो बीजेपी से रामसूरत मैदान में हैं. बाहुबली रमाकांत यादव दो दशक के बाद विधानसभा चुनाव में उतरे हैं, जिनके सामने बीजेपी और बसपा की चुनौती है. 

पिंडरा सीट पर बाहुबली अजय राय 
वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक अवधेश सिंह दूसरी बार मैदान में हैं लेकिन इस सीट पर सबकी निगाहें कांग्रेस प्रत्याशी बाहुबली अजय राय को लेकर टिकी हुई हैं. अजय राय को अवधेश सिंह ने  2017 में हरा दिया था. इस सीट पर अपना दल (क) ने अपने पदाधिकारी राजेश पटेल को मैदान में उतारते हुए समीकरण साधने का प्रयास किया है. अजय राय इस सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन अब देखना है कि 2022 में क्या फिर से विधानसभा पहुंच पाएंगे कि नहीं? 

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