
उत्तर प्रदेश की गद्दी पर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वापसी हो गई है, राह आसान नहीं थी. क्योंकि इससे पहले कोई भी मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार सत्ता तक पहुंचने में नाकाम रहे थे. लेकिन इस बार बीजेपी की रणनीति रंग लाई और मोदी-योगी की जोड़ी ने यूपी की राजनीति में असंभव को संभव कर दिया है.
बीजेपी की इस प्रचंड जीत के पीछे कई फैक्टर बताए जा रहे हैं. चुनाव से पहले बीजेपी की राह में कई मुश्किलें थीं. किसान नाराज बताए जा रहे थे, सहयोगी दल पाले बदल रहे थे. लेकिन इन सबसे बीच चुनाव में बीजेपी को आधी आबादी यानी महिलाओं का जोरदार साथ मिला है.
जीत में महिलाओं का रोल
यूपी में प्रचंड फतह के बाद अपने पहले संबोधन में CM योगी ने कहा कि इस जीत में महिलाओं का बड़ा योगदान है. आधी आबादी ने आगे आकर बीजेपी के लिए वोट किया है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि जहां-जहां बहनों, माताएं और बेटियों ने पुरुषों के मुकाबले के ज्यादा वोट किए, वहां बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है. पीएम मोदी ने कहा है कि यूपी की इस जीत में महिलाएं सारथी हैं.
बीजेपी को भी भरोसा था, क्योंकि आज के दौर में सरकारी योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को मिल रहा है. और महिलाएं योजनाओं का लाभ उठाने में आगे रहती हैं. उत्तर प्रदेश में जो भी कल्याणकारी योजनाएं हैं, उसके लाभार्थी 80 से 90 फीसदी महिलाएं हैं.
दरअसल, इस चुनाव में बीजेपी का राशन, प्रशासन और महिलाओं पर दांव सटीक बैठा है. क्योंकि राशन और प्रशासन का सबसे ज्यादा पॉजीटिव इम्पैक्ट महिलाओं पर डाला है. अब चुनाव परिणामों को देखें तो महिलाओं ने समाजवादी पार्टी के मुकाबले बीजेपी के साथ जाना पसंद किया है.
बीजेपी की जीत का मंत्र
घर चलाने का काम महिलाओं का होता है, और योगी सरकार ने महिलाओं की रसोई का खूब ख्याल रखा है. सबसे ज्यादा मुफ्त अनाज स्कीम ने महिलाओं को मोदी-योगी के पाले में किया है. मुफ्त अनाज के साथ ही सरकार खाद्य तेल, चीनी और नमक भी दे रही है. योगी सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ गरीबों मुफ्त डबल राशन का लाभ मिल रहा है.
यही नहीं, उज्जवला योजना के तहत नि:शुल्क गैस कनेक्शन और सीधे महिलाओं के बैंक खातों में नकद राशि पहुंचने से बीजेपी की पकड़ देश की आधी आबादी पर मजबूत हो गई. साथ ही शौचालय योजना ने महिलाओं में एक खास संदेश दिया. इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी यूपी में ही सबसे ज्यादा परिवारों को मिला है. आंकड़ों को मानें तो 45 लाख लोगों को अपना घर मिला है. घर-घर बिजली योजना के तहत यूपी में 1.41 करोड़ घरों तक बिजली पहुंचाई गईं. ऐसी योजनाएं महिलाओं को सीधे सरकार से जोड़ती है.
इसके अलावा महिला सुरक्षा मुद्दे को बीजेपी से जमकर भुनाया है, खासकर महिलाओं को अहसास कराया गया कि इस सरकार ने माहौल में बदलाव लाया है. ऐसे में महिलाओं के लिए घर से बाहर तक बीजेपी ने एक लकीर खींच दी, जिसमें राशन और प्रशासन अहम स्थान रहा.
महिलाओं की पहली पसंद बीजेपी
इंडिया टुडे और एक्सिस माइ इंडिया के एक्जिट पोल के मुताबिक सपा के मुकाबले बीजेपी को 16 फीसदी महिलाओं ने अधिक वोट किया है, जबकि पुरुषों में ये अंतर केवल 4 फीसदी का रहा. परिणाम को देखें तो महिलाओं द्वारा बंपर वोटिंग ने ही बीजेपी को इतिहास रचने का मौका दिया है.
इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति अभियान, कन्या सुमंगला योजना, बीसी सखी, बिजली सखी, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और स्वयं सहायता समूह जैसी दूसरी कई कल्याणकारी योजनाओं से महिलाओं और बेटियों को सीधा लाभ मिल रहा है.
इतिहास गवाह है...
इतिहास रचने के लिए बीजेपी ने इतिहास का साथ लिया है. उत्तर प्रदेश में 2007 से अभी जिस पार्टी पर महिला से भरोसा जताया है. उसे सूबे की कमान मिली है. सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डिवेलपिंग सोसाइटी (CSDS) के आंकड़ों के अनुसार, 2007 में बीएसपी को 32 फीसदी, सपा को 26 फीसदी, बीजेपी को 16 फीसदी और कांग्रेस को 8 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था. 2007 में मायावती सत्ता तक पहुंची थीं.
साल 2012 के चुनाव में सपा को 31 फीसदी, बीएसपी को 25 फीसदी, बीजेपी को 14 फीसदी और कांग्रेस को 12 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था. इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद साल 2017 में बीजेपी को रेकॉर्ड 41 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था. जबकि बीएसपी को 23 फीसदी, सपा को 20 फीसदी और कांग्रेस को महज 5 फीसदी महिलाओं ने वोट दिया था.
संयोग भी बीजेपी के साथ
फिलहाल उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है. इस बार पुरुषों के मुकाबले ज्यादा नए महिला वोटर जुड़े हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक, यूपी में करीब 52 लाख नए वोटर्स जुड़े, जिनमें महिलाओं की संख्या 28.8 लाख है, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 23.9 लाख है.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में इस बार कुल मतदाताओं की संख्या 15,02,84,005 रही. जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या 6,98,22,416 हैं, और पुरुष मतदाता कुल 8,04,52,736 हैं. जबकि प्रदेश में कुल 8853 थर्ड जेंडर के वोटर हैं. अगर चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट है कि मोदी-योगी ब्रांड, राशन और सुशासन ने बीजेपी को इतिहास रचने में काफी मदद पहुंचाई है.